News18-IPSOS Exit Poll 2019: गाजियाबाद सीट पर BJP लगा रही है हैट्रिक?

लोकसभा चुनावों में वोटिंग का दौर समाप्त होने के बाद जो अनुमान सामने आ रहे हैं, उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश की वीआईपी गाजियाबाद सीट पर कौन आगे है और कौन पीछे? पढ़ें अनुमान और पूरा गणित.

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Updated: May 20, 2019, 8:44 PM IST
News18-IPSOS Exit Poll 2019: गाजियाबाद सीट पर BJP लगा रही है हैट्रिक?
गाजियाबाद सीट पर BJP लगा रही है हैट्रिक? (सांकेतिक तस्वीर)
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Updated: May 20, 2019, 8:44 PM IST
गाजियाबाद लोकसभा सीट वीआईपी सीट मानी जाती है और यहां पिछले दो चुनावों में भाजपा ने कब्ज़ा जमाया है. इस बार भी भाजपा की तरफ से वीके सिंह प्रत्याशी हैं, जिन्होंने पिछले चुनाव में कांग्रेस के राज बब्बर को शिकस्त दी थी. इस बार वीके सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में कांग्रेस की तरफ से डॉली शर्मा और समाजवादी पार्टी के टिकट पर सुरेश बंसल ताल ठोक रहे हैं. मतदान संपन्न होने के बाद News18-IPSOS Exit Poll पर आधारित अनुमान के मुताबिक वीके सिंह का गाजियाबाद से जीतना लगभग तय है. पोल के मुताबिक, भाजपा के लिए वीके सिंह यह सीट निकाल रहे हैं.

ये है गाज़ियाबाद
देश की राजधानी दिल्ली से सटी उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद लोकसभा सीट हॉट सीट मानी जाती है. गाजियाबाद का इतिहास 2500 ईसा पूर्व का है. इसे मोहम्मद शाह के मंत्री वज़ीर गाजी-उद-दीन ने स्थापित किया था. इनके नाम से इस शहर को नाम 'गाजियाबाद' मिला. 1857 विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना और भारतीय विद्रोहियों के बीच भिड़ंत यहीं हुई थी. गाजियाबाद लोकसभा सीट की गिनती उत्तर प्रदेश की वीआईपी सीटों में होती है.

5 विधानसभाओं से मिलकर बनी लोकसभा सीट

गाजियाबाद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत 5 विधानसभा क्षेत्र गाजियाबाद, साहिबाबाद, लोनी, मुरादनगर और धौलाना आते हैं. 2009 लोकसभा चुनाव से पहले ये सीट हापुड़ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत थी. साल 2009 में हुए परिसीमन के बाद हापुड़ लोकसभा सीट को समाप्त कर दिया गया. 'यूपी का डोर' कहा जाने वाला गाजियाबाद 133.3 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है.

पिछले दो चुनावों का लेखा जोखा
गाजियाबाद में पहली बार साल 2009 में चुनाव हुए थे. साल 2009 में पहली बार कांग्रेस के सुरेंद्र प्रकाश गोयल और भारतीय जनता पार्टी के राजनाथ सिंह के बीच टक्कर हुई थी. कड़ी टक्कर में राजनाथ सिंह ने कांग्रेस को पटखनी दी और गाजियाबाद से सांसद बने.
दूसरी बार यानी साल 2014 के लोकसभा चुनाव में गाजियाबाद की हाईप्रोफाइल सीट से फिर कांटे की टक्कर हुई. बीजेपी ने जहां जनरल वीके सिंह, कांग्रेस ने राज बब्बर, सपा ने सुधन रावत, बसपा ने मुकुल उपाध्याय और आम आदमी पार्टी ने शाजिया इल्मी को चुनावी रण में उतारा. 2014 के इस रण में बीजेपी के जनरल वीके सिंह और कांग्रेस के राज बब्बर के बीच कांटे की टक्कर में वीके सिंह सांसद बने.

दलित-मुस्लिम समीकरण
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ये जिला दिल्ली से सटा होने की वजह से बेहद अहम है. सभी प्रमुख पार्टियां इस सीट पर अपना मज़बूत दावेदार उतारने की कोशिश करती हैं. इस सीट पर जीत के लिए दलित-मुस्लिम समीकरण अहम होता है. 2014 में यहां 23 लाख से अधिक वोटर थे. वहीं गाजियाबाद में 72 प्रतिशत आबादी हिंदू और 25 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिम है. साल 2014 के चुनाव आकड़ों के मुताबिक, 23,58,553 वोटरों ने हिस्सा लिया था. इसमें 56 प्रतिशत पुरुष और 43 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं.

बीजेपी का कब्जा
2017 में हुए विधानसभा चुनाव में इस संसदीय क्षेत्र की सिर्फ धौलाना सीट बसपा के खाते में गई थी, जबकि अन्य सभी 4 सीटों पर भाजपा का कब्जा था. बता दें कि सेना प्रमुख रह चुके वीके सिंह ने 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे. 2010 से लेकर 2012 तक वह सेना प्रमुख रहे, हालांकि यूपीए सरकार के आखिरी दिनों में उनकी उम्र को लेकर काफी बड़ा विवाद छिड़ा था. 2014 में गाजियाबाद से बड़ी जीत हासिल करने का इनाम वीके सिंह को केंद्र सरकार में मंत्री पद के रूप में मिला.​

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