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#OperationChallan: ऐसे उड़ाई जा रही है नियमों की धज्जियां, रिश्वत लेकर खत्म किए जा रहे हैं चालान

News18Hindi
Updated: September 20, 2019, 3:31 PM IST
#OperationChallan: ऐसे उड़ाई जा रही है नियमों की धज्जियां, रिश्वत लेकर खत्म किए जा रहे हैं चालान
अंडरकवर रिपोर्टर ने मामले में और तह तक जाने के लिए गाजियाबाद के सीजेएम कोर्ट में एक ऐसे विभागीय शख्स से मुलाकात की जिसने चालान माफ़ कराने की बात कही.

ये आलम सीजेएम कोर्ट का है जहां इस तरह से पैसे का मोल भाव किया जा रहा है. ट्रैफिक चालान भुगतने आए किसी और व्यक्ति से पैसे लेकर कोर्ट स्टॉफर अपनी जेब में पैसे रखता है और कहता है –“चलो सौ पचास कम ही दे दो.”

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  • Last Updated: September 20, 2019, 3:31 PM IST
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(साहिल मुरली मेंघानी)

गाजियाबाद. नए मोटर व्हीकल एक्ट (New Motor vehicle Act 2019) के तहत किए जा रहे चालान (Challan) की चर्चाएं हर तरफ हैं. जहां एक तरफ बड़े-बड़े चालान काटे जा रहे हैं वहीं इसी दौर में 'सीएनएन न्यूज 18' ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया. इस स्टिंग ऑपरेशन में सामने आया कि कैसे ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों ने पुलिस और कोर्टकर्मियों के साथ मिलकर रिश्वत के जरिए चालान से बचने का उपाय निकाल लिया हैं.

'सीएनएन न्यूज 18' के स्टिंग में साफ दीख रहा है कि गाजियाबाद ( Ghaziabad) में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CHIEF JUDICIAL MAGISTRATE'S OFFICE) के दफ्तर में काम करने वाले कर्मचारी, पुलिस वालों और वकीलों ने मिलकर नियमों को दरकिनार करने के तरीके निकाल लिए गए हैं. सबसे अहम बात ये सामने आई कि नए नियमों के आने के बाद से रिश्वत की दरें भी दस गुना तक बढ़ गई हैं.

गैरकानूनी धंधे की खुली पोल 

इन दिनों बहुत से लोग वाहनों का चालन मिलने को लेकर डरे हुए हैं. देश में बातचीत का ये एक बहुत आम मुद्दा बन गया है. 'सीएनएन न्यूज 18' ने इसे लेकर एक स्ट्रिंग ऑपरेश किया. नेटवर्क के विशेष संवाददाता साहिल मुरलीमेंघानी ने अपनी पहचान छुपा कर इस गैरकानूनी धंधे की पोल खोली. संवाददाता ने कहा कि वे 15 हजार रुपये के अपने चालान को कम कराना चाहते हैं. इसके लिए संवाददाता ने पुलिस वालों, वकीलों और यहां तक कि सीजेएम कार्यालय में काम करने वालों तक से बातचीत की, लेकिन जो बातें सामने आई वो दिमाग चकरा देने वाली है. जहां भी वो गया उस हर जगह एक जुगाड़ सामने आ गया. इसके कुछ अंश इस तरह से हैं.

यहां देखिए पूरा वीडियो - 


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“कोर्ट में जाइए, वहां हो जाएगा, चिंता मत कीजिए”
समय – 11 बजे, जगह – गाजियाबाद का चालान भुगतान काउंटर. टीम सबसे पहले काउंटर पर 15 हजार रुपये के चालान को कम कराने का आग्रह करती है. वहां एक पुलिस वाला कोर्ट की तरफ जाने को कहता है. पुलिस वाला कहता है- “कोर्ट में जाइए, वहां हो जाएगा. चिंता मत कीजिए.”

इस पर संवाददाता सवाल करता है कि क्या पांच हजार में काम हो जाएगा. पुलिस वाला बताता है कि इससे भी कम में काम हो जाएगा. पुलिस वाले ने दावा किया कि आपका चालान माफ हो जाएगा सिर्फ 5 हजार की रिश्वत देनी होगी. इस पर रिपोर्टर पूछता है कि उसका तो सिर्फ 5 हजार रुपया ही खर्च होगा?

