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देश की पहली प्राइवेट ट्रेन का नया टाइम-टेबल जारी, अब गाजियाबाद में भी रुकेगी

नई दिल्ली से लखनऊ तक जाने वाली देश की पहली प्राइवेट तेजस एक्सप्रेस अब गाजियाबाद में भी रुकेगी.

नई दिल्ली से लखनऊ तक जाने वाली देश की पहली प्राइवेट तेजस एक्सप्रेस अब गाजियाबाद में भी रुकेगी.

नई दिल्ली (NEW DELHI RAILWAY STATION) से लखनऊ (LUCKNOW) तक जाने वाली देश की पहली प्राइवेट तेजस एक्सप्रेस (TEJAS TRAIN) अब गाजियाबाद (GHAZIABAD) में भी रुकेगी. तेजस एक्सप्रेस गाजियाबाद रेलवे स्टेशन (GHAZIABAD RAILWAY STATION) पर दो मिनट के लिए रुकेगी.

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नई दिल्ली (NEW DELHI RAILWAY STATION) से लखनऊ (LUCKNOW) तक जाने वाली देश की पहली प्राइवेट तेजस एक्सप्रेस (TEJAS TRAIN) अब गाजियाबाद (GHAZIABAD) में भी रुकेगी. तेजस एक्सप्रेस गाजियाबाद रेलवे स्टेशन (GHAZIABAD RAILWAY STATION) पर दो मिनट के लिए रुकेगी. इंडियन रेलवे ने हाल ही में एक सर्वे किया था, जिसके बाद इस ट्रेन को गाजियाबाद में भी स्टॉपेज दिया गया है. तेजस ट्रेन नई दिल्ली से चल कर लखनऊ तक जाएगी. पहले इस ट्रेन का स्टॉपेज सिर्फ कानपुर स्टेशन ही था, लेकिन रेलवे बोर्ड के नए सर्कुलर के बाद यह ट्रेन अब गाजियाबाद में भी दो मिनट के लिए रुकेगी.

तेजस ट्रेन का टाइम-टेबल बदला

इंडियन रेलवे ने हाल ही में एक सर्वे में पाया था कि तेजस ट्रेन से यात्रा करने वाले अधिकांश पैसेंजर्स गाजियाबद में ट्रेन का स्टोपेज देने की मांग कर रहे थे. इस ट्रेन में सवारी करने वाले ज्यादातर यात्री गाजियाबाद की तरफ से ही आने वाले हैं. ऐसे में भारतीय रेलवे ने कानपुर के बाद गाजियाबाद में भी इसका स्टोपेज बनाया है. तेजस ट्रेन का गाजियाबाद में रुकने के बाद अब इस तरफ रहने वाले लोगों को दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा. बीते 13 अगस्त को ही रेलवे बोर्ड ने इसके लिए सर्कुलर जारी कर दिया है.

TEJAS TRAIN STOPAGE IN GZB
बीते 13 अगस्त को ही रेलवे बोर्ड ने इसके लिए सर्कुलर जारी कर दिया है


इंडियन रेलवे ने तेजस ट्रेन का नया शेड्यूल भी जारी कर दिया है. तेजस ट्रेन की पहले की टाइमिंग में भी अब फेरबदल कर दिया गया है. अब यह ट्रेन लखनऊ से 40 मिनट पहले सुबह 6.10 बजे चलेगी. साल 2016 में जब तेजस ट्रेन का टाइम-टेबल जारी किया गया था तो लखनऊ जंक्शन से इसके रवाना होने का समय सुबह 6.50 बजे था. नए शेड्यूल के मुताबिक अब यह ट्रेन 40 मिनट पहले सुबह 6.10 बजे रवाना होगी.

गाजियाबाद में भी रुकेगी

यह ट्रेन अब नई दिल्ली रेलवे स्टेशन 12.25 मिनट पर पहुंचेगी. लखनऊ से चलकर गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर सुबह 11.43 बजे पहुंचेगी और 11.45 दिल्ली के रवाना होगी. पहले के टाइमिंग के मुताबिक दिल्ली दोपहर 1.20 बजे पहुंचने का समय था. इसी तरह नए टाइम-टेबल के मुताबिक अब तेजस नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से शाम 4.30 चल कर रात 10.45 बजे लखनऊ पहुंचेगी. शाम 5.10 बजे गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंचेगी और 5.12 बजे लखनऊ के लिए रवाना होगी.

TEJAS TRAIN
भारतीय रेलवे ने निजी हाथों में सौंपने की कवायद के तहत ही तेजस ट्रेन चलाने का फैसला किया था


बता दें कि पिछले कुछ सालों से रेलवे में निजीकरण की बात चल रही थी. भारतीय रेलवे ने निजी हाथों में सौंपने की कवायद के तहत ही तेजस ट्रेन चलाने का फैसला किया था. फिलहाल भारतीय रेलवे ने दो ट्रेनों का संचालन रेल टूरिज्म एंड कैटरिंग कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) को सौंपने का फैसला लिया है. इंडियन रेलवे ने तय किया है कि दिल्ली से लखनऊ और अहमदाबाद से मुंबई सेंट्रल रूट पर चलने वाली तेजस एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन आईआरसीटीसी करेगा.

केवल कन्फर्म टिकट ही जारी होंगे

इसके साथ ही तेजस एक्सप्रेस में अब केवल कन्फर्म टिकट ही जारी होंगे. सीटें खाली होने पर ट्रेन छूटने के दो मिनट पहले तक आईआरसीटीसी के करंट काउंटर से टिकट जारी होगा. हालांकि, चलती तेजस ट्रेन में टीटीई को टिकट बनाने का अधिकार नहीं होगा. लखनऊ-दिल्ली रूट पर तेजस देश की ऐसी पहली ट्रेन होगी, जिसमें परिचालन, सिग्नल और पार्सल बुकिंग का अधिकार रेलवे के पास होगा. बाकी सारा काम आईआरसीटीसी के अधीन होगा.

TEJAS TRAIN CONFIRM SEAT
तेजस एक्सप्रेस में अब केवल कन्फर्म टिकट ही जारी होंगे


इंडियन रेलवे के मुताबिक इस ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को खानपान के नाम पर वंदेमातरम, शताब्दी एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से अधिक चार्ज चुकाना पड़ेगा, लेकिन इसमें दूसरी ट्रेनों की तुलना में अधिक प्रकार के व्यंजन परोसे जाएंगे. खान-पान का चार्ज भी टिकट में ही जुड़ा होगा. इस ट्रेन में अलग से खानपान के लिए यात्रियों को पैसा देने की जरूरत नहीं होगी. भारतीय रेलवे ने आईआरसीटीसी को ये ट्रेनें पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर तीन साल के लिए लीज पर दी है.

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सांसद प्रिंस पासवान केस: कोर्ट के सवाल का जवाब नहीं दे पाई आरोप लगाने वाली महिला

लोकजनशक्ति पार्टी के सांसद प्रिंस पासवान पर कथित तौर पर लगे रेप के आरोपों पर कोर्ट में नये सिरे से सुनवाई शुरू हो गई है.

Prince Raj Rape Case: एलजेपी सांसद प्रिंस पासवान पर एक युवती ने कथित तौर पर रेप का मामला दर्ज कराया है. मामले में दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट के आदेश पर प्रिंस राज पर बलात्कार का मुकदमा दर्ज हुआ है. इसके बाद सांसद प्रिंस ने राउस एवेन्यू कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी.

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नई दिल्ली. लोक जन शक्ति पार्टी के सांसद प्रिंस पासवान (Prince Paswan) पर कथित तौर पर रेप का आरोप लगाने वाली महिला कोर्ट के सवालों का जवाब नहीं दे पाई. राउस एवेन्यू कोर्ट सांसद प्रिंस पासवान की अग्रिम जमानत अर्जी पर नये सिरे से सुनवाई कर रही है.दिल्ली की कोर्ट ने पीड़ित महिला से सवाल करते हुए कहा कि वह यह बताएं कि जो आरोप उसके द्वारा लगाए जा रहे हैं, वह कौन सी तारीख की घटना है. पीड़ित महिला के द्वारा कोर्ट में इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया गया. कोर्ट में आज की सुनवाई पूरी हो गई है और कोर्ट कल फिर इस पूरे मामले पर दोबारा सुनवाई करेगा. प्रिंस पासवान की अग्रिम जमानत अर्जी राउस एवेन्यू कोर्ट के जज विकास धौल सुन रहे हैं.

असल में, इस  कथित रेप मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail Petition) पर आदेश पारित करने से इनकार कर दिया था. जज एमके नागपाल (Judge MK Nagpal) ने प्रिंस राज पासवान की अग्रिम जमानत याचिका पर आदेश पारित करने से इनकार किया था और जज ने खुद को इस केस से अलग कर लिया था. इसके बाद मामला जिला न्यायाधीश के समक्ष स्थानांतरित कर दिया गया था, जिस पर नये सिरे से सुनवाई शुरू हो गई है.

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ था प्रिंस राज पर रेप केस
बता दें कि एक युवती ने प्रिंस राज पर कथित रूप से रेप केस दर्ज कराया है. दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट के आदेश के बाद प्रिंस राज पर बलात्कार का मुकदमा दर्ज हुआ है. जाहिर है पीड़िता का दावे में दम नजर आ रहा है. हालांकि, प्रिंस राज भी युवती के खिलाफ इसी साल 9 फरवरी को पहले ही एफआईआर दर्ज करवा चुके हैं. इस एफआइआर के अनुसार प्रिंस राज ने आरोप लगाया था कि उन्हें युवती ने हनी ट्रैप के तहत फंसाया और फिर बाद में उस युवती ने अपने दोस्त के साथ एक्सटॉर्शन शुरू कर दिया. हालांकि, प्रिंस राज ने यह माना है कि उन्होंने युवती के साथ सेक्स किया था.

आदेश गुप्ता का तंज- उत्तराखंड में जब्त हो जायेगी AAP की जमानत, दिल्ली के युवाओं को दे रहे हैं 7 साल से धोखा

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने आप की केजरीवाल सरकार पर तंज कसा है.

Delhi Politics News: बीजेपी दिल्ली ने आज सीएम हाउस के बाहर बेरोज़गारी भत्ता न देने के विरोध में प्रदर्शन किया. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के 25 लाख युवाओं को बेरोजगारी भत्ता नहीं दिया है. उन्हें लगातार धोखा दिया जा रहा है.

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नई दिल्ली. दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता (BJP State President Adesh Gupta) ने आप पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उत्तराखंड में AAP की जमानत जब्त हो जायेगी. उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejariwal) दूसरे राज्यों पंजाब, गोवा एवं उत्तराखंड में जाकर झूठे चुनावी वायदें कर बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने की बात कर रहे हैं, ये सिर्फ चुनावी जुमले हैं. केजरीवाल को सबसे पहले ये बताना चाहिए कि पिछले 7 सालों में उन्होंने दिल्ली के 14 लाख बेरोजगार, जो उनके सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रड हैं. उनमें से कितनों को बेरोजगारी भत्ता दिया है.

