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कहानी पूरी फिल्मी है, कागजों में मर चुके हैं गोंडा के 82 साल के बुजुर्ग, जिंदा होने के लिए काट रहे दफ्तरों के चक्कर

कहानी पूरी फिल्मी है, कागजों में मर चुके हैं गोंडा के 82 साल के बुजुर्ग, जिंदा होने के लिए काट रहे दफ्तरों के चक्कर

गोंडा में सरकारी कागजो में हो चुकी है 82 साल के राम अभिलाख पांडे की मौत.

गोंडा में सरकारी कागजो में हो चुकी है 82 साल के राम अभिलाख पांडे की मौत.

Gonad News: राजस्व विभाग की लापरवाही से खतौनी में 82 साल के राम अभिलाख पांडे मौत हो चुकी है. हैरानी की बात यह है कि इन्हें मृतक बताकर इनकी लगभग 12 बीघे जमीन किसी दूसरे के नाम कर दी गई है. आराम करने की उम्र में अब अभिलाख पांडे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं.

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हाइलाइट्स

गोंडा के 82 साल की बुजुर्ग की कागजों में मौत, परिवार परेशान.
छह महीने से सरकारी दफ्तरों के काट रहे चक्कर.

गोंडा. जिंदा इंसान को मुर्दा घोषित कर उसकी जमीन हड़पने की कहानियां आपने फिल्मों में और किस्सों में देखी-सुनी होंगी, लेकिन असल जिंदगी में भी ऐसा होता है और इसका उदाहरण हाल ही में उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में देखने को मिला. यहां 82 साल के एक बुजुर्ग को ना सिर्फ कागजों में मार दिया गया है बल्कि उनकी सारी संपत्ति भी हड़प ली गई. अब 82 साल के राम अभिलाख पांडे नाम के बुजुर्ग पिछले छह महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं ताकि खुद को जीवित साबित कर सकें. आइए, आपको पूरा मामला बताते हैं…

राजस्व विभाग की लापरवाही से खतौनी में 82 साल के राम अभिलाख पांडे मौत हो चुकी है. हैरानी की बात यह है कि इन्हें मृतक बताकर इनकी लगभग 12 बीघे जमीन किसी दूसरे के नाम कर दी गई है. आराम करने की उम्र में अब अभिलाख पांडे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. पिछले 6 महीनों से राम अभिलाख व उनका परिवार न तो सुख से एक वक्त का निवाला खा पा रहा और न ही चैन से सो पा रहा है. परिवार की ​इस स्थिति का जिम्मेदार है सिस्टम, तहसीलदार और लेखपाल. राम अभिलाष जहां अभी रह रहे है, वह जमीन भी किसी और के नाम पर है.

कागजों में गलती सुधर जाने का इंतजार
तहसील सदर के दासियापुर गांव के रहने वाले राम अभिलाख को जैसे ही यह पता चला कि खतौनी में उन्हें मृतक दिखाकर किसी ओर के नाम जमीन कर दी गई है तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. वे और उनका पूरा परिवार इस बात से परेशान हो गया और ​सदर तहसीलदार से लेकर डीएम गोंडा तक इस लापरवाही की शिकायत की. उनका कहना था कि कागजों में इस गलती को सुधारा जाए और उन्हें अपना हक वापस दिलाया जाए.

कुछ हो गया तो क्या होगा…
तमाम कोशिशें करने के बाद भी सभी अधिकारियों के पटल से राम अभिलाख को निराशा ही हाथ लगी और देखते देखते 6 महीने बीत चुके हैं. अधिकारियों को इस मामले की सारी जानकारी है लेकिन वे इसकी गंभीरता को नहीं समझ पा रहे हैं. उधर, राम अभिलाख को यह भी डर सता रहा है कि वे उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके हैं, जहां कभी भी वे जीवन त्याग सकते हैं. यदि ऐसा होता है तो उनका परिवार सड़क पर आ जाएगा. फिलहाल विनोद सिंह, एसडीएम सदर के मुताबिक, इस मामले में जांच करके जल्द कार्रवाई की जाएगी.

Tags: Gonda news, Uttar pradesh news

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