अपना भविष्य छोड़कर गरीब बच्चों का भविष्य संवारने में जुटी 23 साल की सौम्या

सौम्या अबतक 45 बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देकर स्कूल में दाखिला दिलवा चुकी है.

सौम्या अबतक 45 बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देकर स्कूल में दाखिला दिलवा चुकी है.

सौम्या सिंह पटेल ने बताया कि फतेहपुर शहर के गिहार बस्ती के आस-पास एक भी सरकारी विद्यालय (School) नहीं है. अबतक वह करीब 45 गरीब बच्चों (Poor Children) को प्रारंभिक शिक्षा देकर स्कूल में दाखिला दिलवा चुकी है.

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फतेहपुर. उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में अमर क्रांति फाउंडेशन की संचालिका सौम्या सिंह पटेल गरीब बस्तियों (Slums) में शिक्षा (Education) की अलख जगा रही है. ईंट-भट्ठों में काम करने वाले मजदूर एवं निर्धन परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए सौम्या उनकी बस्ती नि:शुल्क पाठशाला चला रही है. सौम्या को शुरुआत में तो इसके लिए उपहास सहना पड़ा, लेकिन जब उसने बच्चों को कॉपी-किताब, स्वेटर एवं अन्य स्टेशनरी सामान मुफ्त में उपलब्ध कराई तो अभिभावकों का रुझान भी बच्चों की पढ़ाई की ओर बढ़ा. अभिभावन नियमित रूप से अपने बच्चों को सौम्या की पाठशाला में भेजना शुरू कर दिया.

सौम्या सिंह पटेल ने बताया कि फतेहपुर शहर के गिहार बस्ती के आस-पास एक भी सरकारी विद्यालय नहीं है. अबतक वह करीब 45 गरीब बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देकर स्कूल में दाखिला दिलवा चुकी है. उसे यह सब कर आंतरिक सुख मिलता है.

बस्ती में मूलभूत सुविधा चाहती है सौम्या

सौम्या महज 23 साल की उम्र में समाजसेवा कर गरीब और निर्धन परिवारों के बच्चों की दीदी बनकर उभरी हैं. कोरोना काल में ही सौम्या ने गिहार बस्ती के लोगों को शिक्षा का महत्व समझाया और अपने बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रेरित किया. सौम्या गिहार बस्ती में शिक्षा के साथ-साथ सुविधा के लिए भी कोशिश कर रही है. डीएम से मिलकर सौम्या ने बस्ती में मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने की अपील की है. बस्ती के लोग सौम्या के इस प्रयास की सराहना करते नहीं थकते. अब उनकी आंखों में अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के सपने तैरने लगे है. बस्ती के लोग हर हाल में बच्चों को शिक्षा देना चाहते हैं.

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