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गंगा-कार्तिक मेला: आस्था की डुबकी लगाने 10 लाख से अधिक श्रद्धालु जुटे, कभी पांडवों ने भी किया था यहां दीपदान!

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 11, 2019, 2:43 PM IST
गंगा-कार्तिक मेला: आस्था की डुबकी लगाने 10 लाख से अधिक श्रद्धालु जुटे, कभी पांडवों ने भी किया था यहां दीपदान!
हापुड़ में गंगा कार्तिक मेले में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे लाखों श्रद्धालु

कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) मेले का मुख्य स्नान मंगलवार यानि कल होगा जिसके मद्देनजर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. मेला क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी (CCTV) और ड्रोन कैमरों (drone cameras) की मदद से की जा रही है. गढ़मुतेश्वर (Garhmuteshwar) में कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान का पौराणिक महत्व है. प्रत्येक वर्ष इस दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां आस्था की डुबकी लगाने के लिए जुटते हैं.

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हापुड़. उत्‍तरप्रदेश के हापुड़ जनपद में गंगा किनारे विशाल रेतीले मैदान पर हजारों वर्षो से लगते आ रहे गंगा कार्तिक मेले को लेकर पुलिस-प्रशासन की व्यवस्था चाक-चौबंद है. 10 लाख से ज्यादा संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने मेला क्षेत्र में पहुंच चुके हैं. इस मेले का पौराणिक महत्व है कहते हैं कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने भी दिवंगत योद्धाओं की मुक्ति के लिए यहां आकर दीपदान किया था.

कार्तिक पूर्णिमा मेले का मुख्य स्नान मंगलवार यानि कल होगा जिसके मद्देनजर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. news 18 संवाददाता ने मेला स्थल पहुंच कर तैयारियों का जायजा लिया. वो बताते हैं कि मेले में श्रद्धालुओं का आगमन तेजी से हो रहा है, मेला स्थल पर बसाई गई टेंट नगरी में हर-हर गंगे के जयकारे गूंजने लगे हैं. कार्तिक पूर्णिमा मेले का मुख्य स्नान मंगलवार को होगा जिसके मद्देनजर करीब 10 लाख श्रद्धालुओं ने मेले में अपना डेरा डाल लिया है. मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालु गंगा किनारे तंबू लगाकर मौज-मस्ती करने के साथ ही गंगा में आस्था की डुबकी भी लगा रहे हैं.

गंगा में स्नान-पूजन करते श्रद्धालु


पौराणिक कथाओं की नजर से मेला 

गढ़मुक्तेश्वर गंगा नगरी से अनेक पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं. यहां प्रतिवर्ष गंगा किनारे कार्तिक मेला लगता आ रहा है. कहा जाता है कि भगवान शंकर के गणों की मुक्ति के बाद शिव बल्लभपुर स्थान का नाम गढ़मुक्तिस्वर था जो वर्तमान में गढ़मुक्तेश्वर के नाम से विख्यात है. पौराणिक कथा के मुताबिक आदिकाल में दुर्वासा ऋषि मंदराचल पर्वत पर तपस्या कर रहे थे तभी भगवान शंकर के गण जय और विजय ने वहां पहुंचकर उनकी तपस्या में विघ्न डाल दिया और ऋषि का उपहास उड़ाया. जिससे क्रोधित होकर दुर्वासा ऋषि ने दोनों गणों को पिशाच योनि में जाने का श्राप दे दिया था.

दुर्वासा के श्राप से व्याकुल गण समूचे संसार में मुक्ति के लिए भटकने बाद मां पार्वती की शरण में पहुंचे और श्राप से मुक्ति दिलाने का उपाय बताने की मिन्नतें कीं. जिसके बाद मां पार्वती ने भगवान शंकर से गणों की मुक्ति के लिए उपाय पूछा तो भगवान शंकर ने कहा क़ि 'जंबूद्वीप यानि हस्तिनापुर से पूर्वी सीमा में स्थित शिवबल्लभपुर नामक स्थान मुझे संसार में सर्वाधिक प्रिय है जिसकी स्थापना मैंने स्वयं की है और मैं वहां मुक्तेश्वर महादेव के रूप में विराजमान हूं'. मां पार्वती के बताए अनुसार दोनों गण गंगा किनारे पहुंचे और मुक्तेश्वर महादेव की घोर उपासना के बाद गंगा में डुबकी लगाई जिसके बाद दोनों गणों को दुर्वासा ऋषि के श्राप से मुक्ति मिली थी. गणों की मुक्ति के बाद शिव बल्लभपुर नामक स्थान गढ़मुक्तिस्वर हो गया जो वर्तमान में गढ़मुक्तेश्वर के नाम से जाना जाता है.

हापुड़ के कार्तिक मेले के लिए बसाई गई टेंट नगरी

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पांडवों ने भी किया था दीपदान!
पौराणिक कार्तिक मेले में मुख्‍य स्‍नान वाले दिन श्रद्धालु अपने दिवंगत परिजनों की आत्‍मा की शांति के लिए गंगा में दीपदान करते हैं. कहा जाता है कि महाभारत काल में युद्ध में मारे गए सैनिकों की आत्‍मा की शांति के लिए पांडवों ने भी यहां दीपदान किया था तब जाकर सैनिकों की आत्‍मा को शांति मिली थी. तभी से गढमुक्‍तेश्‍वर में लोग अपने परिजनों की आत्‍मा की शांति के लिए यहां दीपदान करते आ रहे है.

गंगा किनारे कार्तिक मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए मेला क्षेत्र को 14 सेक्टर 22 थानों में बांटा गया है. प्रत्येक सेक्टर में एक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है. वाच टावरों के माध्यम से भी मेला क्षेत्र की निगरानी की जा रही है इसके साथ ही मेला क्षेत्र में घुड़सवार पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए हैं. मेला क्षेत्र पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है. मेले में एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है जहां से मेले में लगे सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन कैमरे की तस्वीरों पर नजर रखी जा रही है.

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First published: November 11, 2019, 2:37 PM IST
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