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Ground Report: गाजीपुर में क्या विकास जीतेगा?

अफजाल अंसारी और मनोज सिन्हा (बाएं से) (File Photo)
अफजाल अंसारी और मनोज सिन्हा (बाएं से) (File Photo)

बीजेपी उम्मीदवार और केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा लगातार ये दावा कर रहे हैं कि पिछले पांच सालों में गाजीपुर के पहचान विकास के जरिए हुई थी. वहीं गठबंधन के उम्मीदवार अफजाल अंसारी स्थानीय मुद्दों से बचते नजर आए.

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पूर्वी उत्तर प्रदेश की गाजीपुर जिला. वाराणसी से करीब 70 किलोमीटर दूर इस जिले की पहचान कभी अफीम फैक्ट्री से की जाती थी, आज भी जब विकीपीडिया के पेज पर जब गाजीपुर की पहचान तलाशने की कोशिश करेंगे तो उसमें इसकी पहचान अफीम फैक्ट्री से ही बताई जाएगी. लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में यहां के हालात बदले हुए हैं. इस चुनाव में यहां विकास की बात हो रही है.

बीजेपी उम्मीदवार और केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा लगातार ये दावा कर रहे हैं कि पिछले पांच सालों में गाजीपुर के पहचान विकास के जरिए हुई थी. मुम्बई, दिल्ली, कटरा से चलने वाली ट्रेनों, और जल्द शुरू होने वाली हवाई सेवा के बहाने मनोज सिन्हा  हर मंच से लोगों के ये बता रहे हैं कि भारत के नक्शे पर गाजीपुर की पहचान बदल रही है और गाजीपुर एक विकसित जिले बनने की राह पर है.

दिन की शुरुआत में मनोज सिन्हा की पहली जनसभा मिरदादपुर में होती है. स्वागत में यादव, दलित, मुसलमान सभी हैं. ऐसे में मंच संभालते ही मनोज सिन्हा पिछले 5 सालों में गाजीपुर में हुए विकास की बात करते हैं. बाद में वो मोदी सरकार की महत्वाकांझी किसान कल्याण योजना और आयुष्मान योजना पर भी आते हैं. अपने भाषण के अंतिम पड़ाव में वो अपने विरोधी के अपराधी इतिहास के बहाने उस पर हमले करते हैं लेकिन साथ ही विकास की चुनौती भी देते हैं.



मनोज सिन्हा की अगली सभा मदारपुर में है. दोनों भाषणों में मुद्दे तो एक ही हैं लेकिन मंत्री जी का अंदाज बदला हुआ है. भोजपुरी भाषा सीधे गाजीपुर के लोगों को कनेक्ट करती है और वो इसे खूब जानते हैं. शायद यही कारण है कि बीएचयू के अध्यक्ष से लेकर भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री तक का सफर तय करने के बाद भी मनोज सिन्हा अपने लोगों के बीच भोजपुरी ही बोलते हैं. सभा खत्म होने से पहले मनोज सिन्हा लोगों से वोट की गारंटी लेना नहीं भूलते.
वहीं गठबंधन के उम्मीदवार अफजाल अंसारी स्थानीय मुद्दों से बचते नजर आए. देर शाम जब हम निरहु का पूरा में अपने चुनावी सभा में पहुंचे तो अफजाल अंसारी लगातार केन्द्र की मोदी सरकार पर हमला बोलते नजर आए. उन्होंने संचार मंत्रालय के बहाने मनोज सिन्हा पर हमला करने की कोशिश तो की  लेकिन इस हमले में कोई धार नजर नहीं आई. अफजाल अंसारी के पूरे भाषण विकास और स्थानीय मुद्दे गायब हैं. उनकी नजर मोदी पर हमले के बहाने गठबंधन के वोटों को इकठ्ठा रखने की है. अपने केन्द्रीय नेताओं की तरह अफजाल ने भी अभी से ईवीएम पर शक जताना शुरू कर दिया. गाजीपुर के चुनाव में सिर्फ एक ही स्थानीय मुद्दा है- विकास बनाम मोदी विरोध. ऐसे में लोगों के बीच में सवाल है कि क्या विकास जीतेगा?

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