तीसरी लहर से लड़ने को नोएडा जिम्स अब डॉक्टर-पैरामेडिकल स्टाफ को कर रहा तैयार, जानें सबकुछ

कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की चर्चाओं के चलते जिम्स नोएडा में सभी तैयारियां शुरु हो गई हैं. (पीटीआई फाइल फोटो)

जिम्स के साथ ही चाइल्ड पीजीआई (Child PGI) में भी खास इंतजाम किए गए हैं. जिला अस्पताल में भी आईसीयू और सामान्य बेड तैयार किए जा रहे हैं.

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    नोएडा. कोरोना (Corona) की तीसरी लहर की चर्चाओं के बीच अस्पतालों में भी तैयारी चल रही है. तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की बात कही जा रही है. इसी के चलते सरकारी अस्पतालों के बच्चा वार्ड को दुरुस्त किया जा रहा है. वहीं, आईसीयू (ICU) से लेकर डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को हर इमरजेंसी के लिए तैयार किया जा रहा है. वेंटिलेटर, ऑक्सीजन डिवाइस और ऑक्सीजन की किसी भी तरह से कोई कमी न हो इसके लिए हर कदम उठाया जा रहा है. नोएडा के गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) में भी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. जिम्स के साथ ही चाइल्ड पीजीआई (Child PGI) में भी खास इंतजाम किए गए हैं. जिला अस्पताल में भी आईसीयू और सामान्य बेड तैयार किए जा रहे हैं.

    जिम्स के निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना महामारी की पिछली दो लहरों में संस्थान में कोविड-19 के 4500 से ज्यादा मरीजों का इलाज किया गया. अब तीसरी लहर से भी सफलतापूर्वक लड़ने का प्रयास किया जा रहा है. तीसरी लहर के दौरान बच्चों को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने 50 बाल चिकित्सा आईसीयू बिस्तरों समेत 100 बिस्तरों का अलग से भी इंतजाम किया है.

    पीआईसीयू, वेंटिलेटर बेड, ऑक्सीजन डिवाइस, वेंटिलेटर, बीआईपीएपी, डिफाइब्रिलेटर, नेबुलाइजेशन, रिससिटेशन प्रोटोकॉल (एनआरपी), बेसिक लाइफ सपोर्ट, इंट्रावेनस थेरेपी, पीडियाट्रिक डोजेज के साथ न्यूबॉर्न कॉर्नर तैयार किए गए हैं.

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    संस्थान ने रियल टाइम पेडियाट्रिक स्किल लैब स्थापित करने का फैसला भी किया है. बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, पीपीई किट डोनिंग एंड डोफिंग, एसेप्सिस प्रोटोकॉल जैसे संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों के लिए अलग सेक्शन बनाया गया है.



    डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए वर्कशॉप
    तीसरी लहर में इलाज के दौरान किसी भी तरह की रुकावट न आए, बीमारी को समझने में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ का वक्त खराब न हो, इसके लिए इंटरएक्टिव मैननिकिन पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है. जहां वो तकनीकों का परीक्षण भी कर सकते हैं. कोविड और नॉन कोविड मरीजों के लिए विभिन्न मॉड्यूल तैयार किए गए हैं. बच्चों के इलाज से संबंधित वेंटिलेटर, सीपीएपी, एचएफएनसी, इंट्रावेनस लाइन, बीएलएस और एसीएलएस के संचालन का भी प्रशिक्षण दिया गया.

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