आज मुख्यमंत्री आवास के बाहर दिल्ली में बेरोज़गारी भत्ता न देने के विरोध में प्रदेश भाजपा द्वारा विरोध प्रदर्शन में गुप्ता ने कहा कि पिछले 2 सालों में सिर्फ 28 और अपने पूरे 7 सालों के कार्यकाल में केजरीवाल ने दिल्ली में मात्र 404 लोगों को रोजगार दिया है, जो उनकी असलियत है.

दिल्ली सरकार आशा कार्यकर्ताओं को उनके हक का पैसा नहीं दे रही 

आदेश गुप्ता ने कहा कि उत्तराखंड में तो आप की जमानत जब्त होना तय है. उन्होंने केजरीवाल से सवाल किया कि आज देश के लगभग सभी राज्यों ने प्रधानमंत्री आवास योजना लागू किया है, जिससे कई गरीब परिवारों के आवास के सपने पूरे हो रहे हैं, लेकिन दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने इसे अभी तक क्यों नहीं लागू किया है? इतना ही नहीं झूठे वायदे कर सहानुभूति बटोरने का नाटक करने वाली केजरीवाल सरकार को दिल्ली के उन गरीब लोगों को जवाब जरुर देना चाहिए, जिन्होंने अपने राशन कार्ड के लिए पंजीकरण तो करा लिए हैं. लेकिन पिछले पांच सालों से अपने राशन कार्ड बनने का इंतजार कर रहे हैं.

आदेश गुप्ता ने केजरीवाल की राजनीतिक द्वेष का शिकार हो रही आशा कार्यकर्ताओं का जिक्र करते हुए कहा कि 2018 में मोदी सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं का इंसेंटिव 1000 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये किया था पर यह बहुत शर्मनाक है कि दिल्ली सरकार आशा कार्यकर्ताओं को उनके हक का पैसा नहीं दे रही है.

दिल्ली के युवाओं की आवाज बीजेपी हमेशा बनती रहेगी

आदेश गुप्ता ने केजरीवाल सरकार को चोर और घोटालेबाज सरकार बताते हुए कहा कि दिल्ली सरकार पहले जलबोर्ड घोटाला, डीटीसी घोटाला और फिर शराब नीति में करोड़ों का घोटाला कर दिल्ली के टैक्स पेयर्स के पैसें को दूसरे राज्यों में अपने चुनावी प्रचार पर खर्च कर रहे हैं. मुफ्त की बिजली तो बस एक छलावा है, जबकि वास्तविकता यह है कि 7000 मेगावाट की खपत है. जबकि 23000 मेगावाट के फिक्स चार्ज की वसूली होती है. उन्होंने कहा कि अगर केजरीवाल सरकार दिल्ली के पंजीकृत और गैर पंजीकृत बेरोजगार कुल 25 लाख युवाओं को बेरोजगारी भत्ता नहीं देती है तो यह प्रदर्शन एक जन आंदोलन बनेगा और दिल्ली के युवाओं की आवाज बीजेपी हमेशा बनती रहेगी.

Jamia University की वाइस चांसलर राष्‍ट्रीय संचालन सम‍ित‍ि की मैंबर न‍ियुक्‍त, तीन साल का होगा कार्यकाल

जामिया मिल्लिया इस्लामिया की वीसी प्रो.नजमा अख्तर को राष्ट्रीय संचालन समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है.  (File Photo)

National Steering Committee: श‍िक्षा मंत्रालय की ओर से नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क्‍स के लिए राष्ट्रीय संचालन समिति का गठन क‍िया गया है. अंतरिक्ष वैज्ञानिक और इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय समिति में जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) की कुलपति प्रो.नजमा अख्तर को भी कमेटी का सदस्य नियुक्त किया गया है. राष्ट्रीय संचालन समिति का कार्यकाल इसकी अधिसूचना की तारीख से तीन साल का होगा.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 20:23 IST
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नई द‍िल्‍ली. केंद्रीय श‍िक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) की ओर से नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क्‍स के लिए राष्ट्रीय संचालन समिति (National Steering Committee) का गठन क‍िया गया है. अंतरिक्ष वैज्ञानिक और इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय समिति में जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) की कुलपति प्रो.नजमा अख्तर (Prof. Najma Akhtar) को भी कमेटी का सदस्य नियुक्त किया गया है. राष्ट्रीय संचालन समिति का कार्यकाल इसकी अधिसूचना की तारीख से तीन साल का होगा.

बताया जाता है क‍ि इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय समिति चार राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा यानी स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा, बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या, शिक्षक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा तथा राष्ट्रीय प्रौढ़ शिक्षा के लिए पाठ्यचर्या की रूपरेखा विकसित करेगी.

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समिति पाठ्यक्रम सुधारों के प्रस्ताव के लिए इन चार क्षेत्रों से संबंधित एनईपी 2020 की सभी सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए स्कूली शिक्षा, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई), शिक्षक शिक्षा और प्रौढ़ शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेगी. यह समिति उपरोक्त सभी चार क्षेत्रों के विभिन्न पहलुओं पर राष्ट्रीय फोकस समूहों द्वारा अंतिम रूप दिए गए पोजीशन पेपर्स पर चर्चा करेगी.

इसके अलावा यह समिति नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के लिए टेक प्लेटफॉर्म पर प्राप्त स्टेट करिकुलम फ्रेमवर्क से इनपुट प्राप्त करेगी. सभी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा भविष्य से संबंधित क्षेत्रों पर कोविड-19 महामारी जैसी स्थितियों के निहितार्थ पर भी विचार करेगी. समिति विभिन्न हितधारकों, अर्थात राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से प्राप्त सुझावों को शामिल करने और एनसीईआरटी की कार्यकारी समिति (EC) और शासी निकाय (GB) और शिक्षा पर केंद्रीय सलाहकार बोर्ड (CABE) की बैठकों में शामिल होने के बाद राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा को अंतिम रूप देगी.

भारत में 2 साल से ऊपर के बच्‍चों को इस महीने से लगेगी कोरोना वैक्‍सीन

भारत में दो साल से ऊपर के बच्‍चों को अगले साल कोरोना का टीका लगना शुरू हो जाएगा.   (Image:shutterstock)

Covid Vaccine for Children: देश में 32 करोड़ बच्‍चे 12 साल से नीचे के हैं. जिनमें बड़ी संख्‍या दो साल से ऊपर वालों की है. कोरोना टीकाकरण में दो साल से नीचे के बच्‍चों को शामिल नहीं किया जाएगा. ऐसे में दो साल की उम्र पूरी कर चुके सभी बच्‍चों को टीका लगेगा.

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नई दिल्‍ली. देश में कोरोना के खिलाफ वैक्‍सीनेशन अभियान तेजी से चल रहा है. इस अभियान में बुजुर्गो और 45 साल से ऊपर के लोगों के बाद 18 साल की उम्र पार कर चुके सभी लोगों को वैक्‍सीन लगाई जा रही है. हालांकि अभी भी 18 साल से नीचे के किशोर वर्ग और बच्‍चों के वैक्‍सीनेशन (Covid Vaccination for Children) के लिए लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि देशभर में स्‍कूल खुलने और तीसरी लहर (Covid Third Wave) की आशंका के दौरान बच्‍चे कोरोना से सुरक्षित रह सकें. इस वक्‍त देश में बच्‍चों को कोविड का टीका (Corona Vaccine) लगाने के लिए वैक्‍सीन कंपनियां ट्रायल कर रही हैं.

बच्‍चों के कोविड वैक्‍सीनेशन को लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) में ऑपरेशनल रिसर्च ग्रुप ऑफ द नेशनल टास्‍क फोर्स फॉर कोविड-19 डॉ. एनके अरोड़ा का कहना है कि देश में कुल 44 करोड़ बच्‍चे हैं. जिनमें से 12 साल कम उम्र के बच्‍चों की संख्‍या सबसे ज्‍यादा है. वहीं 12 से 17 साल के कुल 12 करोड़ बच्‍चे हैं. फिलहाल भारत में जायकोव डी (ZyCoV-D) को इसी आयुवर्ग के बच्‍चों के टीकाकरण के लिए मंजूरी मिली है. अक्टूबर में किशोर वर्ग को वैक्‍सीन लगना शुरू होने की उम्‍मीद है.

डॉ. अरोड़ा कहते हैं कि देश में सबसे पहले कोमोरबिड बच्‍चों (Comorbid Children) को कोरोना का टीका लगाया जाएगा. जैसा कि बुजुर्गों और व्‍यस्‍कों के लिए फैसला लिया गया था कि जिन्‍हें पुरानी गंभीर बीमारियां हैं उन्‍हें कोविड का टीका पहले दिया गया था. ठीक उसी तरह 12 से 17 साल के बच्‍चों में भी इसी तरह प्राथमिकता तय की जाएगी. हालांकि कई वैक्‍सीन कंपनियां बच्‍चों के लिए वैक्‍सीन बनाने के साथ ही ट्रायल कर रही हैं ऐसे में सिर्फ 12 करोड़ की आबादी को टीका लगने में ज्‍यादा समय भी नहीं लगेगा.

दो साल से ऊपर के बच्‍चों को जनवरी-मार्च के बीच में लगेगा टीका
डॉ. अरोड़ा कहते हैं कि देश में 32 करोड़ बच्‍चे 12 साल से नीचे के हैं. जिनमें बड़ी संख्‍या दो साल से ऊपर वालों की है. कोरोना टीकाकरण में दो साल से नीचे के बच्‍चों को शामिल नहीं किया जाएगा. ऐसे में दो साल की उम्र पूरी कर चुके बच्‍चों को ही टीका लगेगा. अक्‍टूबर तक भारत बायोटेक (Bharat Biotech) सहित कई अन्‍य वैक्‍सीन के ट्रायल का परिणाम आने के बाद जहां किशोर वर्ग को टीका लगना शुरू होगा. वहीं दो साल से लेकर 12 साल तक के बच्‍चों को साल 2022 के जनवरी से मार्च महीने के बीच में टीका लगना शुरू हो जाएगा. यह सरकार का लक्ष्‍य है कि अगले साल ही पहली तिमाही से पहले-पहले दो साल से ऊपर के बच्‍चों को टीका लगाना शुरू कर दिया जाएगा.