पुलिस वाले ने बिचौलिए से मिलवाया
पुलिस वाले ने ये भी आश्वासन दिया कि हो सकता है, इससे भी कम लगे. साथ ही ये भी कहता है चालान माफ हो जाएगा, चिंता मत कीजिए. वक्त जाया किए बगैर पुलिस वाले ने एक बिचौलिए से संवाददाता की बात करा दी. बिचौलिए ने बताया कि कोर्ट के फला कमरे में जा कर इस नाम के आदमी मिल लीजिए, वो आदमी खुद ही चालान को रिकॉर्ड से हटा देगा. उसे बस बिचौलिए का नाम बताना है. हजार दो हजार रुपये लेकर आपका काम कर देगा.

काम तो हो जाएगा ना?
अगले दिन संवाददाता फिर कोर्ट परिसर पहुंची और सीजेएम दफ्तर के एक स्टॉफर ने 15 हजार के चालान को सिर्फ 5 हजार रुपये की रिश्वत के बदले खत्म करने की बात कही.
कोर्ट  ऑफिस का स्टॉफर कहता है – “एक बार आपका चालान यहां आ जाए तो उसे सिर्फ 5 हजार रुपये में खत्म कर देंगे.” संवाददाता ने सिर्फ 4 हजार रुपये में इसे खत्म करने का अनुरोध किया तो उसने मना कर दिया.

फिर संवाददाता ने एक बार और पूछा चालान खत्म तो हो जाएगा. इस पर उसने पूरा आश्वासन दिया. बार-बार 4 हजार के लिए आग्रह किए जाने पर उसने कहा कि देख लो रकम ज्यादा भी हो सकती है. इस पर संवाददाता ने फिर आग्रह किया कि किसी तरह उसका काम हो जाए. इस दरम्यान संवाददाता ने कई बार पूछा कि काम तो हो जाएगा? इस पर कोर्ट स्टाफर एक बार नाराजगी भी जताता है. इस पर संवददाता ने नरमी के साथ उससे माफी मांग ली और काम करवाने का अनुरोध किया.

“चलो सौ पचास कम ही दे दो”
ये आलम सीजेएम कोर्ट के आस पास का है जहां इस तरह से पैसे का मोल भाव किया जा रहा है. ट्रैफिक चालान भुगतने आए किसी और व्यक्ति से पैसे लेकर कोर्ट स्टॉफर अपनी जेब में पैसे रखता है और कहता है –“चलो सौ पचास कम ही दे दो.”  इस तरह से स्टिंग में सब साफ साफ दिखता है कि कानून को लागू करने के लिए जिम्मेदार कोर्ट स्टॉफर और पुलिस वाले कैसे कानून तोड़ रहे हैं और वे भी अकेले नहीं है.

पहले से दस गुना बढ़ गई रिश्वत
ऐसे में लागू किए गए नए ट्रैफिक नियम से एक बहुत बड़ा असर पड़ा है. जिससे कि चालान से बचने के लिए ली जा रही रिश्वत, अब पहले से दस गुना बढ़ गई है. सीएनएन न्यूज़ 18 के इस स्टिंग में रिश्वत के लिए पुलिस और कोर्ट के कर्मचारियों की सांठगांठ का भी पर्दाफाश किया गया. जिसमें चालान लिखे गए और जब्त लाइसेंस गाजियाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कार्यालय के कर्मचारियों  द्वारा वापस किए जा रहे हैं. लेकिन सरकारी रिकॉर्ड से ट्रैफिक पुलिस द्वारा जारी किए गए चालान को कैसे हटाया जा सकता है? इस बात का पता लगाने के लिए CNN-News18 के अंडरकवर रिपोर्टर साहिल मुरली मेंघानी ने गाज़ियाबाद कोर्ट में इस कड़ी से जुड़े एडवोकेट के साथ सौदा किया, जो सरकारी मामले देखते हैं.

