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Balrampur News: मदरसा फर्जीवाड़े पर चला शासन का चाबुक, सभी फर्जी शिक्षकों का रोका गया वेतन

बलरामपुर में मदरसे में भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है.
बलरामपुर में मदरसे में भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है.

Balrampur News: जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पवन सिंह ने बताया कि मदरसा दारुल उलूम अतीकिया में अनियमितता को लेकर शासन से जांच गठित की गई है. साथ ही मदरसे के सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है.

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बलरामपुर. उत्तर प्रदेश में बलरामपुर के मदरसे (Madarsa) में फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति किए जाने के मामले में उत्तर प्रदेश शासन ने बड़ी कार्यवाही की है. शासन ने मदरसे में की गई नियुक्तियों को अवैध माना है और वित्तीय अनियमितता के दृष्टिगत अवैध रूप से नियुक्त सभी शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के वेतन को रोक दिया है. शासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक की अध्यक्षता में दो सदस्यीय जांच कमेटी भी गठित की है जो 5 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का आरोप लगा है तुलसीपुर स्थित मदरसा दारुल उलूम अतीकिया पर. न्यूज़-18 ने इस मदरसे में 15 फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की था. आरोप है कि अनुदान मिलने के बाद 15 फर्जी शिक्षकों के नियुक्त कर उन्हें वेतन भी दे दिया गया जबकि अनुदान पत्रावली में शामिल सूची के सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं.

27 फरवरी 2013 को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने मदरसा दारुल उलूम अतीकिया को अनुदान सूची पर लिए जाने हेतु एक प्रस्ताव रजिस्ट्रार उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ को भेजा था. उस समय इस मदरसे में कुल 15 शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी तैनात थे. इनमें सहायक अध्यापक आलिया के 4 शिक्षक, सहायक अध्यापक फोकानिया के 3 शिक्षक और सहायक अध्यापक तहतानिया के 5 शिक्षक शामिल थे. जबकि एक लिपिक और एक अनुचर भी मदरसे में नियुक्त थे.




पत्रावली में शिक्षक और कर्मचारियों की सूची को ही बदल दिया

अनुदान के लिए भेजी गई पत्रावली में मदरसे में कार्यरत 15 शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सूची भी रजिस्ट्रार उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद को भेजी गई थी. जिनकी नियुक्ति मदरसे में 2005 से लेकर 2013 के मध्य हुई थी. शासन को भेजी गई अनुदान पत्रावली के आधार पर 23 जुलाई 2015 को शासनादेश के जरिए मदरसा दारुल उलूम अतीकिया तुलसीपुर को अनुदान पर लिया गया. अनुदान मिलते ही मदरसे का प्रबंधतंन्त्र, विभागीय मिलीभगत करके रातों-रात अनुदान के लिए भेजी गई पत्रावली में शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सूची को ही बदल दिया और नए शिक्षकों और कर्मचारियों की तैनाती कर दी. आनन-फानन में इनका वेतन निर्गत कर उसका अनुमोदन भी करा लिया गया.

पत्रावली पहले भेज दी और शिक्षकों की नियुक्ति बाद में

मदरसे के पीड़ित शिक्षक आबिद अली और हम्माद अली खान नईमी ने बताया कि मदरसे के प्रबंधतंत्र में बड़ा फर्जीवाड़ा करते हुए अनुदान की पत्रावली पहले भेज दी और शिक्षकों की नियुक्ति बाद में की. आरोप है कि फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति के लिए प्रबंधतंत्र ने फर्जी बैठक की और फर्जी सेलेक्शन कमेटी का गठन कर फर्जी कूरियर कम्पनी से नियुक्त पत्र भेज दिया था. ऐसे शिक्षक की भी नियुक्ति कर दी गई जो रेगुलर छात्र था. फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र भी लगा दिया गया. आरोप यह भी है कि तथ्यों को छिपाकर अनुमोदन कराया गया और वेतन भुगतान कर दिया गया.

कमिश्नर ने भी की थी शिकायत

इस फर्जीवाड़े को लेकर कमिश्नर देवीपाटन मंडल ने भी शासन को कडी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था. उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव शिवाकांत द्विवेदी ने 15 फरवरी 2021 को निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण को जारी अपने पत्र में मदरसा दारुल उलूम अतीकिया में अनियमित रूप से नियुक्त शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के वेतन भुगतान को रोके जाने का आदेश दिया है. उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कल्याण के प्रमुख सचिव बी एल मीणा ने मदरसे के संस्थापक सचिव महबूबुर्ररहमान के शिकायती पत्र का हवाला देते हुये 15 फरवरी 2021 को आदेश जारी किया. और शासकीय धन के गबन एवं राजस्व क्षति की जांच के लिए अल्पसंख्यक कल्याण की निदेशक सी इंदुमती की अध्यक्षता में दो सदस्य कमेटी गठित की है. जिसमें देवीपाटन मंडल के मंडलीय अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अमरनाथ पांडे को सदस्य बनाया गया है.

शासन की इस कार्यवाही से विभाग में हड़कंप मच गया है. जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पवन सिंह ने बताया कि मदरसा दारुल उलूम अतीकिया में अनियमितता के शिकायत पर शासन से जांच गठित की गई है. उन्होंने बताया कि मदरसे के सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के वेतन को रोक दिया गया है.
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