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बिजली नहीं थी तो डॉक्टर ने मोबाइल की रोशनी में लगाए मरीज को टांके

News18 Uttar Pradesh
Updated: October 21, 2019, 6:18 PM IST
बिजली नहीं थी तो डॉक्टर ने मोबाइल की रोशनी में लगाए मरीज को टांके
फिरोजाबाद में दम तोड़ती स्वास्थ्य सेवाएं

इमरजेंसी के मेडिकल स्टाफ (Medical Staff) से मोबाइल की रोशनी (Mobile Light) में ही मोहन का इलाज किया और उसे टांके भी लगाए.

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फिरोजाबाद. जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज (Medical College) में अपग्रेड हुए फिरोजाबाद (Firozabad) के जिला अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं की रविवार को पोल खुल गई. जहां रोशनी का कोई इंतजाम न होने के कारण सड़क हादसे में घायल एक शख्स का मोबाइल की रोशनी में इलाज किया गया. इस मामले में मेडिकल कॉलेज का कोई भी अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर करोड़ों रुपयों के बजट का आखिर हो क्या रहा है?

आपको बता दें कि फरिहा थाना क्षेत्र के गांव गौहाना निवासी मोहन पाल निवासी एक युवक किसी काम से फरिहा आ रहा था तभी रास्ते में उसकी बाइक फिसल गई और मोहन गम्भीर रूप से घायल हो गया. मोहन को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लाया गया. जहां उसका इलाज शुरू किया गया लेकिन जब इलाज किया जा रहा था तब बिजली नहीं थी और इमरजेंसी में लाइट का कोई इंतजाम नहीं था.

लिहाजा इमरजेंसी के मेडिकल स्टाफ से मोबाइल की रोशनी में ही मोहन का इलाज किया और उसे टांके भी लगाए. सवाल यह है कि इलाज में इतनी लपरवाही क्यों जहां एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर करोड़ों रुपया खर्च कर रही है वहीं फिरोजाबाद में इतनी बड़ी लापरवाही क्यों?

दरअसल कुछ समय पहले संभल से भी ऐसी ही खबर आई थई जिसमें अस्पताल में एक बीमार बच्चे के इलाज के लिए हॉस्पिटल स्टाफ ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी (Mobile Torch light) का सहारा लिया, क्योंकि अस्पताल में बिजली नहीं थी. ऐसा नहीं है कि अस्पताल में जेनरेटर या इंवर्टर नहीं था, लेकिन बीमार बच्चे को ड्रिप लगाने के समय बिजली नहीं थी, सो मोबाइल की रोशनी में ही उसके हाथों की नसें तलाश करने और ड्रिप लगाने का काम हो सका.

(अरविंद की रोपोर्ट)

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First published: October 21, 2019, 6:18 PM IST
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