सत्येंद्र जैन ने सभी विभाग प्रमुखों को दिए निर्देश, कहा- डेंगू रोधी अभियान में लें हिस्सा

उन्होंने कहा कि इस वर्ष सितंबर में अभी तक 87 मामले सामने आए हैं. पिछले वर्ष सितंबर में 188 मामले आए थे. (फाइल फोटो)

सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) ने कहा कि पिछले दो महीने से कोरोना वायरस के मामलों की संख्या भी नियंत्रण में है. साथ ही समाज तथा सरकार मिलकर कोविड उपुयक्त व्यवहार का पालन कर इन पर जीत हासिल कर सकती है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 20:14 IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि डेंगू रोधी अभियान में हिस्सा लें, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि उनके परिसर में डेंगू लार्वा (Dengue Larvae) नहीं पनपे. उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में अभी तक डेंगू के जितने मामले सामने आए हैं वे ‘‘नियंत्रण में हैं’’ और दिल्ली सरकार भी सतर्क है और मच्छर (Mosquito) जनित बीमारी से उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है.

सत्येंद्र जैन ने कहा कि पिछले दो महीने से कोरोना वायरस के मामलों की संख्या भी नियंत्रण में है और समाज तथा सरकार मिलकर कोविड उपुयक्त व्यवहार का पालन कर इन पर जीत हासिल कर सकती है. राष्ट्रीय राजधानी में पिछले एक हफ्ते में डेंगू के 50 से अधिक मामले सामने आए, जिससे इस वर्ष कुल मामलों की संख्या 210 से अधिक हो गई. यह जानकारी सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति में दी गई थी. इस महीने 18 सितंबर तक 87 मामले सामने आए हैं जो कुल मामलों का करीब 41 फीसदी हैं. इसमें बताया गया कि महानगर में डेंगू के कारण अभी तक किसी के मौत की खबर नहीं है.

सरकार डेंगू के कारण किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है
उन्होंने कहा, ‘‘इस वर्ष सितंबर में अभी तक 87 मामले सामने आए हैं. पिछले वर्ष सितंबर में 188 मामले और उसके पिछले वर्ष में 190 मामले सामने आए थे. उससे पहले के वर्षों में 374 (2018), 1103 (2017), 1300 (2016) और 6775 (2015) मामले सामने आए थे.’’ उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि सरकार डेंगू के कारण किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है.

मलेरिया और टीबी के कई रोगी मिले थे
वहीं, कुछ देर पहले खबर सामने आई थी कि नोएडा में मलेरिया और कोविड-19 (Malaria And Covid-19) जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे के बीच अब दिमागी बुखार (Brain Fever) ने भी शहर वासियों और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. जिले में इस बीमारी के तीन संदिग्ध मामले मिले हैं. हालांकि, अभी बीमारी की पुष्टि नहीं हुई है. बीमारी की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी. मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉक्टर सुनील शर्मा (Dr Sunil Sharma) ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने रोगियों का पता लगाने के लिए सात से 17 सितंबर तक घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया था. इसमें बुखार, मलेरिया और टीबी के कई रोगी मिले थे. इसी दौरान तीन लोगों में दिमागी बुखार के लक्षण दिखे.

(इनपुट-  भाषा)

Delhi में हर रोज न‍िकलता है 2 लाख टन E-Waste, न‍िपटान के ल‍िए बनाया ये ब‍ड़ा प्‍लान

ई-कचरे के वैज्ञानिक और पर्यावरणीय रूप से निपटान के लिए दिल्ली में ई-कचरा प्रबंधन इको-पार्क की स्थापना की जाएगी.  (फाइल फोटो)

E-Waste Management Eco-Park: द‍िल्‍ली में हर रोज करीब 2 लाख टन ई-कचरा उत्पन्न होता है जो बिजली के उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं, कंप्यूटर और सहायक उपकरण और मोबाइल फोन से निकलता है. इसको ठ‍िकाने लगाने की तैयारी की जा रही है. दिल्ली में ई-कचरा प्रबंधन इको-पार्क (E-Waste Management Eco-Park) की स्थापना की जाएगी. मुख्‍य सच‍िव को इस मामले में जल्‍द से जल्‍द एक संचालन सम‍िति का गठन करने और DPR तैयार करने के ल‍िए सलाहकार का चयन करने की सलाह भी दी गई है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 19:44 IST
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नई द‍िल्‍ली. द‍िल्‍ली में जहां गीले और सूखे कूड़े के न‍िपटारे को लेकर कई योजनाओं पर काम क‍िया जा रहा है. वहीं अब बड़ी मात्रा में द‍िल्‍ली में न‍िकलने वाले ई-कचरा (E-Waste) के न‍िपटान की मुह‍िम को भी तेज करने की कवायद की जाएगी. राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र, द‍िल्‍ली में हर रोज करीब 2 लाख टन ई-कचरा उत्पन्न होता है जो बिजली के उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं, कंप्यूटर और सहायक उपकरण और मोबाइल फोन से निकलता है. इसको ठ‍िकाने लगाने की तैयारी की जा रही है.

द‍िल्‍ली के उप-राज्‍यपाल अन‍िल बैजल (Anil Baijal) की अध्‍यक्षता में आयोज‍ित र‍िव्‍यू मीट‍िंम में फैसला क‍िया है क‍ि ई-कचरे के वैज्ञानिक और पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित निराकरण, नवीनीकरण, पुनर्चक्रण और निपटान के लिए दिल्ली में ई-कचरा प्रबंधन इको-पार्क (E-Waste Management Eco-Park) की स्थापना की जाएगी.

मीट‍िंग में द‍िल्‍ली के ड‍िप्‍टी सीएम मनीष स‍िसोद‍िया (Manish Sisodia), स्‍वास्‍थ्‍य एवं ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन और पर्यावरण मंत्री गोपाल राय के अलावा द‍िल्‍ली के मुख्य सचिव व‍िजय कुमार देव, डीडीए वीसी अनुराग जैन, और एमसीडी कम‍िश्‍नर्स भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे.

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एलजी बैजल ने कहा कि यह अनुमान है कि दिल्ली में लगभग 2 लाख टन ई-कचरा (E-Waste) उत्पन्न होता है जो बिजली के उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं, कंप्यूटर और सहायक उपकरण और मोबाइल फोन से निकलता है. उन्‍होंने कहा कि यह कचरा न केवल पर्यावरण के लिए संभावित रूप से बहुत खतरनाक है, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालता है.

इसलिए इसका स्थायी निपटान जल्द से जल्द किए जाने की बेहद आवश्यकता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ई-कचरा प्रबंधन पार्क ( e-waste management park) की स्थापना इस उद्देश्‍य की पूर्ति करने की द‍िशा में बड़ा कदम होगा. यह पार्क देश में अपनी तरह का पहला पार्क होगा जोकि दूसरे राज्‍यों के ल‍िए एक उदाहरण भी पेश करेगा.

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इस दौरान व‍िचार व‍िमर्श करने के बाद यह न‍िर्णय भी ल‍िया गया है क‍ि पार्क को समयबद्ध तरीके से स्थापित किया जाए, जिसमें विभिन्न समितियां डीडीए के साथ संयोजन के रूप में उपयुक्त भूमि की पहचान, नवीनतम तकनीक और असंगठित क्षेत्र के एकीकरण के साथ-साथ कचरा संग्रहकर्ता के साथ-साथ एक उपयुक्त मॉडल की पहचान कर रही हैं.

इन सम‍ित‍ियों में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और प्रधान मंत्री कार्यालय के वैज्ञानिक सलाहकार के अलावा अन्य हितधारकों के रूप में द‍िल्‍ली सरकार, डीडीए, प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों और शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिन‍िध‍ि भी होंगे.

द‍िल्‍ली के मुख्‍य सच‍िव व‍िजय कुमार देव (Vijay Kumar Dev) को सलाह दी गई है क‍ि इस मामले में जल्‍द से जल्‍द एक संचालन सम‍िति (steering committee) का गठन करें. साथ ही इसके ल‍िए ड‍िटेल प्रोजेक्‍ट र‍िपोर्ट (DPR) तैयार करने के ल‍िए एक सलाहकार का चयन करने की सलाह भी दी गई है. संचालन समित‍ि पार्क के चालू होने तक इस पूरी प्रक्र‍िया की न‍िगरानी करेगी.

Delhi: राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट

रेप और हत्या के मामले में नाबालिग की पहचान उजागर करने के मामले में  राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है. (PTI)

Delhi News: रेप और हत्या के मामले में पहचान उजागर करने के मामले में राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले भाजपा नेता नवीन कुमार जिंदन ने कहा कि मैंने पॉक्सो एक्ट के तहत शिकायत दी थी लेकिन दिल्ली पुलिस ने ने अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया.

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नोएडा. दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को एक बलात्कार और हत्या के मामले में नाबालिग के परिजनों की पहचान उजागर (Reveal Identity) करने के मामले में अब तक कार्रवाई न करने पर नाराजगी जताई है. कोर्ट ने पुलिस से एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) अदालत में जमा कराने के निर्देश दिए हैं. अदालत में मामले की सुनवाई के बाद मजिस्ट्रेट ने पुलिस को राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत पर मुक़दमा दर्ज नहीं करने पर नाराज़गी जताते हुए आगामी 29 सितंबर तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं.

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प्रदेश भाजपा मीडिया प्रमुख नवीन कुमार जिंदल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी.

प्रदेश भाजपा मीडिया प्रमुख नवीन कुमार जिंदल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (Pocso Act) के तहत गत 14 अगस्त को बाराखंबा रोड थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी. इस पर कार्रवाई के लिए नई दिल्ली जिला के पुलिस उपायुक्त से गत 19 अगस्त को पुनः अनुरोध किया गया था. इसके बाद भी कार्रवाई न होने पर मामले की शिकायत अदालत में की गई. इस पर मजिस्ट्रेट ने पुलिस से कार्रवाई रिपोर्ट 29 सितंबर तक देने को कहा है.

शिकायतकर्ता नवीन कुमार जिंदल ने आज यहां राउस एवेन्यू अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पूरी कांग्रेस पार्टी ही महिला विरोधी है. कांग्रेस के नेता कानून और संविधान का मजाक उड़ाना अपना अधिकार समझते हैं. राहुल गांधी के खिलाफ पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज़ कर उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए.

