बलरामपुरः गैंगरेप पीड़िता के परिजनों का आरोप-सभी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही पुलिस

रेप पीड़िता के परिजनों ने पुलिस पर सवाल खड़े किये हैं.(सांकेतिक तस्वीर)
रेप पीड़िता के परिजनों ने पुलिस पर सवाल खड़े किये हैं.(सांकेतिक तस्वीर)

बलरामपुर (Balrampur) में छात्रा के साथ हुए गैंगरेप (Gangrape) के मामले में परिजनों ने स्थानीय पुलिस (Police) पर सभी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करने का आरोप लगाया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2020, 7:23 PM IST
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बलरामपुर. जिले के गैंसडी में हुए गैंगरेप (Gang Rape) मामले में पुलिस पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. इस मामले में पुलिस (Police) ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन परिजनों का आरोप है कि इस वीभत्स घटना में कई और लोग शामिल हैं, जिनको पुलिस गिरफ्तार नहीं कर रही है. पीड़िता के परिजन स्थानीय पुलिस (Police) के रवैये पर भी सवाल उठा रहे हैं. घटना के 72 घंटे बीतने के बाद कई ऐसे सवाल हैं जो अनुत्तरित हैं. जिले की पुलिस को जिनका जवाब देना होगा.

जानकारी के अनुसार मंगलवार को पीड़िता दिन में 10 बजे अपने घर से कॉलेज के लिये निकली थी. कॉलेज में एडमिशन फीस जमा करने के बाद लगभग 12:30 बजे पीड़िता कॉलेज से वापस निकली. लेकिन गैंसडी कस्बे के एक घनी आबादी वाले इलाके में बने कमरे में पीड़िता के साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया गया.

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परिजनों से पुलिस से किए ये सवाल
परिजन यही सवाल कर रहे हैं कि पीड़िता आखिर उस घनी आबादी में कमरे में कैसे पहुंची? दोपहर बाद करीब चार बजे उसी मोहल्ले में रहने वाले डॉक्टर जिया उर्रहमान को पीड़िता के इलाज के लिए बुलाया गया. डॉक्टर जिया उर्रहमान ने कमरे में बेहोशी की हालत में पड़ी अकेली लड़की को देखकर इलाज से इनकार कर दिया. साथ ही डॉक्टर ने उसके परिजनों को बुलाने की बात कहकर अपने क्लीनिक में आ गये. अब प्रश्न यह उठता है कि डाक्टर ने यदि कमरे में पीडिता को ऐसी हालत में देखा तो डॉक्टर नें पुलिस या 108 एम्बुलेंस कोसूचना क्यों नहीं दी?

पीड़िता को रिक्शे से घर भेजा
कमरे में कैद पीड़िता की बिगड़ती हालत पर उसका इलाज किसी और से कराया जाता है, क्योंकि पीड़िता के हाथ में विगो लगा हुआ मिलता है. फिर प्रश्न उठता है कि डॉक्टर जिया उर्रहमान द्वारा इलाज से मना किये जाने के बाद वह कौन सख्श है जो पीड़िता के हाथ में विगो लगाता है और पीड़िता को कौन सी इंजेक्शन या दवाइयां दी जाती है? इसके बाद आरोपी अंधेरा होने का इंतजार करते हैं और करीब सात बजे शाम को एक रिक्शा का बुलाकर बेहोशी की हालत में पीड़िता को उसके घर भेज देते हैं. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रिक्शा वाला बेहोश पीड़िता को अपने पीठ पर लादकर पिछले दरवाजे से निकलता है. जो आम रास्ता नहीं बल्कि कूड़ों के ढेर से पटा तालाब है, जहां रिक्शा वाला पीड़ता को लेकर पानी में गिर पड़ता है.

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थाने से सामने से गुजरा रिक्शा, पुलिस बेखबर
फिर से उठकर पीड़िता को अपने पीठ पर गठ्ठर की तरह लादकर पचास मीटर दूर गली में खडे रिक्शे तक पहुंचाता है. लड़की को रिक्शे के पावदान पर बैठाया जाता है और दो नाबालिग लड़के जो आरोपियों के रिश्तेदार बताये जाते हैं वो पीड़िता को पकड़कर लगभग एक किलोमीटर दूर उसके घर तक पहुंचाते हैं. इस दौरान कस्बा पुलिस चौकी के सामने से रिक्शा गुजरता है, लेकिन क्या किसी की निगाह पीड़िता पर नहीं पड़ी ? यदि पीड़िता का समय से इलाज हो जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी. पीड़िता के परिजन आरोप लगा रहे हैं कि अभी तक पुलिस ने इन संदिग्ध पहलुओं पर कोई ध्यान क्यों नहीं दिया.

पीड़िता के परिजन यह भी आरोप लगा रहे हैं कि अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दी गई. यह भी नहीं बताया गया कि उसकी मौत किन कारणों से हुई है. स्थानीय पुलिस की शिथिल कार्य प्रणाली को लेकर परिजनों में आक्रोश है. पीडिता के परिजन घटना में शामिल अन्य आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं.
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