आखिर क्यों कांवड़ यात्रा की सफलता कांवड़ियों के व्यवहार में छुपी है?

कांवड़ यात्रा को लेकर पुलिस-प्रशासन ने भी खास इंतजाम किए हैं. इस बार यूपी, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ उन पर विशेष नजर भी रखी जाएगी.

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: July 14, 2019, 6:16 PM IST
आखिर क्यों कांवड़ यात्रा की सफलता कांवड़ियों के व्यवहार में छुपी है?
17 जुलाई के बाद से शिवभक्त कांवड़ लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर कूच करेंगे. कांवड़ यात्रा को लेकर पुलिस-प्रशासन ने भी खास और पुख्ता इंतजाम किए हैं.
Ravishankar Singh
Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: July 14, 2019, 6:16 PM IST
देश में इस बार कांवड़ यात्रा 17 जुलाई से आरंभ हो रही है. 17 जुलाई के बाद से शिवभक्त कांवड़ लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर कूच करेंगे. कांवड़ यात्रा को लेकर पुलिस-प्रशासन ने भी खास इंतजाम किए हैं. इस बार यूपी, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ उन पर विशेष नजर भी रखी जाएगी. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि बीते कुछ सालों से देखा जा रहा है कि कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ कांवड़िए उत्पात मचाते हैं. इससे आम लोगों को काफी दिक्कतें पैदा होती हैं. कांवड़ यात्रा के दौरान सड़कों पर चारों तरफ तेज म्यूजिक, हॉर्न की आवाज और रेंग-रेंग कर गाड़ियों का चलना आम बात हो गई है.

लोगों को ट्रैफिक जाम की दिक्कतों से जूझना पड़ता है


सावन का महीना शुरू होने के साथ ही शिव भक्तों की कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाती है. कुछ लोग पैदल, तो कुछ साइकिल, जीप और मिनी ट्रक से अपनी यात्रा पूरी करते हैं. ऐसे में हर साल निकलने वाली इस यात्रा के दौरान आम लोगों को ट्रैफिक जाम की दिक्कतों से जूझना पड़ता है. दिल्ली-एनसीआर ही नहीं उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सावन के महीने में यातायात व्यवस्था पूरी तरह से खराब हो जाती है. वर्दी में तैनात ट्रैफिक पुलिस इन हालात को संभालने और सुधारने की कोशिश तो करती है, लेकिन उनकी सारी रणनीति कांवड़ियों के हुड़दंग के आगे धरी की धरी रह जाती है.

कुछ लोग पैदल, तो कुछ साइकिल, जीप और मिनी ट्रक से अपनी यात्रा पूरी करते हैं


दिल्ली-एनसीआर में इस बार भी कांवड़ यात्रा को देखते हुए कई जगहों पर ट्रैफिक को डायवर्ड किया जाएगा, जिससे आम आदमी को अगले कुछ दिनों तक थोड़ी-बहुत परेशान होगी. लोगों को कांवड़ यात्रा शुरू होते ही ट्रैफिक में घंटों फंसे रहना आदत बन गई है. कांवड़ यात्रा शुरू होने के साथ ही गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा और दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन शुरू हो जाएगा. इस ट्रैफिक डायवर्जन से आम लोगों को अगले कुछ दिनों तक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.

ट्रैफिक के कारण घर पहुंचने में घंटों लग सकते हैं
पिछले साल भी गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा और पूर्वी दिल्ली में रहने वाले लोगों को ट्रैफिक के कारण घरों में पहुंचने में तीन से चार घंटे लगे थे. कांवड़ यात्रा को लेकर इन जगहों पर ट्रैफिक का संचालन इस बार भी एक ही लेन से किया जा सकता है. शिवभक्तों के लिए एक लेन रिजर्व रखी जाएगी. ऐसे में यातायात व्यवस्था आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर के लिए विशेष चुनौती बनेगी.
Loading...

कांवड़ यात्री रोड पर चलते समय नियमों को ताक पर रख देते हैं. कुछ कांवड़ यात्रियों के तेज म्यूजिक और उटपटांग हरकतों के कारण आम लोग भी सहमे रहते हैं. सावन के महीने में सड़कों पर सबसे ज्यादा गाडियां कांवड़ यात्रियों के ही होते हैं. कांवड़ियां सड़क पर बिना नियम का पालन किए पूरे अधिकार के साथ चलते हैं.

कांवड़ यात्रा के दौरान तेज अवाज में डीजे से सड़क पर चलने वाले और लोगों को दिक्कत होती है


दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के पूर्व जॉइंट कमिश्नर एसबीएस त्यागी ने फर्स्टपोस्ट हिंदी से बातचीत में कहा, ‘सावन के महीने में कांवड़ियों को लेकर ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह अलर्ट रहती है. कांवड़िए ट्रैफिक नियम का पालन करना तो छोड़ दीजिए खुद अपनी जान को भी जोखिम डाल देते हैं. पुलिस को इस स्थिति को संभालने में बहुत ही मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. रोड पार करने वाले आमलोगों को हमलोग सुरक्षित रहने की हिदायत देते हैं. खासकर फुट ओवरब्रिज और जेब्रा क्रॉसिंग इस्तेमाल करने वाले लोगों को सतर्क और सावधान रहने को कहते हैं, क्योंकि ये कांवड़िया इस बात का भी ध्यान नहीं रखते. पूरी सड़क को घेर कर चलते हैं. कांवड़िए अपने साथ म्यूजिक सिस्टम से भरा ट्रक लेकर चलते हैं इससे आमलोगों को और दिक्कतें पैदा होती हैं.’

कांवड़ यात्रा कैसे अब बदल गई है?
कुलमिलाकर कह सकते हैं पिछले कुछ सालों से सावन में कांवड़ यात्रा के दौरान हुड़दंग का भी खूब तड़का लग रहा है. कहीं न कहीं खाकी और खादी का भी इस तड़के में खूब सहयोग मिल रहा है. जगह-जगह पर कांवड़ शिविर लगाकर स्थानीय नेता जहां अपनी राजनीति चमकाते हैं वहीं पुलिस महकमा इनका खूब साथ देती है. लेकिन, सड़क पर चलने वाले आम लोगों को इस हुड़दंग से होने वाली परेशानी से काफी पेरशानियों का सामना करना पड़ता है, जिसकी चिंता किसी को भी नहीं है.

ये भी पढ़ें:

पीएम मोदी के खिलाफ अरविंद केजरीवाल ने क्यों अपना रखा है नरम रुख?

गाड़ियों पर क्यों लिखते हैं लोग अपनी जातियां, क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक?

दिल्ली पुलिस हाल के वर्षों में अपराध होने के बाद ही हरकत में क्यों आती है?

आज से FIR के लिए आपको नहीं जाना पड़ेगा थाने, नोएडा पुलिस खुद आएगी आपके पास
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...