दिल्ली से 17 कारतूस लेकर फ्लाइट से पटना जा रहा था शख्स, IGI एयरपोर्ट पर गिरफ्तार

उसके खिलाफ शस्त्र अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. (सांकेतिक फोटो)

अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब आठ बजे यात्री के हैंडबैग से 7.53 मिमी कैलिबर की गोलियां बरामद की गईं. उन्होंने बताया कि व्यक्ति पटना के लिए इंडिगो एयरलाइंस (indigo airlines) की उड़ान में सवार होने वाला था.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 19:11 IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के कर्मियों ने दिल्ली हवाई अड्डे (Delhi Airport) पर एक यात्री को बिना अनुमति के 17 कारतूस (17 Cartridges) रखने के आरोप में पकड़ लिया. यह यात्री पटना जाने वाले विमान में सवार होने वाला था. यह जानकारी अधिकारियों ने दी. अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब आठ बजे यात्री के हैंडबैग से 7.53 मिमी कैलिबर की गोलियां बरामद की गईं. उन्होंने बताया कि व्यक्ति पटना के लिए इंडिगो एयरलाइंस (indigo airlines) की उड़ान में सवार होने वाला था. उन्होंने कहा कि हथियार और गोला-बारूद ले जाने पर प्रतिबंध है और चूंकि यात्री उन्हें ले जाने के लिए सरकारी अनुज्ञा नहीं दे सका. इसलिए उसे स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया, जिसने उसके खिलाफ शस्त्र अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया. दरअसल, सीआईएसएफ को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है.

वहीं, बीते 28 अगस्त की रात को भी  इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात एयर इंटेलिजेंस यूनिट के सीमा शुल्क अधिकारियों ने उज्बेकिस्तान के दो नागरिकों को पकड़ा था, जो 951 ग्राम सोना की तस्करी की कोशिश कर रहे थे. ये दोनों यात्री ग्रीन चैनल के जरिए दुबई से भारत पहुंचे थे. सबसे दिलचस्प बात थी कि इन्होंने सोने की तस्करी के लिए एक अनोखा ही तरीका अपनाया था, जो आज से पहले शायद कभी नहीं देखा गया. दरअसल, उन दोनों उज्बेक नागरिकों में से एक ने सोने की तस्करी करने के मकसद से और अधिकारियों को चकमा देने के लिए 951 ग्राम सोने को कृत्रिम दांत के साथ ही दांत के नीचे बने खोह और धातु की एक चेन में बदल कर उसे मुंह में फिट करा दिया था. जांच के दौरान दोनों उज्बेक नागरिक सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों के चंगुल में फंस गए और फिर उन्हें पकड़ कर लिया गया.

वह दुबई से दिल्ली पहुंचा था
बता दें कि इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आए दिन तस्करों की गिरफ्तारी होती रहती है. पिछले साल दिसंबर महीने में इस हवाई अड्डे से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था. आरोप था कि व्यक्ति करीब 75 लाख रुपये का सोना (Gold) देश में तस्करी करके लाने की कोशिश कर रहा था. सीमा शुल्क विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया था कि आरोपी पंजाब का रहने वाला है. वह दुबई से दिल्ली पहुंचा था, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

(इनपुट- भाषा)

Delhi NCR News: एक्सपर्ट से जानें, कितना जरूरी है कार-बाइक का पीयूसी सर्टिफिकेट

बेहतर सड़कों के लिए मुंडका के लोगों के सड़क पर उतरने से जाम लग गया है. (सांकेतिक फोटो)

दिल्ली सरकार (Delhi Government) का मानना है कि दूसरे राजयों से आने वाले वाहन भी दिल्ली में बहुत प्रदूषण फैलाते हैं. वायु प्रदूषण (Air Pollution) को कंट्रोल करने के लिए दिल्ली सरकार और भी कई कदम उठा रही है.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 19:06 IST
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नई दिल्ली. कार (Car) और बाइक (Bike) का प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) बेशक आपको एक छोटी चीज लगता हो, लेकिन इसे न रखने की लापरवाही अब आप पर भारी पड़ सकती है. अगर आपकी कार या बाइक धुंआ छोड़ रही है या उसे चलाते वक्त आपके पास पीयूसी नहीं है तो अब सिर्फ एक हजार रुपये का जुर्माना भरने से काम नहीं चलेगा. सरकार ने जुर्माने की रकम को 10 गुना कर दिया है. इसके साथ ही 6 महीने की सजा और ड्राइविंग लाइसेंस (Driving Licence) कैंसिल की सजा को भी इसमे जोड़ दिया है. दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने अक्टुबर में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को देखते हुए यह कदम उठाया है. सरकार का मानना है कि दूसरे राजयों से आने वाले वाहन भी दिल्ली में बहुत प्रदूषण फैलाते हैं. वायु प्रदूषण (Air Pollution) को कंट्रोल करने के लिए दिल्ली सरकार और भी कई कदम उठा रही है.

दिल्ली में 973 जगहों पर लगी है कार-बाइक का पीयूसी बनवाने की भीड़

दिल्ली में 1 सितंबर 2019 से संशोधित मोटर वाहन अधिनियम लागू हो चुका है. जिसके बाद से पीयूसी सर्टिफिकेट नहीं होने पर लगने वाला जुर्माना बढ़ा दिया गया है. इस संशोधन से पहले पीयूसी नहीं होने पर एक हजार रुपये जुर्माना लगता था. लेकिन संशोधित मोटर वाहन अधिनियम लागू होने के बाद अब 10 हजार रुपये का जुर्माना भरना होता है.

लेकिन इस महीने से पीयूसी को लेकर दिल्ली सरकार सख्त हो गई है. दिल्ली सरकार की चेतावनी के बाद से और जुर्माने के रूप में दस गुना बढ़ोतरी को देखते हुए दिल्ली के सभी 973 पीयूसी केंद्रों पर भीड़ बढ़ गई है. इसमे सभी पेट्रोल पम्प के केन्द्र भी शामिल हैं.

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PUC नहीं है तो इंश्योरेंस भी नहीं होगा

गौरतलब रहे कि अपने एक आदेश में सुप्रीम कोर्ट भी पीयूसी रखने की अनिवार्यता को लेकर एक आदेश जारी कर चुका है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि बीमा कंपनियां किसी भी कार और बाइक का बीमा करते वक्त यह तय करेंगी कि आप वाहन इंश्योरेंस पॉलिसी के वक्त पीयूसी पेश करें. जुलाई 2018 को देश में बढ़ते वाहन प्रदूषण पर फिक्र जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनियों को यह निर्देश दिया था. अदालत ने कहा था कि जब तक पीयूसी सर्टिफिकेट जमा न हो जाए तब तक वाहन इंश्योरेंस पॉलिसी री-न्यू नहीं की जाए.

कार-बाइक के साथ इसलिए जरूरी है पीयूसी

रिटायर्ड एआरटीओ बीके यादव का कहना है कि कार और बाइक चलाने के लिए पीयूसी बहुत जरूरी है. पीयूसी सर्टिफिकेट वाहन मालिक को तब मिलता है जब कार या बाइक प्रदूषण कंट्रोल के सभी मानकों को पूरा करती है. इस सर्टिफिकेट का साथ में होने का यह मतलब होता है कि वाहन का प्रदूषण नियमों के अनुसार है. इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं हो रहा है. मौजूदा वाहन नीति के मुताबिक सभी वाहनों को पीयूसी रखना जरूरी है. नई गाड़ी के लिए पीयूसी सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं होती है. वाहन के रजिस्‍ट्रेशन के एक साल के बाद पीयूसी सर्टिफिकेट लेने की जरूरत पड़ती है. यह 3 से 6 महीने तक का बनता है.

Delhi Meerut Expressway: किसानों के धरने की वजह से एक्‍सप्रेस वे का कौन सा हिस्‍सा हो रहा है कमजोर, जानें

एनएचएआई ने लेटर लिखकर धरने को कहीं और शिफ्ट करने की अपील की है.

Delhi Meerut Expressway पर UP Gate पर किसानों द्वारा दिए जा रहे धरने की वजह से एक्‍सप्रेस वे का Maintenance नहीं हो पा रही है. इस वजह से वो हिस्‍सा कमजोर हो सकता है. इस संबंध में एनएचएआई ने कमिश्‍नर से लेकर डीएम को लेटर लिखकर धरना कहीं और शिफ्ट कराने की अपील की है, जिससे उसका मेंटीनेंस किया जा सके.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 18:40 IST
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नई दिल्‍ली. यूपी गेट (UP Gate) पर करीब 10 माह से किसानों द्वारा दिए जा रहे धरने से दिल्‍ली-मेरठ एक्‍सप्रेस वे (Delhi Meerut Expressway) का एक हिस्‍सा कमजोर होता है. इस संबंध में नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ  इंडिया (National Highways Authority of India) ने चिंता जताते हुए संबंधित जिलों के डीएम को लेटर लिखा है. जिसमें स्‍पष्‍ट किया है कि अगर धरना स्‍थल के आसपास करीब 300 मीटर में कोई  हादसा होता है तो उसकी जिम्‍मेदारी एनएचएआई की नहीं होगी.

एनएचएआई (NHAI) के प्रोजेक्‍ट डायरेक्‍टर मुदित गर्ग ने बताया कि जहां पर किसानों का धरना चल रहा है, उसके आसपास दस महीने से सड़क और पुल का रखरखाव नहीं हो पा रहा है.  इसकी वजह से एक्सप्रेस-वे का यह हिस्सा कमजोर हो सकता है.  इसके अलावा बरसात में जलभराव की वजह से वहां पेड़ उग आए हैं. जिनकी जड़ें नीचें की ओर पिलर और बे‍यरिंग में जा रही हैं, इसके अलावा बड़े बड़े कील ठोककर तंबू और टेंट लगाए गए हैं. इन वजह से यह हिस्‍सा  कमजोर हो सकता है.

इस मामले पर मेरठ कमिश्‍नर, गाजियाबाद और दिल्ली के शास्‍त्रीनगर जिले के डीएम को पत्र लिखकर हालात की जानकारी दी गई है और कहा है कि यदि उक्त स्थान पर कोई हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदार एनएचएआई की नहीं होगी. उन्होंने किसान आंदोलन को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट कराने की अपील की है.

कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसान 26 नवंबर 2020 से दिल्ली बॉर्डर पर गाजीपुर में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे के लगभग 300 मीटर हिस्‍से पर धरना पर बैठे हैं. टेंट-तंबू से बस्ती बनी है. इसके लिए सड़क में गड्ढे किए गए हैं. बारिश में सड़क पर पानी भरा हुआ था. इस वजह से पुल के पिलर, बेयरिंग का रखरखाव भी नहीं हो पा रहा है. सामान्‍यत: हर छह माह में या फिर बारिश के बाद पुलों की जांच की जाती है, जिससे उसमें आने वाली कमी का पता चलता है, उसकी मरम्‍मत  कराई जाती है.

