गोंडाः लेखपाल को रिश्वत देते कैमरे में कैद हुए खनन माफिया शिवा सिंह

जी हां, न्यूज18 आपको एक ऐसा वीडियो दिखाने जा रहा है जिसको देखकर सरकार, भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के साथ ही अवैध खनन रोकने के बड़े-बड़े दावे करने वालों की आंखें खुली रह जाएंगी.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 27, 2018, 4:42 PM IST
News18 Uttar Pradesh
Updated: July 27, 2018, 4:42 PM IST
गोंडा में अवैध बालू खनन के जुर्म में एनजीटी के 212 करोड़ रुपए के जुर्माने के बाद भी जिले में अवैध खनन का खेल जारी है. जी हां, न्यूज18 आपको एक ऐसा वीडियो दिखाने जा रहा है जिसको देखकर सरकार, भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के साथ ही अवैध खनन रोकने के बड़े-बड़े दावे करने वालों की आंखें खुली रह जाएंगी.

गौर से देखिए इस वीडियो को जिसमें खनन माफिया शिवा सिंह राजस्व लेखपाल मलकेश्वर यादव को बकायदा रिश्वत दे रहा है और चकबंदी लेखपाल उस पर सहमति जता रहा है. अब रिश्वत देने की वजह भी जान लीजिए. दअरसल खनन क्षेत्र की गलत पैमाइश और तरबगंज तहसील क्षेत्र के तुलसीपुर माझा गांव के गाटा संख्या 2274 के बदले दूसरे गाटा संख्या को दिखाने के लिए रिश्वत देने की बात कही.

बस फिर क्या था लेखपाल ने गलत रिपोर्ट लगाने के लिए खनन माफिया से पैसे ले लिए और साथ में बैठे चबन्दी लेखपाल अमरेंद्र पांडेय ने बाकायदा गलत रिपोर्ट लगाने की सहमति भी जताई. गाटा संख्या 2274 पर लगभग 3960 घनमीटर बालू खनन हुआ और हेराफेरी करते हुए लेखपाल और खनन माफिया ने सरकार को 13 लाख रुपए से अधिक के राजस्व का चूना लगा दिया.

अब सवाल यह उठता है की एनजीटी ने अवैध खनन पर सख्ती दिखाते हुए खनन माफियाओं पर 212 करोड़ का जुर्माना कर, प्रदेश सरकार को जुर्माना वसूलकर पर्यावरण संरक्षण पर खर्च करने की बात कही है. ऐसे में जिन पर जुर्माना वसूलने और खनन माफियाओं को चिह्नित करने का जिम्मा है वही लोग ऐसा कर रहे हैं तो फिर एनजीटी के आदेश का क्या होगा? वीडियो से स्पष्ट होता है कि खनन माफियाओं को एनजीटी के जुर्माने का कोई डर नहीं है.

रिपोर्ट - देवमणि त्रिपाठी

ये भी पढ़ें - 

चार महीने में बंटीं महज 45 फीसदी किताबें, अब 4 दिन में कैसे पूरा होगा दावा
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर