बलरामपुर: नहरों की सिल्ट सफाई के नाम पर सिंचाई विभाग में घोटाला, मंत्री ने किए सवाल तो DM ने शुरू की जांच
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बलरामपुर: नहरों की सिल्ट सफाई के नाम पर सिंचाई विभाग में घोटाला, मंत्री ने किए सवाल तो DM ने शुरू की जांच
बलरामपुर में नहरों की सफाई के नाम पर घोटाला सामने आने से सिंचाई विभाग में हड़कंप मचा हुआ है.

बलरामपुर (Balrampur) डीएम कृष्ण करुणेश का कहना है कि जब तक नहरों की सफाई में निकाले गए सिल्ट की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक यह सत्यापन सही नहीं माना जाएगा. डीएम ने कहा कि जांच की जा रही है. यदि कोई गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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बलरामपुर. बाढ़ से जूझते उत्तर प्रदेश के बलरामपुर (Balrampur) में नहरों और जलाशयों की सिल्ट सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये घोटाला किया गया है. नहरों और जलाशयों से साफ की गई सिल्ट कहां गायब हो गई? इसको लेकर डीएम ने सिंचाई विभाग के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है.

सफाई के लिए ढाई करोड़ का बजट

भारत-नेपाल सीमा पर हार्ड एरिया में 7 प्राकृतिक जलाशयों के पानी से ही खेतों की सिंचाई की जाती है. इसके लिये जलाशय से तमाम नहरें निकाली गई हैं. जिनकी कुल लम्बाई लगभग 108 किलोमीटर है. हर साल इन नहरों में सिल्ट जमा हो जाती है, जिसकी सफाई चित्तौड़गढ़ बांध निर्माण खण्ड द्वारा कराई जाती है. इस बार भी रबी फसल के समय नहरों की सिल्ट सफाई के लिये लगभग ढाई करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था.



बीजेपी विधायक ने की थी सफाई न करने की शिकायत
गैंसड़ी के बीजेपी विधायक शैलेश कुमार सिंह शैलू ने प्रदेश के जलशक्ति मंत्री डॉ. महेन्द्र सिंह को पत्र लिखकर सिल्ट सफाई न किये जाने की शिकायत की थी. गैंसड़ी विधायक ने वर्ष 2017 से 2020 तक सिल्ट सफाई की जांच किए जाने का भी आग्रह किया था.

मंत्री ने मांगा सिल्ट का हिसाब 

इस पूरे मामले में घोटाला तब उजागर हुआ, जब जलशक्ति मंत्री डॉ. महेन्द्र सिंह ने डीएम को पत्र लिखकर नहरों से सिल्ट सफाई द्वारा निकाली गई सिल्ट के डिस्पोजल एवं अतरिक्त सिल्ट की नियमानुसार नीलामी किये जाने का निर्देश दे दिया ताकि सिल्ट के डिस्पोजल के साथ-साथ अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त हो सके.

डीएम ने कराई जांच तो निकला फर्जीवाड़ा

जलशक्ति मंत्री डा. महेन्द्र सिंह के निर्देश के बाद डीएम कृष्ण करुणेश ने चित्तौड़गढ़ बांध निर्माण खण्ड के अधिशाषी अभियन्ता द्वारा गठित टीम से सिल्ट सफाई का भौतिक सत्यापन कराया. लेकिन इस सत्यापन रिपोर्ट में सिल्ट के सम्बन्ध में कोई रिपोर्ट नही उपलब्ध कराई गई. नहरों से साफ की गई सिल्ट कहां डम्प की गयी? या उसका डिस्पोजल कहां किया गया? इस सम्बन्ध में कोई सूचना उपलब्ध नही कराई गई.

सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता से मांगी रिपोर्ट

अब डीएम ने अधिशाषी अभियन्ता चित्तौड़गढ़ बांध निर्माण खण्ड को इस चेतावनी के साथ लिखे पत्र में सिल्ट के सम्बन्ध में तत्काल आख्या मांगी है कि यदि तत्काल आख्या उपलब्ध नहीं कराई गई तो सिल्ट को शून्य मानते हुए कार्रवाई अमल में लायी जायेगी. आशंका व्यक्त की जा रही है कि बिना सिल्ट सफाई कराए ही करोड़ों रुपये डकार लिए गए इस मामले का खुलासा होने के बाद से सिंचाई विभाग में हड़कम्प मचा हुया है.

दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई: डीएम

डीएम कृष्ण करुणेश का कहना है कि जब तक नहरों की सफाई में निकाले गए सिल्ट की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक यह सत्यापन सही नहीं माना जाएगा. डीएम ने कहा कि जांच की जा रही है. यदि कोई गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
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