Greater Noida West Metro News: दिसंबर से शुरू होगा मेट्रो का काम, टेंडर निकला

ग्रेनो वेस्ट को मेट्रो ट्रेन की सौगात देने की तैयारी तेज हो गई हैं. File photo

Greater Noida West Metro News: ग्रेनो वेस्ट में मेट्रो ट्रेन का यह काम पिछले साल दिवाली से शुरू होना था, लेकिन लॉकडाउन के चलते योजना लेट होती चली गई. यह रूट पूरी तरह से ऐलिवेटेड होगा. 1100 करोड़ रुपए का है ये प्रोजेक्ट.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 18:33 IST
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ग्रेटर नोएडा. ग्रेनो वेस्ट में मेट्रो ट्रेन का काम दिसम्बर से शुरू हो जाएगा. ठेकेदार कंपनी का चयन करने के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है. यह प्रोजेक्ट 1100 करोड़ रुपए का है. प्रोजेक्ट की डीपीआर पहले ही केन्द्र सरकार को भेजी जा चुकी है.

मेट्रो ट्रेन शुरू होने से ग्रेनो वेस्ट भी दिल्ली-एनसीआर से जुड़ जाएगा. अभी तक इस रूट पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ इसकी आधारशिला रख सकते हैं. नया रूट करीब 15 किमी का होगा. पहले फेज में 5 मेट्रो रेल स्टेशन बनाए जाएंगे. मेट्रो ट्रेन का यह काम पहले दिवाली से शुरू होना था, लेकिन कोरोना लॉकडाउन के चलते यह योजना लेट होती चली गई. यह रूट पूरी तरह से ऐलिवेटेड होगा.

9 स्टेशन का रूट, 5 से होगी मेट्रो ट्रेन की शुरुआत

गौरतलब रहे नोएडा सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के मेट्रो का रूट 15 किमी का है, लेकिन शुरुआत सिर्फ 5 मेट्रो स्टेशन से होगी. सभी 5 स्टेशन सेक्टर-122, सेक्टर-123, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-4, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-2 और ईकोटेक-12 ग्रेटर नोएडा वेस्ट को आपस में जोड़ेंगे. हालांकि इस पूरे रूट पर 9 स्टेशन तैयार होने हैं. ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो लाइन के शुरू होते ही वेस्ट के सेक्टर ग्रेटर नोएडा की एक्वा लाइन और दिल्ली मेट्रो की ब्‍लू लाइन से भी जुड़ जाएंगे.

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1100 करोड़ का है ग्रेनो वेस्ट मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट

जानकारों की मानें तो इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 11 सौ करोड़ रुपये आएगी. नोएडा सेक्टर-51 से लेकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट नॉलेज पार्क 5 तक शुरू होने वाली मेट्रो रेल का पूरा रूट एलिवेटेड होगा. लेकिन अकेले सिविल वर्क पर ही करीब 492 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. वैसे इस प्रोजेक्ट को 2019 में ही मंजूरी मिल चुकी थी. इसे साल 2022 में बनकर शुरू भी हो जाना था, लेकिन कोरोना और लॉकडाउन के चलते यह प्रोजेक्ट लेट होता गया. अब इस प्रोजेक्ट का काम दिसम्बर में शुरू हो जाएगा.

अब ऑटो-ई रिक्शा से मिलने वाला है छुटकारा

ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो लाइन के शुरू होने से इसका एक बड़ा फायदा ग्रेटर नोएडा मेट्रो को भी मिलेगा. नोएडा के परी चौक से बड़ी संख्या में लोग वेस्ट के लिए भी सफर करते हैं, लेकिन कोई पब्लिक ट्रांसपोर्ट न होने के चलते ऑटो और टैक्सी का सहारा लेते हैं. वेस्ट तक मेट्रो शुरू होने के बाद ग्रेटर नोएडा होते हुए लोग वेस्ट तक का सफर करने लगेंगे.

दिल्ली: कनॉट प्लेस में बने स्मॉग टावर का परीक्षण खत्म, इस दिन से पूरी क्षमता के साथ करेगा काम

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 23 अगस्त को 24 मीटर ऊंचे इस ढांचे का उद्घाटन किया था.

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने यह भी कहा कि उसके कामकाज की निगरानी के लिए आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों का एक दल बनाया गया है. एक अधिकारी ने बताया कि इस दल में आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) के चार एवं आईआईटी दिल्ली के एक विशेषज्ञ होंगे.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 18:30 IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय (Gopal Rai) ने बुधवार को कहा कि कनॉट प्लेस (Connaught Place) में बने स्मॉग टावर (Smog Tower) का परीक्षण पूरा हो चुका है और अब वह एक अक्टूबर से पूरी क्षमता के साथ काम करने लगेगा. उन्होंने यह भी कहा कि उसके कामकाज की निगरानी के लिए आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों का एक दल बनाया गया है. एक अधिकारी ने बताया कि इस दल में आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) के चार एवं आईआईटी दिल्ली के एक विशेषज्ञ होंगे. पर्यावरण मंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘ स्मॉग का परीक्षण पूरा हो हो चुका है. वह एक अक्टूबर से पूर्ण क्षमता के साथ काम करना शुरू कर देगा. ’’ वहीं, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 23 अगस्त को 24 मीटर ऊंचे इस ढांचे का उद्घाटन किया था.

स्‍मॉग टॉवर दूषित हवा को अपने अंदर खीचता है और साफ हवा को छोड़ता है. यही नहीं, यह स्‍मॉग टॉवर तकरीबन एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की प्रदूषित हवा को अपने अंदर लेकर साफ हवा की आपूर्ति करता है. खास बात यह है कि यह स्‍मॉग टॉवर दूषित हवा को खींचकर और साफ करके 10 मीटर की ऊंचाई पर छोड़ देगा. दिल्‍ली सरकार ने इसे पायलट प्रोजेक्‍ट के रूप में तैयार करवाया है. अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले समय में पूरी द‍िल्‍ली में स्‍मॉग टॉवर लगाये जाएंगे, ताकि देश की राजधानी द‍िल्‍ली में वायु प्रदूषण को कम करने में सफलता मिल सके.

स्मॉग टावर के घटक
स्मॉग टावर 24 मीटर यानी आठ माले के बराबर की संरचना है, जिसमें कंक्रीट के टावर की ऊंचाई 18 मीटर है, जबकि उसके ऊपर छह मीटर की कैनोपी है. इसके बेस में चारों ओर 10-10 पंखे लगे हैं. प्रत्येक पंखा प्रति सेकेंड 25 घन मीटर फेंक सकता है, अर्थात एक सेकेंड में कुल 1000 घनमीटर हवा बाहर आ सकती है. टावर के भीतर दो लेयर में कुल 5000 फिल्टर लगाये गये हैं. फिल्टर और फैन अमेरिका से मंगाये गये हैं.

कैसे काम करता है स्मॉग टावर
इस प्रोजेक्ट के प्रभारी एवं दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के वरिष्ठ पर्यावरण इंजीनियर ने बताया कि टावर में मिनेसोटा यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित ‘डाउनड्राफ्ट एयर क्लीनिंग सिस्टम’ का इस्तेमाल किया गया है. आईआईटी बम्बई ने इस टेक्नोलॉजी की प्रतिकृति के लिए अमेरिका की इस यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर काम किया है, जिसे मूर्त रूप दिया है टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की कॉमर्शियल इकाई ने. इस टेक्नोलॉजी के तहत प्रदूषित वायु 24 मीटर की ऊंचाई से अंदर आती है और फिल्टर हुई हवा जमीन से 10 मीटर ऊपर बनाये गये टावर बॉटम से रिलीज होती है. जब टावर के बॉटम स्थित फैन को ऑपरेट किया जाता है, तो निगेटिव प्रेशर के कारण टावर के शीर्ष से हवा अंदर आती है. फिल्टर में लगाये गये ‘मैक्रो’ लेयर में 10 माइक्रॉन और उससे अधिक के कण छनते हैं, जबकि ‘माइक्रो’ लेयर 0.3 माइक्रॉन तक के कणों को फिल्टर करते हैं.

(इनपुट- भाषा)

Delhi Rape Case: चार्जशीट में पुलिस का दावा- पुजारी ने 9 साल की दलित लड़की का पहले भी किया था यौन उत्पीड़न

बिहार के मोतिहारी में 7 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या.

Delhi Rape and Murder Case: पुजारी ने लड़की के माता-पिता को कहा कि उसकी बेटी की मौत करंट लगने से हुई है, और इसे साबित करने के लिए शव पर पानी डाल दिया था. पोस्टमार्टम के दौरान बच्ची का अंग निकालने के बारे में माता-पिता को डराकर 20000 रुपए देने का भी दिया था भरोसा.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 18:29 IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के छावनी इलाके में 9 साल की दलित लड़की के साथ कथित रेप और हत्या के बाद उसका आनन-फानन में दाह संस्कार किए जाने के मामले में एक नया खुलासा हुआ है कि मुख्य अभियुक्त श्मशान घाट के पुजारी ने उसका पहले भी यौन उत्पीड़न किया था. इंडियन एक्सप्रेस ने दिल्ली पुलिस द्वारा इस मामले में दाखिल आरोप-पत्र के हवाले से खबर दी है कि 55 वर्षीय पुजारी राधेश्याम ने उस नाबालिग लड़की के साथ पहले भी यौन उत्पीड़न किया था. राधेश्याम के अलावा कुलदीप सिंह (63), लक्ष्मी नारायण (48) और सलीम अहमद (49) को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है.”

अभियुक्तों ने दावा किया है कि नाबालिग लड़की की मौत कूलर से पानी निकालते वक्त करंट लगने से हुई है, जबकि मृतक लडकी के परिजनों का आरोप है कि उन लोगों ने लड़की के साथ दुष्कर्म किया और जब वह मर गई तो उसके शव का आनन-फानन दाह संस्कार कर दिया.

पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पूछताछ में किए गए खुलासों, सार्वजनिक गवाहों और सीसीटीवी फुटेज पर भरोसा जताया है. आरोप पत्र में कहा गया है कि राधेश्याम ने पुलिस को बताया था कि उसने पहले भी नाबालिग लड़की को अश्लील चीजें दिखाई थीं और उसके निजी अंगों को छुआ था.
आरोप पत्र के अनुसार, राधेश्याम ने खुद कबूल किया है कि उस दिन उसने सलीम को जलेबी लेने बाहर भेज दिया था और खुद एवं कुलदीप दोनों ने नाबालिग के साथ बारी-बारी दुष्कर्म किया था. पुलिस ने आरोप-पत्र में कहा है कि लड़की की मौत यौन उत्पीड़न के दौरान दम घुटने के कारण हुई थी.

