6 महीने पहले पीएम मोदी के उस कार्यक्रम से लिखनी शुरू हुई राजभर की विदाई स्क्रिप्ट

News18Hindi
Updated: May 21, 2019, 10:14 AM IST
6 महीने पहले पीएम मोदी के उस कार्यक्रम से लिखनी शुरू हुई राजभर की विदाई स्क्रिप्ट
ओम प्रकाश राजभर

न्यूज18 से बातचीत में राजभर ने कहा कि उन्होंने मंत्री रहते लगातार पिछड़ों के अधिकार की बात उठाई. यही बात मुख्यमंत्री को नागवार गुजरी. उन्होंने कहा, "मैं पिछड़ा कल्याण वर्ग का मंत्री था. लिहाजा मेरा कर्तव्य था कि मैं उनकी बात उठाता.

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बीजेपी के लिए सिरदर्द बने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को योगी मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया है. राजभर की मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी की सिफारिश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को भले की हो, पर इसकी पूरी स्क्रिप्ट छह माह पहले ही लिखनी शुरू हो गई थी.

सूत्र बताते हैं कि बीते साल दिसंबर में गाजीपुर में महाराजा सुहेलदेव पर एक डाक टिकट जारी करने के लिए कार्यक्रम हुआ था. उसके मुख्य अतिथि पीएम नरेंद्र मोदी थे. कार्यक्रम में आमंत्रण मिलने के बाद मंत्री ओमप्रकाश राजभर नहीं पहुंचे. उसी दिन से इनकी विदाई की पटकथा लिखनी शुरू हो गई थी. हालांकि उन्होंने अपनी बर्खास्तगी के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने सही फैसला किया है.

न्यूज18 से बातचीत में राजभर ने कहा कि उन्होंने मंत्री रहते लगातार पिछड़ों के अधिकार की बात उठाई. यही बात मुख्यमंत्री को नागवार गुजरी. उन्होंने कहा, "मैं पिछड़ा कल्याण वर्ग का मंत्री था. लिहाजा मेरा कर्तव्य था कि मैं उनकी बात उठाता. मैंने पिछड़ों को छात्रवृत्ति की बात उठाई, लेकिन मुख्यमंत्री के पास समय नहीं था."

आपको बता दें कि ओम प्रकाश राजभर खुद को यूपी में राजभर समाज के बीच अकेले नेता के तौर पर खुद को पेश करते रहे. साथ में बीजेपी में रहते हुए उसे आंख भी दिखाते रहे. ऐसे में बीजेपी ने इस समाज के अपने नेताओं को भी तवज्जो देकर आगे लाना शुरू किया. अनिल राजभर को होमगार्ड राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया. घोसी से सांसद हरि नारायण राजभर को इस बार फिर से टिकट दिया. यही नहीं बलिया के रहने वाले आरएसएस कार्यकर्ता सकलदीप राजभर को राज्यसभा भेजा.

दरअसल राजभर पिछले तीन-चार महीने से बीजेपी के लिए सिरदर्द बने हुए थे. लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे पर सहमती न बनने के बाद 13 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था और बीजेपी के खिलाफ 39 सीटों पर प्रत्याशी भी उतार दिया. इसके बाद लगातार कह रहे थे कि मुख्यमंत्री उनके इस्तीफे को मंजूर नहीं कर रहे हैं. 19 मई को चुनाव खत्म होने के दूसरे दिन ही मुख्यमंत्री ने उनकी बर्खास्तगी की सिफारिश कर दी. साथ ही सुभासपा के 6 सदस्यों को भी हटा दिया गया है, जिन्हें निगमों में नियुक्ति दी गई थी.

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First published: May 21, 2019, 9:55 AM IST
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