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कौवों को खाना खिलाती थी गाजियाबाद की ये महिला, फिर एक दिन अचानक...

एक बार जया श्रीवास्तव कौवे को खाना खिला रही थीं, तभी एक फकीर बुजुर्ग उनके पास आकर बोले कि मैंने भी कुछ नहीं खाया है बेट ...अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
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    विशाल झा

    गाजियाबाद. पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और आस्था का पूजन समय होता है श्राद्ध. 15 दिन तक चलने वाले इस पवित्र कर्म में अपने पूर्वजों को याद किया जाता है. इसमें कौवा पक्षी का विशेष महत्व होता है. श्राद्ध (Pitru Paksha 2022) के समय अपने पूर्वजों को याद कर के यज्ञ करने के बाद कौए को अन्न और जल अर्पित करना होता है. क्योंकि कौए को यम का प्रतीक माना जाता है. गरुड़ पुराण के अनुसार अगर कौवा श्राद्ध का भोजन खा ले तो पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. साथ ही यमराज भी खुश होते हैं.

    लेकिन उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रहने वाली जया श्रीवास्तव कौवे की जगह वृद्धाश्रम में बुजुर्गों को खाना खिलाती हैं. दरअसल एक घटना के बाद से वो ऐसा कर रही हैं. एक बार जया कौवे को खाना खिला रही थीं, तभी एक फकीर बुजुर्ग उनके पास आकर बोले कि मैंने भी कुछ नहीं खाया है बेटा. तब से जया को लगा कि जो धरती पर हैं पहले उनकी सेवा की जाए. इसके बाद से जया ने लगातार वृद्धाश्रम में जाकर बुजुर्गों की सेवा करने और उनको खाना खिलाने का संकल्प लिया. अब श्राद्ध में बुजुर्गों को खाना खिलाते हुए उन्हें 12 वर्ष हो गए हैं. वो ध्यान रखती है कि बुजुर्गों की हर जरूरत का ख्याल रखा जाए.

    दरअसल गरुड़ पुराण में बताया गया था कि कौवा को यम का वरदान प्राप्त है. यम ने कौवा को वरदान दिया था कि तुम को दिया गया भोजन पूर्वजों की आत्मा को शांति देगा. यही वजह है कि पितृपक्ष में ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ-साथ कौवे को भी भोजन कराना बेहद जरूरी है. कहा जाता है कि पितृपक्ष में कौवे हमारे पितरों के रूप में कभी भी हमारे करीब आ सकते हैं.

    सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितृपक्ष समाप्त हो जाता है. एक दिन पितरों को विदाई दी जाती है. इसके साथ ही घर परिवार में सब मंगल रहने की कामना की जाती है.

    (नोट :- न्यूज़ 18 लोकल किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता है. सभी मान्यताओं पर आधारित है)

    Tags: Ghaziabad News, Pitru Paksha, Up news in hindi

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