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Fatehpur News: गंभीर बीमारी से जूझ रहा है ये मासूम, इलाज के लिए चाहिए 16 करोड़ का इंजेक्शन

गंभीर बीमारी से जूझ रहा है फतेहपुर का मयंक

गंभीर बीमारी से जूझ रहा है फतेहपुर का मयंक

Fatehpur News: इस बीमारी में मरीज के शरीर के अंग जैसे हाथ-पैर सही ढंग से काम नहीं कर पाते. मयंक की इस पीड़ा को देख उसके माता-पिता भी बहुत चिंतित है. माता पिता ने बीजेपी के सदर विधायक विक्रम सिंह से मिलकर मदद की गुहार लगाई है.

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    फतेहपुर. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर (Fatehpur) जिले के थरियांव थाना क्षेत्र के रामपुर गांव के रहने वाले ज्ञानेंद्र सिंह का 6 वर्षीय बेटा मयंक पिछले चार महीनों से एक ऐसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, जिस कारण वह दैनिक कार्य भी नहीं कर पाता है. दिखने में तो मयंक एकदम चुस्त-दुरुस्त है, लेकिन उसे जो बीमारी है उसका नाम मस्कुलर डिस्ट्रॉफी है. इस बीमारी में मरीज के शरीर के अंग जैसे हाथ-पैर सही ढंग से काम नहीं कर पाते. मयंक की इस पीड़ा को देख उसके माता-पिता भी बहुत चिंतित है. माता पिता ने बीजेपी के सदर विधायक विक्रम सिंह से मिलकर मदद की गुहार लगाई है.

    डॉक्टरों ने बताया कि मयंक की बीमारी को ठीक करने वाला इंजेक्शन भारत में उपलब्ध नहीं है और इसे विदेश से मंगाना पड़ता है, जिसकी कीमत 16 करोड़ रूपये है. वहीं सदर विधायक विक्रम सिंह ने बताया कि इस बीमारी का इलाज अपने भारत देश में नहीं बल्कि विदेश में है. उन्होंने मासूम के इलाज के लिए लोगों से मदद की अपील करते हुए कहा कि वह पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ को भी मासूम के इलाज में मदद के लिए पत्र लिखेंगे।

    लाखों में से किसी एक को होती है ये बीमारी
    बता दें कि सदर विधानसभा क्षेत्र के रामपुर थरियांव गांव के रहने वाले ज्ञानेंद्र सिंह व उनकी पत्नी पिंकी सिंह अपने 6 वर्षीय बेटे मयंक को लेकर इधर से उधर भटक रहे हैं. ज्ञानेंद्र सिंह की मानें तो उसका 6 वर्षीय बेटा अचानक लड़खड़ा कर गिरने लगा. यह देखकर वह घबरा गए और उसे प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया, जहां मासूम की हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने पीजीआई के लिए रेफर कर दिया. पीजीआई के डॉक्टरों ने जब जांच करवाया तो इस गरीब परिवार के होश उड़ गए. क्योंकि एक ऐसी बीमारी उनके बेटे को चपेट में ले लिया है जो अमूमन लाखों में से किसी एक व्यक्ति को होती है.

    इंजेक्शन की कीमत 16 करोड़ रुपए
    पीजीआई के डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनके बेटे को मस्कुलर डिस्ट्रोफी नाम की गंभीर बीमारी हुई है. इससे जैसे-जैसे बेटा बड़ा होगा उसका मस्तिष्क विकास नहीं कर पाएगा और बेटा खड़ा होने में असमर्थ हो जाएगा. परिजनों के मुताबिक पीजीआई के डॉक्टरों ने कहा कि इसका भारत में इलाज भी संभव नहीं है. इस बीमारी का इलाज विदेशों में संभव है, लेकिन उसके लिए जो इंजेक्शन लगाया जाता है उसकी कीमत करीब 16 करोड़ रुपए है. आर्थिक तंगी का शिकार ज्ञानेंद्र सिंह किसी भी कीमत में इतनी बड़ी रकम नहीं दे सकता. ऐसे में वह अपनी तकदीर को कोसता है और कहता है कि अब वह इतनी बड़ी रकम कहां से लाएं और कैसे अपने बेटे का इलाज कराए.

    विधायक ने दिया मदद का भरोसा
    खतरनाक बीमारी की जानकारी के बाद बेटे के इलाज के लिए उसके माता पिता दर-दर भटकते हुए सदर विधायक विक्रम सिंह के आवास पर पहुंचे और विधायक से सारी बातें बताकर मदद की गुहार लगाई. जिसके बाद विधायक विक्रम सिंह ने मासूम के इलाज के लिए लोगों से मदद की अपील करते हुए कहा कि वह मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि पीएम नरेंद्र मोदी को भी मासूम के इलाज में मदद के लिए पत्र लिखेंगे. अगर प्रधानमंत्री राहत कोष से इस गरीब परिवार को मदद मिल गई तो 16 करोड़ रुपए के इंजेक्शन से मयंक को इक नई जिंदगी मिल जाएगी, जिससे वह खुद ही अपने पैरों पर खड़ा हो सकेगा.

    (रिपोर्ट: धारा सिंह)

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