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मिलिए गाज़ियाबाद के गांधी से जिन्हें देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था "गाज़ियाबाद का गांधी"

मिलिए गाज़ियाबाद के गांधी से जिन्हें देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था "गाज़ियाबाद का गांधी"

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भाजपा के वरिष्ठ और गाज़ियाबाद में पहली बार कमल खिलाने वाले बालेश्वर त्यागी से जिन्हें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनकी ईमानदारी से ख़ु

    क्या आप आज तक कभी मिले हैं गाज़ियाबाद के गांधी से.अगर नहीं तो हम आपको मिलवाते हैं.भाजपा के वरिष्ठ और गाज़ियाबाद में पहली बार कमल खिलाने वाले बालेश्वर त्यागी से जिन्हें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनकी ईमानदारी से ख़ुश होकर उन्हें गाज़ियाबाद का गांधी कहा था.वो तीन बार विधायक रह चुके हैं.जब आप ये शब्द \”विधायक\” सुनते होंगे तो आपके दिमाग़ मे गाड़ियों का काफिला,कार्यकर्ताओं की भीड़ और भारी जनसभा जैसी बातें दिमाग़ में आती होंगी.लेकिन बालेश्वर त्यागी ने ये साबित कर के दिखाया कि विधायक साइकिल से भी सफर कर सकतें हैं.बालेश्वर त्यागी अपना चुनावी प्रचार साइकिल से करते थे और आज भी स्कूटर से यात्रा करते हैं.

    जानिएबालेश्वर त्यागी का सफर
    बालेश्वर त्यागी वर्ष 1989 से 2002 तक गाजियाबाद सीट से भाजपा की टिकट पर लगातार पांच बार चुनाव लड़ चुके हैं.पहली और अंतिम चुनाव में हार मिली तो दूसरे, तीसरे व चौथे चुनाव में जीत दर्ज कर उन्होंने हैट्रिक भी बनाई थी.शुरू से ही बालेश्वर को सादगी से इतना लगाव था कि वह अपना चुनावी प्रचार साइकिल से ही किया करते थे.जनसंघ से दो बार और भाजपा से एक बार चुनाव लड़ने के बाद भी दिनेश चंद्र गर्ग को जीत नहीं मिली तो 1989 के चुनाव में गाजियाबाद शहर की सीट से बालेश्वर त्यागी को भाजपा ने चुनावी मैदान में उतारा था.उस समय उनके पास साइकिल थी और साइकिल से ही उन्होंने चुनाव प्रचार किया था.पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने नवयुग मार्केट में उनके लिए सभा की थी,लेकिन सुरेंद्र कुमार मुन्नी के हाथों उन्हें 16,877 वोट से हार मिली थी.हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी.फिर एक ऐसा भी समय आया जब उन्होंने सारे रिकार्ड्स तोड़ दिए.साल 1991 में बालेश्वर त्यागी ने 54 हजार 714 मत के साथ न सिर्फ पहली जीत दर्ज की, बल्कि सबसे ज्यादा मत पाने का रिकार्ड भी बनाया.इस बार उन्होंने साइकिल से ही अपना चुनाव प्रचार किया था.दो साल बाद अगला चुनाव बालेश्वर त्यागी ने अपना पिछला रिकार्ड तोड़कर 91 हजार 199 वोट के साथ दोबारा से जीत दर्ज की थी.1996 में वह तीसरी बार विधायक चुने गए थे.बालेश्वर त्यागी के मुताबिक साल 2002 में घंटाघर रामलीला मैदान में लाल कृष्ण आडवाणी भी उनके लिए सभा करने आए थे.बालेश्वर त्यागी बार एसोसिएशन के दो बार अध्यक्ष भी रह चुके हैं.सादगी के चलते वह पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के चहेते भी रह चुके हैं.

    आज की भाजपा में क्या अंतर देखते हैं बालेश्वर
    पहले भाजपा में कार्यकर्ताओं का महत्व काफी ज्यादा था.और एक संयुक्त लीडरशिप देखने को मिलती थी.उस समय परिश्रम की राजनीति थी पर अब धन की राजनीति देखने को मिलती है.नए राजनीतिक वातावरण और विज्ञान के युग मे काफी चीज़े बदली हैं.
    बालेश्वर त्यागी को किताब लिखने का भी शौक है.उन्होंने राजनीतिक संस्मरणों के आधार पर दो किताबें लिखी हैं.

    Tags: BJP

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