क्या कहता है आरोप पत्र

आरोप-पत्र में कहा गया है कि पुजारी ने लड़की के माता-पिता को बताया गया कि उसकी बेटी की मौत करंट लगने से हुई है, और इसे साबित करने के लिए उन लोगों ने उसके शव पर पानी डाल दिया था. इतना ही नहीं, पोस्टमार्टम के दौरान बच्ची का अंग निकालने के बारे में उसके माता-पिता को डराकर और उसके शव का दाह-संस्कार मुफ्त में करने और 20 हजार रुपये नकद देने का भी प्रस्ताव रखा था. आरोप-पत्र के अनुसार, पुजारी ने सलीम और नारायण को चिता सजाने को कहा और मृतका की मां के मना करने के बावजूद चिता में आग लगवा दी थी.पुलिस के अनुसार, राधेश्याम ने जिस बेडशीट पर नाबालिग से रेप किया था, उसे और जिस मोबाइल फोन पर कथित तौर पर पॉर्न दिखाया था, दोनों को चिता में जला दिया था. श्मशानघाट पहुंचने पर नाबालिग के पिता ने दाह-संस्कार किए जाने का विरोध किया था.

कोर्ट ने क्या कहा

इस बीच राजधानी की एक निचली अदालत ने इस मामले की रोज-रोज सुनवाई करने का दिल्ली पुलिस का अनुरोध ठुकरा दिया है. अतिरिक्त् सत्र न्यायाधीश आशुतोष कुमार ने यह कहते हुए पुलिस की यह अर्जी ठुकरा दी कि इस केस को मिलाकर पॉक्सो के 620 मामले लंबित हैं, जिनके कई अभियुक्त न्यायिक हिरासत में हैं. उन्होंने कहा कि मामले की त्वरित सुनवाई करने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन हर रोज सुनवाई संभव नहीं है.

Fear of Corona: DU के कॉलेज तो खुले, लेकिन विद्यार्थी नदारद, बहुत कम उपस्थिति

परिणाम आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया जाएगा.

Colleges Open in Delhi: दौलत राम कॉलेज की प्रिंसिपल सविता रॉय ने कहा कि हम एक महीने के लिए कॉलेज खोलेंगे और देखेंगे कि प्रयोग कितना सफल होता है. एक छात्रा का कहना कि केवल प्रैक्टिकल के लिए कॉलेज आना बेहतर विकल्प नहीं है.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 17:55 IST
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नई दिल्ली. कोरोना के घटते असर के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने भले ही प्रैक्टिकल कक्षाओं के लिए पांच दिन पहले ही कॉलेज के गेट खोल दिए हैं, लेकिन अब भी विद्यार्थियों (Students) की उपस्थिति काफी कम बनी हुई है. क्योंकि राजधानी दिल्ली से बाहर के अधिकांश विद्यार्थी अभी और इंतजार करना चाहते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, डीयू ने अंतिम वर्ष के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए प्रयोगशाला और प्रैक्टिकल कार्यों के लिए 16 सितंबर को अपने कॉलेज खोले थे, छात्र-छात्राएं इन कक्षाओं में ऑफलाइन भी भाग ले सकते हैं. चरणबद्ध तरीके से फिर से खोले गए कॉलेजों में कमरों को आधी क्षमता का इस्तेमाल किया जाना है और सभी थ्योरी कक्षाएं पूरी तरह से ऑनलाइन जारी रहेंगी. पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या काफी कम रही थी, लेकिन ऐसी उम्मीदें थीं कि कालांतर में संख्या और बढ़ेगी, परन्तु कॉलेजों में, अभी भी बहुत कम छात्र पहुंच रहे हैं.

उपस्थिति का प्रतिशत बहुत कम, बाहरी छात्र आ नहीं रहे

हंसराज कॉलेज की प्रिंसिपल रमा ने कहा कि बहुत से छात्र नहीं आ रहे हैं. प्रतिशत के लिहाज से यह कम संख्या है, लेकिन वे लैब और ट्यूटोरियल की ओर रुख कर रहे हैं. ऐसा लगता है कि अधिकांश छात्रों की फिलहाल कॉलेज आने में कोई दिलचस्पी नहीं है. आशंका जताई जा रही है कि तीसरी लहर भी आ सकती है और अभी जो छात्र आ रहे हैं, उन्हें भी ज्यादातर टीकाकरण की एक ही खुराक मिली है. हमारे पास केवल स्थानीय छात्र हैं, बाहरी छात्र वास्तव में नहीं आ रहे हैं.

बाहरी स्टूडेंट्स के लिए आवास भी समस्या

हिंदू कॉलेज की प्रिंसिपल अंजू श्रीवास्तव ने भी कहा कि विज्ञान विषयों में लगभग 10 से 12 छात्र ही कॉलेज आ रहे थे, यह संख्या बहुत कम है. हमने सिर्फ प्रैक्टिकल के लिए कॉलेज खोला है, थ्योरी के लिए नहीं. साथ ही आवास भी एक समस्या है और माता-पिता भी अपने बच्चों को तीसरी लहर की आशंका के कारण कॉलेज भेजने को उत्साहित नहीं है.

कई कारणों से छात्र कॉलेज नहीं आ रहे

वहीं दौलत राम कॉलेज की प्रिंसिपल सविता रॉय ने कहा कि सिर्फ 30 फीसदी छात्र ही लैब के काम के लिए कॉलेज आ रहे हैं. कई छात्र विभिन्न कारणों से उत्सुक नहीं हैं, खासकर जब थ्योरी क्लासेज अब भी ऑनलाइन हैं. उन्होंने कहा कि खास पाठ्यक्रम, बीएससी लाइफ साइंसेज के कई छात्रों ने मुझे संदेश लिखा है कि वे आना चाहेंगे. इसलिए उनके लिए हमने एक कार्यक्रम तैयार किया है. हम एक महीने के लिए कॉलेज खोलेंगे और देखेंगे कि प्रयोग कितना सफल होता है.

केवल प्रैक्टिकल के लिए आना विकल्प नहीं

मिरांडा हाउस में कम्प्यूटर साइंस के अंतिम वर्ष की छात्रा आरुषि शर्मा ने कहा कि दिल्ली से बाहर के छात्रों के लिए केवल प्रैक्टिकल क्लासेज के लिए कॉलेज आना बेहतर विकल्प नहीं है. आरुषि ने कहा कि मैं तो दिल्ली में रहती हूं, इसलिए एक दिन आ भी गई, लेकिन ज्यादातर छात्राएं नहीं आ रही हैं.

इस बीच डीयू रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने हालांकि कहा कि यूनिवर्सिटी ने दूसरे चरण में कॉलेजों के फिर से खोलने की कोई योजना नहीं बनाई है. उन्होंने कहा कि हम डीडीएमए द्वारा आगे कोई और दिशानिर्देश जारी किये जाने के बाद इस बारे में सोचेंगे.

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस तैयार कर रही है टॉप-10 खतरनाक ड्राइवरों की लिस्ट, जानें क्या है पूरा मामला

दिल्ली पुलिस की सूत्रों की मानें तो कुछ खतरनाक ड्राइवरों की पहचान भी कर ली गई है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस (Delhi Traffic Police) ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को रोकने के लिए अब एक अनूठी पहल की शुरुआत की है. जिस तरह पुलिस थानों में इलाके के बड़े अपराधियों और टॉप गैंगेस्टर की सूची तैयार करती है, ठीक उसी तर्ज पर अब ट्रैफिक पुलिस भी प्रमुख सड़कों पर चलने वाले खतरनाक ड्राइवरों की सूची तैयार कर रही है.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 17:23 IST
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नई दिल्ली. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस (Delhi Traffic Police) ने सड़क दुर्घटनाओं (Road Accidents) में होने वाली मौतों (Deaths) को रोकने के लिए अब एक अनूठी पहल की शुरुआत की है. जिस तरह पुलिस थानों में इलाके के बड़े अपराधियों और टॉप गैंगेस्टर की सूची तैयार करती है, ठीक उसी तर्ज पर अब ट्रैफिक पुलिस भी प्रमुख सड़कों पर चलने वाले खतरनाक ड्राइवरों (Drivers) की सूची तैयार कर रही है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की इस कवायद से राजधानी के प्रमुख सड़कों पर हो रहे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने का प्लान है.

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अब हर प्रमुख सड़कों पर टॉप-10 खतरनाक ड्राइवरों की पहचान करने में लग गई है. इन दस खतरनाक ड्राइवरों को आने वाले दिनों में रोड सेफ्टी का पाठ भी पढ़ाया जाएगा. इसके साथ ही ड्राइवरों को चेतावनी दी जाएगी कि अगर इसके बाद भी वह नहीं संभले तो ड्राइविंग लाइसेंस रद्द होगा ही मोटर व्हीकल कानून के साथ-साथ आपराधिक धाराओं में भी मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाएगा.

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दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अब हर प्रमुख सड़कों पर टॉप-10 खतरनाक ड्राइवरों की पहचान करने में लग गई है.

राकेश अस्थाना के सीपी बनते ही शुरू हुई अनूठी पहल
बता दें कि गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना जब से दिल्ली पुलिस के मुखिया बने हैं, उसके बाद से ही एक के बाद एक नए फैसले लिए जा रहे हैं. अभी हाल भी सीपी ने आदेश जारी किया था कि अब दिल्ली पुलिस के 50 साल से 58 साल तक सिपाही या अधिकारी अपने इच्छा के अनुसार पोस्टिंग ले सकते हैं.

खतरनाक ड्राइवरों की लिस्ट हो रही तैयार
गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने खतरनाक ड्राइवरों की लिस्ट तैयार करनी शुरू कर दी है. दिल्ली पुलिस की सूत्रों की मानें तो कुछ खतरनाक ड्राइवरों की पहचान भी कर ली गई है. दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर खतरनाक ड्राइविंग, रेड लाइट जपिंग, ओवर स्पीडिंग और शराब पीकर वाहन चलाने के आधार पर हुए चालानों के आधार पर ये सूची तैयार किए जा रहे हैं.

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सड़क दुर्घटनाओं में काफी कमी आ जाएगी
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की सूची एक बार तैयार हो जाने के बाद दिल्ली में सड़क दुर्घटनाओं में काफी कमी आ जाएगी. देश में सड़क दुर्घटनाओं में हो रहे मौतों में ज्यादा मौतें खतरनाक ड्राइविंग, रेड लाइट जपिंग, ओवर स्पीडिंग और शराब पीकर वाहन चलाने से होती है.

दिल्ली हिंसा: अदालत ने हटाए 10 लोगों के खिलाफ आगजनी के आरोप, कहा- पुलिस खामियों को छुपा रही

अदालत ने आगे कहा कि केवल उन पुलिस गवाहों के बयानों के आधार पर आगजनी के आरोप नहीं लगाए जा सकते जो घटना की तारीख पर संबंधित क्षेत्र में ‘बीट’ अधिकारी के रूप में तैनात थे. (सांकेतिक फोटो)

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव (Vinod Yadav) ने आगजनी के आरोप रद्द करते हुए कहा कि शिकायतकर्ताओं ने अपने शुरुआती बयानों में दंगाई भीड़ द्वारा ’आग या विस्फोटक पदार्थ’ के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा.

