देश को पहला गोल्ड दिलाने वाले बजरंग पूनिया ने गोंडा में सीखे कुश्ती के दांवपेंच

बजरंग नंदिनीनगर महाविद्यालय में बीए तृतीय वर्ष के छात्र हैं. उन्होंने यहां के कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र में ही पहलवानी के दांवपेंच सीखे हैं.

Devmani Tripathi | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 20, 2018, 2:43 PM IST
देश को पहला गोल्ड दिलाने वाले बजरंग पूनिया ने गोंडा में सीखे कुश्ती के दांवपेंच
बजरंग पूनिया (File photo)
Devmani Tripathi | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 20, 2018, 2:43 PM IST
इंडोनेशिया के जकार्ता में हो रहे एशियाई गेम्स 2018 के पहले दिन रविवार को हरियाणा के बजरंग पूनिया ने 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती प्रतियोगिता में देश को पहला गोल्ड दिलाया. उनकी इस उपलब्धि पर यूपी के गोंडा जिले में भी जश्न का माहौल है. दरअसल, बजरंग जिले के नंदिनीनगर महाविद्यालय के छात्र हैं. बजरंग ने कुश्ती का दांवपेंच इसी कॉलेज में पढ़ते हुए सीखा है. उनकी इस उपलब्धि में साथी पहलवान, कोच और टीचर्स सभी अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं.

बजरंग नंदिनीनगर महाविद्यालय में बीए तृतीय वर्ष के छात्र हैं. उन्होंने यहां के कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र में ही पहलवानी के दांवपेंच सीखे. आज उनकी इस उपलब्धि से यहां प्रशिक्षण ले रहे अन्य पहलवानों का सीना भी चौड़ा हो गया. कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र के कोच प्रेमचन्द्र यादव ने कहा कि बजरंग पुनिया पर हमेशा भरोसा रहा. उम्मीद थी कि वह गोल्ड जीतेगा. जब भी कोई नेशनल गेम यहां होता था तो वह मौजूद रहता था. बीमारी की हालत में भी वह मौका नहीं छोड़ता था.

वहीं साथी पहलवान राहुल ने कहा कि बज्रण की इस उपलब्धि से देश के साथ ही इस प्रशिक्षण केंद्र का भी नाम रौशन किया है. अब हमें भी लग रहा है कि उनकी तरह देश का नाम रौशन कर सकते हैं.

उन्‍होंने 18वें एशियाई खेलों के पहले दिन शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल स्पर्धा के फाइनल में जापान के दाइजी ताकातानी को 11-8 से मात देते हुए गोल्‍ड मेडल अपने नाम किया. जबकि अपनी गोल्‍ड मेडल बाउट से पहले बजरंग ने उज्बेकिस्तान के खासानोव सिरोजिद्दीन को 13-3, ताजिकिस्तान के फेजिएव अब्दुलकोसिम को 12-2 और मंगोलिया के एन बाटमागनाई बाचुल्लु को 10-0 से हराया.

भारतीय स्टार पहलवान बजरंग पूनिया ने पिछले एशियन गेम्स (इंचियोन- 2014) में सिल्‍वर मेडल जीता था, लेकिन इस बार युवा पहलवान ने अपने मेडल का रंग बदल दिया.
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