दिल्ली से सटे इस गांव में 19 दिन से बिजली गुल, लोग पैसे देकर चार्ज कर रहे मोबाइल

मुख्य कनवानी गांव की सड़क पर कई दुकानें हैं जहां मोबाइल चार्ज कराने के अलग-अलग रेट है. बेसिक मोबाइल 5 रुपये तो स्मार्टफोन 10 रुपये घंटे के हिसाब से चार्ज किए जाते हैं.

Anoop Padey | पीटीआई
Updated: September 12, 2018, 2:54 PM IST
दिल्ली से सटे इस गांव में 19 दिन से बिजली गुल, लोग पैसे देकर चार्ज कर रहे मोबाइल
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स- रॉयटर्स)
Anoop Padey | पीटीआई
Updated: September 12, 2018, 2:54 PM IST
राजधानी दिल्ली से महज कुछ दूर स्थित एक गांव ऐसा भी है, जहां मोबाइल चार्ज करने और पानी की बाल्टी भरने के लिए लोगों को 10 से 20 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. यहां के लोग कई ज़रूरतों के लिए गांव से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर जाने पर मजबूर हैं.

यह हाल है कनवानी पुश्तापुर का और यह गांव गाजियाबाद की रिहायशी कालोनी इंदिरापुरम से महज कुछ दूर स्थित है. यहां पिछले 19 दिन से बिजली नहीं आई है. यहां के लोगों को मोबाइल चार्ज करने के लिए 10 रुपये तो एक बाल्टी पानी के लिए 20 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. इसके अलावा बिजली नहीं आने से आसपास का कॉटन उद्योग भी पूरी तरह से ठप हो गया है.

यह इलाका हिंडन नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र, नोएडा नगर निगम और संसदीय क्षेत्र में आता है जबकि राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक यह गाजियाबाद में आता है.

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स्थानीय निवासी सुनील चौहान ने बताया, "आज के समय में बिजली के बिना 1 दिन भी रहना मुश्किल है. बावजूद इसके हम लोग पिछले 18 दिनों से बिना बिजली के रह रहे हैं." 48 वर्षीय सुनील ने बताया कि यहां लगभग 2400 परिवार रहते हैं जो पानी के लिए सबमर्सिबल पर आश्रित हैं. बिजली नहीं आने से सबमर्सिबल पंप बंद पड़ा है.

वहीं 45 वर्षीय सुनीता का कहना है कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कोई पड़ोसी भी मदद नहीं करता क्योंकि वह खुद पानी की कमी से जूझ रहा है. उनकी बेटी 10वी क्लास में है और उसके बोर्ड के एग्जाम आने वाले हैं लेकिन पानी और बिजली नहीं होने से वह कई दिनों से स्कूल नहीं जा पा रही है.

पानी की कमी का आलम यह है कि नहाने के लिए कुछ लोग अपने दफ्तर के वॉशरूम का इस्तेमाल कर रहे हैं. असली परेशानी तो यहां रहने वाली महिलाओं की है, जिनका ज्यादातर समय घर पर बीतता है. ऐसे में पानी और बिजली की कमी ने उनके रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है.
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सेना से रिटायर 52 वर्षीय रमेश सिंह ने बताया कि वह इंदिरापुरम के एक प्राइवेट सिक्योरिटी टीम में काम करते हैं, जहां वह बिना नहाए नहीं जा सकते हैं. पिछले दो हफ्ते से वह नहाने के लिए केवल 5-6 मग पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं. अपनी 6 महीने की पोती को गर्मी से बचाने और सुलाने के लिए उन्हें रातभर हाथ से पंखा झलना पड़ता है.

दसवीं क्लास में पढ़ने वाले अमित का कहना है स्मार्टफोन होने के बावजूद भी वह इंटरनेट नहीं यूज कर सकते. मोबाइल चार्ज करने के लिए आसपास के गांवों में दोस्तों के घर जाना पड़ता है.

कुछ लोगों ने बताया कि मुख्य कनवानी गांव की सड़क पर कई दुकानें हैं जहां मोबाइल चार्ज कराने के अलग-अलग रेट है. बेसिक मोबाइल 5 रुपये तो स्मार्टफोन 10 रुपये घंटे के हिसाब से चार्ज किए जाते हैं.

गांव वालों का कहना है कि उन्होंने गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद प्रशासन को अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाने के लिए लिखित ज्ञापन दिया था लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली. गांव वालों ने आरोप लगाया कि उनका गांव बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आता है इसलिए कोई उनकी मदद नहीं करता.
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