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गाजीपुर में बढ़ रही है केले की खेती

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद के रेवतीपुर क्षेत्र के किसानों को केले की खेती काफी पंसद आ रही है। यही नहीं, बाजार में भी केले की बढ़ती मांग को देखकर किसान बड़े पैमाने पर केले की खेती करने का मन बना रहे हैं। कम लागत में अच्छी उपज और आमदनी को देखते हुए किसानों का रुझान केले की खेती की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा किसानों को इसको बेचने के लिए स्वयं बाजार भी नहीं जाना पड़ता, क्योंकि व्यापारी खुद ही यहां आकर केला खरीदते हैं, जिसको देखते हुए किसानों ने इन दिनों क्षेत्र में करीब 300 बीघा केले की खेती की है।
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद के रेवतीपुर क्षेत्र के किसानों को केले की खेती काफी पंसद आ रही है। यही नहीं, बाजार में भी केले की बढ़ती मांग को देखकर किसान बड़े पैमाने पर केले की खेती करने का मन बना रहे हैं। कम लागत में अच्छी उपज और आमदनी को देखते हुए किसानों का रुझान केले की खेती की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा किसानों को इसको बेचने के लिए स्वयं बाजार भी नहीं जाना पड़ता, क्योंकि व्यापारी खुद ही यहां आकर केला खरीदते हैं, जिसको देखते हुए किसानों ने इन दिनों क्षेत्र में करीब 300 बीघा केले की खेती की है।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद के रेवतीपुर क्षेत्र के किसानों को केले की खेती काफी पंसद आ रही है। यही नहीं, बाजार में भी केले की बढ़ती मांग को देखकर किसान बड़े पैमाने पर केले की खेती करने का मन बना रहे हैं। कम लागत में अच्छी उपज और आमदनी को देखते हुए किसानों का रुझान केले की खेती की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा किसानों को इसको बेचने के लिए स्वयं बाजार भी नहीं जाना पड़ता, क्योंकि व्यापारी खुद ही यहां आकर केला खरीदते हैं, जिसको देखते हुए किसानों ने इन दिनों क्षेत्र में करीब 300 बीघा केले की खेती की है।

  • IANS
  • Last Updated: January 27, 2014, 9:38 AM IST
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उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद के रेवतीपुर क्षेत्र के किसानों को केले की खेती काफी पंसद आ रही है। यही नहीं, बाजार में भी केले की बढ़ती मांग को देखकर किसान बड़े पैमाने पर केले की खेती करने का मन बना रहे हैं। कम लागत में अच्छी उपज और आमदनी को देखते हुए किसानों का रुझान केले की खेती की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा किसानों को इसको बेचने के लिए स्वयं बाजार भी नहीं जाना पड़ता, क्योंकि व्यापारी खुद ही यहां आकर केला खरीदते हैं, जिसको देखते हुए किसानों ने इन दिनों क्षेत्र में करीब 300 बीघा केले की खेती की है।

बताया जाता है कि किसानों ने बाराबंकी से टीशू प्रजाति का पौधा मंगाकर खेतों में लगाया है। इसके एक पौधे की कीमत 16 रुपये है। किसान रामअधार ने बताया कि पांच फीट की दूरी पर केला पौधा लगाया जाता है, जिसके हिसाब से एक बीघा में आठ से नौ सौ पौधे लगते हैं। रामअधार के मुताबिक, केले की खेती में प्रति बीघा 50 से 60 हजार रुपये का खर्च आता है।

पौधों की 20 बार सिंचाई की जाती है। वह बताते हैं कि वह प्रति पौधे के हिसाब से 400 ग्राम यूरिया, 250 ग्राम डीएपी, 500 ग्राम पोटाश का छिड़काव केले की खेती के लिए करते हैं। लगभग एक साल से 14 माह में पौधे से केले का उत्पादन शुरू हो जाता है। दो साल तक उपज लेने के बाद नया पौधा लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि एक पौधे से 30 किलो केला उपजता है। इस हिसाब से यह लागत का करीब तीन गुना, यानी प्रति बीघा दो लाख रुपये तक का मुनाफा देता है।



रामअधार बताते हैं कि उन्हें केला बेचने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता, क्योंकि व्यापारी खुद ही यहां आकर केला खरीदते हैं। वह कहते हैं कि अब उनकी अच्छी कमाई व कम लागत को देखकर गांव के अन्य किसान भी केला की खेती करने का मन बना रहे हैं।
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