ISIS के संदिग्ध आतंकी अबू यूसुफ की गिरफ्तारी ने बलरामपुर पुलिस पर उठाए सवाल, बिखरे पड़े थे सबूत मगर...
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ISIS के संदिग्ध आतंकी अबू यूसुफ की गिरफ्तारी ने बलरामपुर पुलिस पर उठाए सवाल, बिखरे पड़े थे सबूत मगर...
आईएसआईएस के संदिग्ध आतंकी अबू यूसुफ की गिरफ्तारी ने बलरामपुर पुलिस पर सवाल खड़े किए हैं.

आईएसआईएस (ISIS) का संदिग्ध आतंकी अबू यूसुफ (Suspected Terrorist Abu Yusuf) यूपी के बलरामपुर (Balrampur) का रहने वाला था. 3 साल से वह आतंक का सामान जुटा रहा था. लॉकडाउन में उसने गांव के कब्रिस्तान में बम ब्लास्ट कर टेस्ट भी किया था लेकिन बलरामपुर पुलिस और इंटेलिजेंस को खबर तक नहीं लगी.

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बलरामपुर. दिल्ली में आईएसआईएस (ISIS) के संदिग्ध आतंकी अबू यूसुफ उर्फ मुस्तकीम (Suspected Terrorist Abu Yusuf) की गिरफ्तारी ने यूपी के बलरामपुर (Balrampur) की स्थानीय अभिसूचना और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. 3 साल से एक गांव के एक कमरे में आतंक की इबारत लिख रहे अबू युसुफ उर्फ मुस्तकीम के कारनामों के बारे में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी. वो भी तब जब अप्रैल, 2020 में लॉकडाउन (Lockdown) के बीच उसने गांव के कब्रिस्तान में विस्फोट का ट्रायल करके अपने मंसूबो को साफ कर दिया था.

2 साल से आईबी लगी थी पीछे लेकिन लोकल पुलिस को खबर तक नहीं

इस विस्फोट की गूंज दूर तक सुनाई भी पड़ी थी लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के कानों तक नहीं पहुंची. उतरौला कोतवाली क्षेत्र के छोटे से गांव बढया भैंसाही में आतंक का जखीरा इकठ्ठा होता गया लेकिन इसकी भनक स्थानीय अभिसूचना और पुलिस नहीं लग सकी. यही नहीं संदिग्ध गतिविधियों को लेकर अबू यूसुफ उर्फ मुस्तकीम 2 वर्षो से इंटेलिजेंस ब्यूरो के रडार पर था लेकिन स्थानीय पुलिस, अभिसूचना इकाई और यूपी एटीएस को खबर तक नहीं लगी. ये किसी बड़ी चूक से कम नहीं है.



अयोध्या फैसले के बाद तो संदिग्ध लोगों की सूची भी बनाई थी, कहां गई?
उतरौला तहसील का यह इलाका काफी संवेदनशील माना जाता रहा है. अयोध्या के राम मन्दिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के पहले पुलिस और स्थानीय अभिसूचना ने हर गांव में जाकर संदिग्ध लोगों की सूची बनाई थी. यदि ऐसी सूची बनाए जाने के बाद भी अबू यूसुफ उर्फ मुस्तकीम के संदिग्ध कारनामें पकड़ में नहीं आए तो यह स्थानीय खुफिया तंत्र की बड़ी विफलता ही मानी जाएगी.

पूरे गांव में बिखरे पड़े थे संदिग्ध होने के सबूत

2010 में सऊदी अरब से लौटने के बाद कट्टरपंथ की राह पकड़ चुके अबु यूसुफ उर्फ मुस्तकीम के परिवार से पूरे गांव के लोगों ने दूरी बना ली थी. अबू यूसुफ उर्फ मुस्तकीम ने अपने घर के ठीक सामने स्थित मस्जिद के जीर्णोद्धार को लेकर पूरे गांव का विरोध किया था, जिसके चलते उस मस्जिद का जीर्णोद्धार आज तक नहीं हो सका.

साथी शमशाद अब भी फरार

गांव के लगभग 60 परिवारों में मात्र दो परिवारों से ही मुस्तकीम के परिवार की नजदीकी थी, इनमें से एक मुस्तकीम का ननिहाल था, दूसरा शमशाद का परिवार. अबू यूसुफ के गिरफ्तारी के बाद से शमशाद भी लापता है और उसका मोबाइल नम्बर भी बन्द है. पुलिस और खुफिया तंत्र की असफलता इस मामले में भी दिखती है.

नए बीट सिस्टम पर उठे सवाल

एसपी देवरंजन वर्मा ने नया बीट सिस्टम बनाते हुए उसमें बीट पुलिस ऑफिसर की तैनाती की है, जो गांव-गांव जाकर संदिग्ध गतिविधियों का आंकलन करेंगे. बावजूद इसके अबू यूसुफ के मामले की भनक लगा पाने में सम्पूर्ण पुलिस तन्त्र विफल हुआ है.

परिवार का पासपोर्ट भी बनाया

2011 में जब अबू यूसुफ उर्फ मुस्तकीम ने अपनी पत्नी और 6 माह के बेटे समेत 5 लोगों का पासपोर्ट बनवाया, तब भी उसकी जांच की आंच यूसुफ तक नहीं पहुंच सकी. स्थानीय पुलिस और खुफिया तंन्त्र अबू युसुफ की गिरफ्तारी के बाद से अपनी असफलता को लेकर सदमे में है. एसपी देवरंजन वर्मा मिलने की बात तो दूर मोबाइल पर कॉल उठाने से भी परहेज कर रहे हैं.
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