बलरामपुर: इंडो-नेपाल बॉर्डर पर सड़क निर्माण के लिए दी जाएगी 55 हजार पेड़ों की बलि

बलरामपुर में इंडो-नेपाल सीमा

नेपाल सीमा पर 125 किलोमीटर की लंबाई में सोहेलवा वन्यजीव अभयारण्य है. सीमा के समानांतर सड़क के लिए लगभग 55 हजार पेड़ों को काटना पड़ेगा.

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बलरामपुर. सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण भारत-नेपाल सीमा (Indo-Nepal Border) पर बनने वाली सड़क के निर्माण (Road Construction) में सोहेलवा जंगल के पेड़ (Trees) बाधा बन रहे हैं. सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क के लिए जो सर्वेक्षण हुआ है उसमें सोहलवा जंगल के करीब 55 हजार पेडों को काटना पड़ेगा. जंगल में कम से कम पेड़ों को काटना पड़े इसको लेकर स्टेट बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

सीमा के समानांतर सड़क बनाने की योजना

भारत-नेपाल का सीमावर्ती क्षेत्र सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है. सीमा पर बढ़ती संवेदनशीलता को देखते हुए वर्ष 2002 में भारत-नेपाल की खुली सीमा पर एसएसबी की तैनाती की गई. सरकार ने सीमा के समानांतर सड़क बनाने के लिए एक योजना की शुरुआत की. इस सड़क के बनने से न सिर्फ सीमावर्ती इलाकों में विकास के नए मापदंड स्थापित होंगे, बल्कि एसएसबी के मूवमेंट को सहूलियत होगी. आम लोगों को भी आवागमन में काफी सुविधाएं मुहैया हो सकेंगी.

स्थानीय विधायक ने कही ये बात

बलरामपुर जिले में नेपाल सीमा से सटे गैसड़ी विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी विधायक शैलेश कुमार सिंह शैलू का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्र विकास की दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा है. थारू जनजातियां भी इसी क्षेत्र में निवास करती हैं. उन्होंने कहा किसी सीमा के समानांतर चौड़ी सड़क के निर्माण से देश के इस अत्यंत पिछड़े क्षेत्र में विकास की गंगा बहेगी.

55 हजार पेड़ों को काटना पड़ेगा

नेपाल सीमा पर 125 किलोमीटर की लंबाई में सोहेलवा वन्यजीव अभयारण्य है. सीमा के समानांतर सड़क के लिए लगभग 55 हजार पेड़ों को काटना पड़ेगा. पेड़ों के काटने की अनुमति देने में वन विभाग के भी पसीने छूट रहे हैं. केंद्रीय एजेंसियां इस पर मंथन कर रही हैं. स्टेट बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ के नए दिशानिर्देश में नो मैंस लैंड के करीब से सड़क बनाने की योजना पर विचार हो रहा है, ताकि कम से कम पेड़ों का नुकसान हो. सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी रजनीश कुमार मित्तल ने बताया कि नो मैंस लैंड से सटाकर सड़क बनाए जाने के प्रस्ताव को सर्वेक्षण की अनुमति मिली है. वन विभाग पीडब्ल्यूडी और एसएसबी की संयुक्त टीम बनाकर इसका सर्वेक्षण कराए जाने की योजना है. उन्होंने कहा इस सड़क निर्माण योजना में प्रयास होगा कि जंगल के पेड़ों का कम से कम नुकसान हो.

इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत-नेपाल सीमा सड़क बनने से सीमावर्ती क्षेत्र का तेजी से विकास होगा, लेकिन यह भी सच है कि जंगल में बड़े पैमाने पर पेड़ों के कटने से दुर्लभ वन्यजीवों और अमूल्य वनस्पतियों के लिए भी खतरा पैदा हो जाएगा. बहरहाल स्टेट बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ के नए दिशानिर्देश में होने वाले सर्वेक्षण में दोनों ही पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्य योजना बनाई जा रही है.

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