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फतेहपुरः क्या फिर साध्वी निरंजन ज्योति को मिलेगी फतेह?

News18 Uttar Pradesh
Updated: May 5, 2019, 2:44 AM IST
फतेहपुरः क्या फिर साध्वी निरंजन ज्योति को मिलेगी फतेह?
साध्वी निरंजन ज्योति

फतेहपुर की लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश की बेहद चर्चित सीटों में से एक है.

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फतेहपुर की लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश की बेहद चर्चित सीटों में से एक है. लगभग हर राजनीतिक पार्टी यहां तक कि निर्दलीय को भी यहां के लोगों ने मौका दिया. सत्ता पलटने में माहिर इस जिले की एक ऐतिहासिक पहचान भी है. करीब एक सदी पुराना इमली का पेड़ यहां के लोगों के गर्व का प्रतीक है. दरअसल 1858 के स्वतंत्रता संग्राम में इस इमली के पेड़ में अंग्रेजों ने 52 शहीदों को फांसी दी थी.

इसीलिए इसे 'बावनी इमली' नाम दिया गया. स्वतंत्रता सेनानियों के इस स्मारक को देखने देश-विदेश से लोग यहां आते हैं. खैर, सियासी उलटफेर करने में माहिर फतेहपुर के चार बार के लोकसभा चुनाव नतीजे देखें तो यहां सत्ता परिवर्तन का इतिहास रहा है. 2014 में साध्वी निरंजन ज्योति बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बेहद चर्चित नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बेटे अफजल सिद्दीकी को हराकर यहां की सांसद बनी थीं. अफजल बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे. 2009 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर इस सीट में फतेह हासिल करने वाले राकेश सचान तीसरे नंपर पर रहे थे.

कौन हैं प्रत्याशी

भाजपा ने साध्वी निरंजन ज्योति को उम्मीदवार बनाया है. 2012 यूपी की हमीरपुर सीट से विधायक बनीं और 2014 में फतेहपुर सीट से सांसद. वैसे तो साध्वी के विवादित बयान हमेशा से चर्चा के केंद्र में रहे हैं. लेकिन 2017 मे अखिलेश यादव को 'औरंगजेब' कहना और फिर दो बच्चे से ज्यादा बच्चे होने पर सभी सरकारी सुविधाएं छीन लेने वाले बयान ने जमकर आलोचना हुई.

कांग्रेस उम्मीदवार राकेश सचान


साध्वी का मुकाबला कांग्रेस के राकेश सचान से है. हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में राकेश सचान समाजवादी पार्टी से इसी सीट के लिए उम्मीदवार थे. लेकिन इस बार सपा से टिकट न मिलने पर इस नाराज होकर पार्टी ही बदल ली. राकेश सचान 2009 में इसी सीट से सपा के टिकट पर लड़े और बसपा को हराकर जीत हासिल की. बसपा से सुखदेव प्रसाद वर्मा हैं. सुखदेव प्रसाद वर्मा पिछले दो बार से फतेहपुर की बिंदकी विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर विधायक हैं.

राजनीतिक इतिहास
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फतेहपुर लोकसभा सीट के तहत 6 विधानसभा सीटे आती हैं. इसमें जहानाबाद, बिंदकी, फतेहपुर, आयह शाह, हुसैनगंज, खागा सीटें शामिल हैं. फतेहपुर पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह का भी संसदीय क्षेत्र रहा है. 1989, 1991 तक पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. फतेहपुर सीट से सांसद रहे. जब वीपी सिंह देश के प्रधानमंत्री बने तब वो इसी सीट से सांसद थे. उस चुनाव में बोफोर्स घोटाले के खिलाफ आवाज उठाकर वीपी सिंह भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत आवाज बन कर उभरे थे.

पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह


विधानसभा सीटों पर दबदबा

इस लोकसभा क्षेत्र में कुल 6 विधानसभा सीटें आती हैं. ये सीटें हैं फतेहपुर, जहानाबाद, बिंदकी, अयाह शाह, खागा और हुसैनगंज. इन सभी सीटों पर बीजेपी और उसकी सहयोगी अपना दल का कब्जा है. 5 सीटें बीजेपी के पास हैं और अपना दल के पास एक सीट है. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक इस क्षेत्र की कुल जनसंख्या के करीब 26 लाख के आस-पास है. इसमें करीब 90 प्रतिशत ग्रामीण जनसंख्या है. ओबीसी जातियों में कुर्मी, लोध और निषाद जातियों का प्रभुत्व है. अतिपिछड़ा समुदाय की जनसंख्या करीब 25 प्रतिशत के आस-पास है.

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First published: May 5, 2019, 2:37 AM IST
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