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नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत (Court) ने दिल्ली हिंसा (Delhi Violence) के दौरान दुकानों में कथित रूप से लूटपाट करने के दस आरोपियों के खिलाफ आगजनी के आरोप को हटा दिया. इसके साथ ही अदालत ने कहा कि पुलिस एक खामी को छिपाने और दो अलग-अलग तारीखों की घटनाओं को एक साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है. यह मामला तीन शिकायतों के आधार पर दर्ज किया गया था. बृजपाल ने आरोप लगाया था कि दंगाई भीड़ ने 25 फरवरी को बृजपुरी मार्ग (Brijpuri Marg) पर उनकी किराए की दुकान को लूट लिया था. वहीं, दीवान सिंह ने आरोप लगाया था कि 24 फरवरी को उनकी दो दुकानों में लूटपाट की गयी थी.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने आगजनी के आरोप रद्द करते हुए कहा कि शिकायतकर्ताओं ने अपने शुरुआती बयानों में दंगाई भीड़ द्वारा ’आग या विस्फोटक पदार्थ’ के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा. दीवान सिंह ने अपने पूरक बयान में हालांकि कहा कि दंगाई भीड़ ने उनकी दुकान में आग लगा दी. इस पर अदालत ने कहा कि अगर पुलिस में की गयी शुरुआती शिकायत में आगजनी का अपराध नहीं था तो जांच एजेंसी पूरक बयान दर्ज करके ’खामी को नहीं ढंक’ सकती है.

दोनों तारीखों पर एक ही दंगाई भीड़ थी
अदालत ने आगे कहा कि केवल उन पुलिस गवाहों के बयानों के आधार पर आगजनी के आरोप नहीं लगाए जा सकते जो घटना की तारीख पर संबंधित क्षेत्र में ‘बीट’ अधिकारी के रूप में तैनात थे. अदालत ने कहा कि वह यह नहीं समझ पा रही है कि 24 फरवरी को हुयी घटना को 25 फरवरी की घटना के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है जब तक कि यह स्पष्ट सबूत नहीं हो कि दोनों तारीखों पर एक ही दंगाई भीड़ थी.

सत्येंद्र जैन बोले- केंद्र ने ऑक्सीजन की कमी पर की राजनीति, मौतों को छिपाने का किया प्रयास

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उन्होंने ‘‘मौतों को छिपाने का प्रयास कर गलत काम किया है’’. (फाइल फोटो)

स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) ने कहा कि दिल्ली सरकार ने जून में चार सदस्यीय समिति का गठन किया था, जिसमें चिकित्सा विशेषज्ञ भी शामिल थे और फाइल को मंजूरी के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल के पास भेजा गया.

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नई दिल्ली. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) ने बुधवार को केंद्र पर आरोप लगाया कि कोरोना वायरस महामारी (Corona Virus) की दूसरी लहर के दौरान यहां ऑक्सीजन की कमी पर उसने (केंद्न ने) जमकर राजनीति की. साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी (Lack Of Oxygen) के कारण हुई मौतों की जांच के लिए प्रदेश सरकार द्वारा समिति गठित किए जाने को रोकने का प्रयास कर रही है. उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में यह बात कही. एक दिन पहले दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने कहा था कि कथित चिकित्सकीय ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मौतों की जांच के लिए आप सरकार द्वारा उच्च स्तरीय समिति के गठन में उसे कोई दिक्कत दिखाई नहीं दे रही है.

जैन ने कहा कि दिल्ली सरकार ने जून में चार सदस्यीय समिति का गठन किया था, जिसमें चिकित्सा विशेषज्ञ भी शामिल थे और फाइल को मंजूरी के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल के पास भेजा गया. उन्होंने आरोप लगाए कि केंद्र ने उपराज्यपाल कार्यालय के माध्यम से इसे रोकने का प्रयास किया. जैन ने आरोप लगाए, ‘‘केंद्र ने ऑक्सीजन संकट के मुद्दे पर भी राजनीति की और संसद में भी कहा कि ऑक्सीजन की कमी से मौत होने की कोई खबर नहीं है.’’

अदालत ने अब समिति के गठन के लिए रास्ता साफ कर दिया है
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उन्होंने ‘‘मौतों को छिपाने का प्रयास कर गलत काम किया है’’ जो जीवन रक्षक गैस की कमी के कारण हुई होगी. उन्होंने कहा कि अदालत ने अब समिति के गठन के लिए रास्ता साफ कर दिया है. जैन ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस समिति का काम ऑक्सीजन की कमी के कारण किसी भी व्यक्ति की मौत होने का दावा किए जाने की जांच करने का है, चाहे वह मौत घर में हुई हो या अस्पताल में. समिति जांच करेगी और पांच लाख रुपये तक के मुआवजा की अनुशंसा करेगी. यह किसी चिकित्सीय लापरवाही की जांच नहीं करेगी, जो चिकित्सा परिषद का काम है.’’

Pollution: दिल्‍ली-एनसीआर में इस बार फिर गहरा सकता है प्रदूषण, पंजाब में पराली के लिए नाकाफी इंतजाम

पंजाब में पराली जलाने के कारण हर साल दिल्‍ली-एनसीआर में प्रदूषण की चादर तन जाती है. इस बार पंजाब ने पराली प्रबंधन के लिए काफी इंतजाम किए हैं.

Air pollution in Delhi-NCR: पंजाब के पटियाला, संगरूर, बठिंडा, फिरोजपुर, श्रीमुक्तसर साहिब, तरन तारन, मोगा और मानसा को सबसे अधिक प्रभावित जिलों की श्रेणी में रखा गया है. इन जिलों में पिछले साल 4000 से ज्‍यादा पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई थीं.

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नई दिल्‍ली. सितंबर गुजरने के साथ ही दिल्‍ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण (Air Pollution) को लेकर चिंता शुरू हो जाती है. सांसों को घोंटने वाला यह संकट सिर्फ राजधानी दिल्‍ली को ही नहीं, बल्कि आसपास के शहरों को भी अपनी जद में ले लेता है. हर साल का सबसे बड़ा संकट बन चुके इस प्रदूषण को लेकर पंजाब के खेतों में जलने वाली पराली को जिम्‍मेदार ठहराया जाता है. पिछले साल पंजाब में धान की पराली को खेतों में ही जला देने के मामलों में 44 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. वहीं विशेषज्ञों की मानें तो इस साल पंजाब सरकार की ओर से पराली जलाने (Stubble Burning) पर रोक लगाई गई है लेकिन इंतजाम नाकाफी होने के चलते इस साल भी दिल्‍ली-एनसीआर में प्रदूषण गहराने की आशंका है.

पंजाब में पराली जलाने के रोकने के इंतजामों को लेकर पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सदस्‍य सचिव करुनेश गर्ग का कहना है कि राज्‍य के अधिक प्रभावित गांवों में पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए 8500 नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं. इसके साथ ही आग की घटनाओं पर निगरानी रखने के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं. जिनसे डाटा लेकर मोबाइल एप से डैशबोर्ड पर अपलोड किया जाएगा. वहीं सम्बन्धित जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को जरूरी हिदायतें पहले ही जारी कर दी गई हैं कि इन गांवों में विशेष ध्यान दिया जाए, जहां पिछले सीजन के दौरान हर पराली को आग लगाने की 25 से अधिक घटनाएं घटीं थीं.

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हर साल सर्दियों में दिल्‍ली में वायु प्रदूषण इतना बढ़ जाता है कि सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है.

गर्ग कहते हैं कि नोडल अधिकारी किसानों को पराली जलाने से परहेज करने के प्रति जागरूक करने के अलावा धान की कटाई के बाद के कार्यों पर भी नजर रखेंगे. पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, सहकारिता, राजस्व, ग्रामीण विकास एवं पंचायत, कृषि, बागबानी और भूमि संरक्षण सहित अन्य विभागों के अधिकारी और कर्मचारी किसान बैठकें, पराली क निपटारे के लिए मशीनों का बंदोबस्त करना, गांवों में प्रचार सामग्री बांटने का काम करेंगे.

पराली के लिए नाकाफी हैं इंतजाम

इस साल पराली प्रबंधन को लेकर न्‍यूज 18 हिंदी से बातचीत में पंजाब सरकार के नोडल अधिकारी और कृषि विभाग में संयुक्‍त निदेशक मनमोहन कालिया कहते हैं कि धान के बचे हुए हिस्‍से को खेतों में जलाने से रोकने के लिए सरकार की ओर से काफी व्‍यवस्‍थाएं की गई हैं. लेकिन इंतजामों की बात करें तो वे पर्याप्‍त नहीं हैं. पराली को निपटाने के लिए जितने बजट की मांग की गई थी, केंद्र सरकार की ओर से उसका एक तिहाई ही राज्‍य को दिया गया है. पिछले तीन वर्षों में पंजाब सरकार ने काफी मेहनत की और किसानों के लिए 76,626 कृषि मशीनें या यंत्र सप्लाई किए. ये मशीनें किसानों को 50 से 80 फीसदी की सब्सिडी पर दी गईं. आज ये स्थिति है कि बड़ी संख्‍या में किसान ये मशीनें लेने के लिए आगे आ रहे हैं लेकिन राज्‍य सरकार के पास उनकी मांगें पूरी करने के लिए संसाधन ही नहीं हैं.

कालिया कहते हैं कि इस एक ही समय में फसल की बुवाई और बिजाई का काम होने के चलते निश्चित समय के लिए हर गांव में ज्‍यादा मशीनों की जरूरत होती है. इसी को देखते हुए पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से एक लाख और मशीनों की मांग की थी, ताकि किसानों की मांग के अनुरूप सप्‍लाई हो सके. लेकिन केंद्र की ओर से सिर्फ एक तिहाई बजट मिलने के कारण इस साल एक लाख की मांग की जगह सिर्फ 31 हजार मशीनें ही और उपलब्‍ध कराई जा सकेंगी. मशीनें लेने आ रहे सभी लोगों को इस बार मशीनें नहीं मिल सकेंगी.

किसानों का विरोध प्रदर्शन भी प्रदूषण की वजह

कृषि विशेषज्ञ और वरिष्‍ठ पत्रकार ओम प्रकाश कुशवाह का कहना है कि जहां तक पराली जलाने की बात है, तो पिछले साल कृषि बिलों के विरोध में किसानों ने खेतों में जगह-जगह पराली जलाकर विरोध प्रदर्शन किया था. वहीं इस साल की बात करें तो किसान अभी भी दिल्‍ली-एनसीआर में धरने पर बैठे हुए हैं. किसान लगातार अपनी मांगों पर अड़े हैं ऐसे में आशंका है कि विरोध के चलते पहले की तरह किसान खेतों में पराली जलाने की प्रक्रिया दोहरा सकते हैं और दिल्‍ली-एनसीआर में प्रदूषण स्‍तर बढ़ सकता है.