दो मिनट में ही दूसरा ऑफर भी
अंडरकवर रिपोर्टर ने मामले में और तह तक जाने के लिए गाजियाबाद के सीजेएम कोर्ट में एक ऐसे विभागीय शख्स से मुलाकात की जिसने चालान माफ़ कराने की बात कही. उसने चालान में किए गए 15 हजार रुपए को 5 हजार की रिश्वत में ही निपटवाने का दावा किया. वहीं अगले दो मिनट के अंदर ही न्यूज़ 18 के रिपोर्टर को चालान माफ़ कराने के लिए दूसरा ऑफर मिला. इस बार चालान माफ़ कराने की पेशकश एक एडवोकेट ने की थी. रिपोर्टर ने जब एडवोकेट से बात की तो उन्होंने ने भी चालान किए 15 हजार के जुर्माने को 5 हजार रुपए में माफ़ कराने की बात कही. एडवोकेट ने इसके लिए एक रास्ता बताया, उसने बताया कि पहले दो महीने तक चालान का भुगतान मत करना. उसके बाद वह चालान कोर्ट आ जाएगा और मैं यहां से उसे खत्म करा दूंगा.

सरकारी रिकॉर्ड से ख़त्म कैसे किया जा सकता है चालान?
तो इस कड़ी में एक ये तरीका सामने आया कि पहले तो चालान का भुगतान ना किया जाए. जिससे वह भुगतान ना किया गया चालान, कोर्ट पहुंच जाएगा जहां विभाग से जुड़े लोग उसे वहां से खत्म कर देंगे. इसमें बड़ा सवाल ये उठता है कि एक बार जारी हुआ चालान, सरकारी रिकॉर्ड से ख़त्म कैसे किया जा सकता है? बहरहाल एडवोकेट से हुई बातचीत में रिपोर्टर ने कहा कि पहले तो इतनी रिश्वत नहीं देनी पड़ती थी, इसपर एडवोकेट ने जवाब दिया कि अब चालान भी तो दस गुना हो गया है.

वहीं जब रिपोर्टर ने एडवोकेट से सवाल किया कि क्या आपको ये रुपए औरों को भी देने होते हैं तो इस पर एडवोकेट ने बताया कि ऊपर कई लोग हैं जिन तक ये रुपया पहुंचता है और काम हो जाता है. इसी के साथ एडवोकेट ने एक साथ पूरे 5 हज़ार रुपए दिए जाने की बात भी कही.

"पुलिस के पास नहीं चलता है, लेकिन कोर्ट में सब जुगाड़ चलता है"
ऐसे में नए नियम से यह बड़ा बदलाव देखने को मिला कि रिश्वत के रूप में ली जाने वाली रकम पहले से दस गुना हो गयी और जो रिश्वत पहले पुलिस द्वारा लिए जाने की बात कही जाती थी वह अब जगह बदल कर कोर्ट पहुंच चुकी है. ऐसे में रिपोर्टर ने जब एडवोकेट से पूछा कि पहले तो सब कुछ आसानी से निपट जाता था, लेकिन जब से ये नया नियम लागू हुआ है तब से ये जुगाड़ नहीं चलता है. एडवोकेट ने इस बात के जवाब में कहा,  "पुलिस के पास नहीं चलता है, लेकिन कोर्ट में सब जुगाड़ चलता है."

ट्रैफिक पुलिस ने दिया आश्वासन
इस तरह से गाजियाबाद के चोटी के ज्यूडिशियल ऑफिस परिसर के बाहर एक और डील हुई. 3 घंटे से भी कम समय में न्यूज़ 18 की टीम कोर्ट से बाहर आती है. इस पूरे स्टिंग में ये साफ़ हो गया कि कैसे कोर्ट परिसर के नाक के नीचे  रिश्वत आसानी से चल रही है और कैसे यहां क़ानून का ही मजाक उड़ाया जा रहा है. ऐसे में जब इस स्टिंग की जानकारी ट्रैफिक पुलिस के पीआरओ को दी गयी तो उन्होंने तुरंत किए गए स्टिंग ऑपरेशन की वीडियो की मांग की और साथ ही ये आश्वासन दिलाया कि मामले में उचित और त्वरित कार्रवाई की जाएगी.

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First published: September 20, 2019, 3:20 PM IST
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