डीपीएस गाजियाबाद मामलाः 'सीबीएससी और प्रदेश सरकार दाखिल करे जवाबी हलफनामा'

उत्तर प्रदेश में स्कूलों का व्यवसायीकरण करने का आरोप लगाते हुए दायर एक याचिका पर कोर्ट ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है.

ETV UP/Uttarakhand
Updated: March 13, 2018, 8:51 PM IST
डीपीएस गाजियाबाद मामलाः 'सीबीएससी और प्रदेश सरकार दाखिल करे जवाबी हलफनामा'
उत्तर प्रदेश में स्कूलों का व्यवसायीकरण करने का आरोप लगाते हुए दायर एक याचिका पर कोर्ट ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है.
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Updated: March 13, 2018, 8:51 PM IST
यूपी के इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार और सीबीएससी को डीपीएस गाजियाबाद मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का मंगलवार को निर्देश दिया है. उत्तर प्रदेश में स्कूलों का व्यवसायीकरण करने का आरोप लगाते हुए दायर एक याचिका पर कोर्ट ने ये आदेश दिया है.

मुख्य न्यायाधीश डी. बी. भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ ने गाजियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया. यह जनहित याचिका इस एसोसिएशन के सदस्य नीरज भटनागर के जरिए दायर की गई.

इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि डीपीएस वसुंधरा, गाजियाबाद ने पिछले तीन सालों में हर साल फीस बढ़ाई, जबकि सीबीएससी के नियम हर साल फीस बढ़ाने से रोकते हैं.

याचिका में कहा गया कि जब भटनागर ने अनावश्यक रूप से फीस बढ़ाए जाने की शिकायत सीबीएससी से की तो उनकी बेटी को उस स्कूल से बाहर निकाल दिया गया. वह उस स्कूल में आठवीं कक्षा की विद्यार्थी थी.

याचिकाकर्ता का यह भी आरोप है कि, उस स्कूल को चला रहे ट्रस्ट ने फीस से हुई आय को अन्य ट्रस्टों को हस्तांतरित कर दिया जो सीबीएससी के नियमों का उल्लंघन है क्योंकि फीस से आय का उपयोग स्कूल के केवल रखरखाव के लिए किया जा सकता है. याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि, संबद्ध नियमों का उल्लंघन करने के लिए डीपीएस के खातों का अंकेक्षण कराया जाना चाहिए और विद्यार्थियों से वसूली गई अनाधिकृत फीस को कैपिटेशन फीस माना जाना चाहिए और जुर्माने के तौर पर इसे उस स्कूल से वसूला जाना चाहिए. इस तरह से वसूल की गई राशि को ऐसे विद्यार्थियों को वापस किया जाना चाहिए जो इस पर दावा करने के लिए आगे आते हैं.
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