मोदी लहर नहीं, इस शख्स की वजह से सपा के गढ़ में खिला बीजेपी का कमल

समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) का गढ़ बन चुकी फिरोजाबाद (Firozabad) सीट में आखिरकार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सेंध लगा दी. यहां से बीजेपी के चंद्र सेन जादौन ने 28,781 वोटों से जीत दर्ज की.

News18 Uttar Pradesh
Updated: May 24, 2019, 9:43 PM IST
मोदी लहर नहीं, इस शख्स की वजह से सपा के गढ़ में खिला बीजेपी का कमल
फाइल फोटो
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Updated: May 24, 2019, 9:43 PM IST
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) का गढ़ बन चुकी फिरोजाबाद (Firozabad) सीट में आखिरकार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सेंध लगा दी. यहां से बीजेपी के चंद्र सेन जादौन ने 28,781 वोटों से जीत दर्ज की. जादौन को कुल 4 लाख 95 हजार 819 वोट मिले. जबकि अक्षय यादव (Akshay Yadav) 4 लाख 67 हजार 038 वोट ही पा सके. वहीं, अक्षय यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) तीसरे नंबर पर रहे. उन्हें 91 हजार 869 वोट मिले. लेकिन अक्षय की हार को देखा जाए तो फिरोजाबाद में बीजेपी की रणनीति या मोदी लहर से ज्यादा चाचा शिवपाल का हाथ रहा. अगर शिवपाल यादव इस सीट से चुनाव नहीं लड़ते तो बीजेपी प्रत्याशी के लिए सपा का 'गढ़' बन चुकी इस सीट पर कमल खिलाना मुश्किल होता. इस बात की गवाही चुनावी आंकड़े देते हैं..

लोकसभा चुनाव के लिए गुरुवार 23 मई को मतगणना में सपा-बसपा गठबंधन से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी और मौजूदा सांसद अक्षय यादव को हार का सामना करना पड़ा. अक्षय यादव को 43.41 फीसदी वोट प्रतिशत से 4 लाख 67 हजार 038 मत प्राप्त हुए. वहीं बीजेपी के डॉ चन्‍द्र सेन जादौन को 46.09 फीसदी वोट के हिसाब से 4 लाख 95 हजार 819 वोट मिले. जिसके चलते अक्षय को 28,781 वोटों से हार का सामना करना पड़ा.



अक्षय यादव (File Photo)


अगर शिवपाल यादव इस सीट से चुनाव मैदान में नहीं होते तो अक्षय आसानी से चुनाव जीत जाते क्योंकि शिवपाल यादव को मिलने वाला वोट सपा का माना जा रहा है. शिवपाल सिंह यादव को 8.54 प्रतिशत के हिसाब से 91 हजार 8 सौ 69 वोट मिले. ऐसे में अगर अक्षय यादव और उनके चाचा के वोट को मिला दें (467038+ 91869) तो आंकड़ा होता है 5 लाख 58 हजार 907, जो करीब 63 हजार वोट अधिक हो जाता है. पिछली बार यानी 2014 के लोकसभा चुनाव में अक्षय यादव ने इस सीट से 1 लाख 14 हजार 059 वोटों से जीत दर्ज की थी.

विधानसभा चुनाव में भी शिवपाल यादव ने सपा को पहुंचाया नुकसान
यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी पर एकाधिकार को लेकर छिड़ी जंग और यादव कुनबे की महाभारत में भले ही अखिलेश यादव विजयी रहे हों, लेकिन उन्हें शिवपाल यादव की नाराजगी विधानसभा चुनाव में भी भारी पड़ी थी. 2017 के विधानसभा चुनाव में शिवपाल को दरकिनार कर अकेले फैसला लेने वाले अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया और नारा दिया 'यूपी के लड़कों का साथ'. लेकिन चुनाव परिणाम उल्टा आया. सपा पचास का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी था. कहा जाता है कि उस चुनाव में भी सपा के कार्यकर्ता जो शिवपाल के खेमें के थे, उन्होंने पार्टी का सही से साथ नहीं दिया था.

शिवपाल सिंह यादव (File Photo)

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2014 में मोदी लहर के बावजूद जीते थे अक्षय
लोकसभा चुनाव 2014 में पूरे उत्‍तर प्रदेश में मोदी लहर के बावजूद यहां समाजवादी पार्टी के अक्षय यादव ने बाजी मार ली थी. अक्षय यादव को कुल 5 लाख से ज्यादा यानी 48.4% वोट मिले थे, जबकि भाजपा के उम्मीदवार को 38 फीसदी वोट मिले थे. अक्षय यादव ने एसपी सिंह बघेल को शिकस्‍त दी थी. ऐसा नहीं है कि बीजेपी इस सीट पर जीत नहीं पाई है. 1991 के बाद बीजेपी के प्रभु दयाल कठेरिया ने जीत की हैट्रिक लगाई थी.

ये है जातीय समीकरण
इस सीट पर मुस्लिम, जाट और यादव वोटरों का समीकरण बड़ी भूमिका निभाता है. फिरोजाबाद संसदीय क्षेत्र में पांच विधानसभा आती हैं, जिनमें से चार पर बीजेपी ने जीत दर्ज की, जबकि सिर्फ एक सिरसागंज सीट पर सपा ने जीत दर्ज की थी. फिरोजाबाद यादव बहुल सीट है. यहां यादव वोटरों की संख्या 4.31 लाख के करीब है, इसके अलावा 2.10 लाख जाटव, 1.65 लाख ठाकुर, 1.47 लाख ब्राह्मण, 1.56 लाख मुस्लिम और 1.21 लाख लोधी मतदाता हैं.

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