पंजाब में खेतों में पराली जलाने की घटनाएं पिछले साल 44 फीसदी बढ़ गई थीं. (सांकेतिक फोटो)

पंजाब में खेतों में पराली जलाने की घटनाएं पिछले साल 44 फीसदी बढ़ गई थीं. (सांकेतिक फोटो)

इस बारे में कालिया कहते हैं कि जैसा कि कई रिपोर्ट में भी कहा गया था कि पंजाब में पिछले साल 44 फीसदी ज्‍यादा पराली जलाई गई, लेकिन अगर मात्रा को देखें तो पिछले साल पराली जलाने की मात्रा कम थी हालांकि विरोध के चलते स्‍थानों की संख्‍या ज्‍यादा थी. इस बार किसानों से ऐसा न करने की अपील की जा रही है.

पिछले साल ये जिले थे हॉटस्‍पॉट

पंजाब राज्‍य के पटियाला, संगरूर, बठिंडा, फिरोजपुर, श्रीमुक्तसर साहिब, तरन तारन, मोगा और मानसा को सबसे अधिक प्रभाविज जिलों की श्रेणी में रखा गया है. अधिकारियों के मुताबिक इन जिलों में पिछले सीजन में सबसे ज्‍यादा पराली जलाने की घटनाएं हुई थीं. पिछले साल भी पराली जलाने पर रोक थी और किसानों से मशीनों का इस्‍तेमाल करने की अपील की गई थी, लेकिन कई जिलों में धान की पराली को आग लगने की 4000 से अधिक घटनाएं तक दर्ज की गई थीं. लिहाजा इस बार पराली पर कितना नियंत्रण हो पाता है यह देखना होगा.

नोएडा में डेंगू, मलेरिया और कोविड-19 के बीच अब दिमागी बुखार का खतरा, 3 संदिग्ध मरीज मिले

उन्होंने बताया कि तीनों को जांच के लिए जिले के विभिन्न अस्पतालों में भेजा गया है. (सांकेतिक फोटो)

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉक्टर सुनील शर्मा (Dr Sunil Sharma) ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने रोगियों का पता लगाने के लिए सात से 17 सितंबर तक घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया था.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 15:45 IST
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नोएडा. मलेरिया और कोविड-19 (Malaria And Covid-19) जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे के बीच अब दिमागी बुखार (Brain Fever) ने भी शहर वासियों और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. जिले में इस बीमारी के तीन संदिग्ध मामले मिले हैं. हालांकि, अभी बीमारी की पुष्टि नहीं हुई है. बीमारी की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी. मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉक्टर सुनील शर्मा (Dr Sunil Sharma) ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने रोगियों का पता लगाने के लिए सात से 17 सितंबर तक घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया था. इसमें बुखार, मलेरिया और टीबी के कई रोगी मिले थे. इसी दौरान तीन लोगों में दिमागी बुखार के लक्षण दिखे.

उन्होंने बताया कि तीनों को जांच के लिए जिले के विभिन्न अस्पतालों में भेजा गया है. उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण टीम ने लक्षणों के आधार पर वर्गीकरण कर मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा है. जिन मरीजों में दिमागी बुखार के लक्षण मिले हैं, उनकी एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम की जांच होगी. रिपोर्ट आने पर ही बीमारी की पुष्टि होगी. सीएमओ ने बताया कि डेंगू के मरीजों की तलाश के लिए रोजाना एनए1 रैपिड एंटीजन जांच की जा रही है. प्रतिदिन औसतन डेंगू के 10 मरीज मिल रहे हैं.

इस साल अधिक टीबी मरीजों की पहचान की गई है
वहीं, कल खबर सामने आई थी कि गौतमबुद्ध नगर (Gautam Buddha Nagar) जिले में टीबी के मरीज बढ़ते जा रहे हैं. पिछले 10 दिनों के अंदर की गई निगरानी के दौरान 54 संदिग्ध मामलों में से 6 टीबी (TB Patients) के नए केस सामने आए हैं. इसके साथ ही इस साल अभी तक टीबी के करीब 5500 मामले सामने आ चुके हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित खबर के मुताबिक, मरीजों की पहचान विशेष निगरानी, जागरूकता अभियान और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने वालों के डाटा (Data) के आधार पर की जाती है. हालांकि, पूरे जिले में की गई व्यापक निगरानी के कारण पिछले साल की तुलना में इस साल अधिक टीबी मरीजों की पहचान की गई है.

Delhi Riots Case: कोर्ट की फटकार का असर, दिल्ली दंगों की जांच के लिए पुलिस ने उठाया ये कदम

दिल्‍ली पुलिस ने शख्‍स को उसके घरवालों के हवाले कर दिया है.

Delhi Riots: सबसे अधिक 92 मामले भजनपुरा पुलिस थाने की टीम को सौंपे गए हैं, जिसकी कमान दो इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के पास है.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 14:51 IST
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नई दिल्ली. पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के मामलों में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के खिलाफ अदालतों की कड़ी टिप्पणियों के बाद, अभियोजन एजेंसी ने लंबित जांच की समीक्षा करने और रिकॉर्ड पर अधिक वैज्ञानिक साक्ष्य लाने के लिए अधिकारियों का मार्गदर्शन करने के लिए विशेष टीमें (Special Teams) गठित की हैं.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, 20 सितंबर को डीसीपी (पूर्वोत्तर) द्वारा जारी एक नोटिस के अनुसार, पुलिस ने 10 टीमें बनाई हैं जोकि रिकॉर्ड पर उपलब्ध वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य का विश्लेषण करने और आईओ को रिकॉर्ड पर अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य लाने के लिए मार्गदर्शन करने पर विशेष जोर देगी. इसके बाद यह जानकारी दंगा प्रकोष्ठ को भेजी जाएगी. यह पहल 24 सितंबर तक पूरी हो जाएगी और टीम प्रभारी को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि यह पहल परिणाम उन्मुख तरीके से आयोजित की गई हो और इसे निर्धारित समय के भीतर पूरा किया गया है.

एसीपी या इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में छह टीमों का पहला बैच समीक्षा संबंधी कार्यों में शामिल होगा. संबंधित अपर डीसीपी उनके सुपरवाइजरी ऑफिसर होंगे. सबसे अधिक 92 मामले  भजनपुरा पुलिस थाने की टीम को सौंपे गए हैं, जिसकी कमान दो इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के पास है. इस टीम में, सदस्यों को लंबित दंगा मामलों की केस फाइलों की समीक्षा करनी होगी और रिकॉर्ड पर दस्तावेजों की जांच करके यह सुनिश्चित करना होगा कि ये उचित हैं या नहीं.

नोटिस में कहा गया है कि पर्यवेक्षी अधिकारी प्रोफार्मा पर अपनी विशिष्ट टिप्पणियां करेंगे और इस तरह के प्रोफार्मा को दैनिक आधार पर आगे के संकलन के लिए दंगा प्रकोष्ठ/एनईडी को प्रस्तुत किया जाएगा. टीमों को समीक्षा किए गए मामलों के संबंध में हर दिन शाम 7 बजे अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी. इस बीच, एसीपी सीलमपुर को पर्यवेक्षी अधिकारी के रूप में काम सौंपा जाएगा.

तकनीकी टीम में विशेष स्टाफ अधिकारी और एक निजी कंपनी की एक तकनीकी टीम शामिल है जो पुलिस को उनके सॉफ्टवेयर के साथ मदद करेगी. यह टीम उपलब्ध डंप डेटा से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के संबंध में और चेहरे की पहचान तकनीक के माध्यम से आरोपी की पहचान करने में आईओ/एसएचओ को तकनीकी सहायता प्रदान करेगी. चेहरे की पहचान संबंधी टेक्नोलॉजी दंगा प्रकोष्ठ में हाल ही में स्थापित किया गया है.

नई दिल्ली. पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के मामलों में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के खिलाफ अदालतों की कड़ी टिप्पणियों के बाद, अभियोजन एजेंसी ने लंबित जांच की समीक्षा करने और रिकॉर्ड पर अधिक वैज्ञानिक साक्ष्य लाने के लिए अधिकारियों का मार्गदर्शन करने के लिए विशेष टीमें (Special Teams) गठित की हैं.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, 20 सितंबर को डीसीपी (पूर्वोत्तर) द्वारा जारी एक नोटिस के अनुसार, पुलिस ने 10 टीमें बनाई हैं जोकि रिकॉर्ड पर उपलब्ध वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य का विश्लेषण करने और आईओ को रिकॉर्ड पर अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य लाने के लिए मार्गदर्शन करने पर विशेष जोर देगी. इसके बाद यह जानकारी दंगा प्रकोष्ठ को भेजी जाएगी. यह पहल 24 सितंबर तक पूरी हो जाएगी और टीम प्रभारी को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि यह पहल परिणामोन्मुखी तरीके से आयोजित की गई हो और इसे निर्धारित समय के भीतर पूरा किया गया है.

एसीपी या इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में छह टीमों का पहला बैच समीक्षा संबंधी कार्यों में शामिल होगा. संबंधित अपर डीसीपी उनके सुपरवाइजरी ऑफिसर होंगे. सबसे अधिक 92 मामले  भजनपुरा पुलिस थाने की टीम को सौंपे गए हैं, जिसकी कमान दो इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के पास है. इस टीम में, सदस्यों को लंबित दंगा मामलों की केस फाइलों की समीक्षा करनी होगी और रिकॉर्ड पर दस्तावेजों की जांच करके यह सुनिश्चित करना होगा कि ये उचित हैं या नहीं.

नोटिस में कहा गया है कि पर्यवेक्षी अधिकारी प्रोफार्मा पर अपनी विशिष्ट टिप्पणियां करेंगे और इस तरह के प्रोफार्मा को दैनिक आधार पर आगे के संकलन के लिए दंगा प्रकोष्ठ/एनईडी को प्रस्तुत किया जाएगा. टीमों को समीक्षा किए गए मामलों के संबंध में हर दिन शाम 7 बजे अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी. इस बीच, एसीपी सीलमपुर को पर्यवेक्षी अधिकारी के रूप में काम सौंपा जाएगा.

तकनीकी टीम में विशेष स्टाफ अधिकारी और एक निजी कंपनी की एक तकनीकी टीम शामिल है जो पुलिस को उनके सॉफ्टवेयर के साथ मदद करेगी. यह टीम उपलब्ध डंप डेटा से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के संबंध में और चेहरे की पहचान तकनीक के माध्यम से आरोपी की पहचान करने में आईओ/एसएचओ को तकनीकी सहायता प्रदान करेगी. चेहरे की पहचान संबंधी टेक्नोलॉजी दंगा प्रकोष्ठ में हाल ही में स्थापित किया गया है.

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