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Gorakhpur: गोरखपुर के आश्रय पालना में पहुंची पहली लावारिस बच्ची, जानिए क्यों बजा अलार्म

Gorakhpur News: गोरखपुर सीएमओ डॉ आशुतोष दुबे ने बताया आश्रय पालना में पहली लावारिस बच्ची पाई गई है. बच्ची को कौन छोड़ क ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट: अभिषेक सिंह

गोरखपुर: मासूमों को फेंके नहीं हमें दें, ये शब्द सुनने में जितने अच्छे लग रहे हैं, उतने ही अच्छे इसके मकसद हैं. जिसके तहत गोरखपुर जिला अस्पताल के पालना आश्रय में पहली बार एक लावारिस बच्ची आई है. बीती रात 9 बजे करीब कोइ अज्ञातशक्स यहा एक बच्ची को छोड़ गया. बच्ची को पालना आश्रय में रखते ही अलार्म बज गया. इसके बाद जिला अस्पताल की मेडिकल टीम ने बच्ची को पालने से निकालकर अस्पताल में एडमिट किया. फिलहाल मासूम का इलाज चल रहा है. बच्ची को इस पालना आश्रय में कौन छोड़ गया यह किसी को पता नहीं चला.

एक संस्था जो राजस्थान के बाद यूपी के गोरखपुर में पालना आश्रय स्थल के नाम से आई है. इसी संस्था द्वारा आश्रय पालना की शुरुआत की गई है. मां भगवती विकास संस्थान द्वारा “आश्रय पालना की शुरुआत 2022 अक्टूबर में गोरखपुर महिला जिला अस्पताल में की गई थी. पालना के जरिए वह लावारिस बच्चे जिनके परिजन उन्हें पालना नहीं चाहते ऐसे बच्चों को आश्रय पालना में छोड़कर चले जाएं. जिसके बाद उन बच्चों की देखरेख संस्था और अस्पताल की जिम्मेदारी होगी.

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राजस्थान से हुई थी आश्रय पालना की शुरुआत
भारत में सबसे पहले राजस्थान में आश्रय पालना की शुरुआत की गई थी. जहां अब तक राजस्थान में संस्था ने करीब 91 नवजात शिशु को सुरक्षित परित्याग किया है. जिसमें करीब 86 मासूमों की जान बचाई गई है. इस पालना को पूरी तरीके से हाईटेक बनाया गया है. बच्चा छोड़कर जाने वाले परिजनों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी. जैसे ही पालना में परिजन बच्चों को रखते हैं. 5 मिनट बाद अलार्म बजेगा जिसके बाद गठित टीम आकर बच्चे को तुरंत ले जाएगी. इस पालन आश्रय का पहले गोरखपुर सीएमओ से भूमि पूजन कराया गया था और फिर गोरखपुर सदर सांसद रवि किशन ने इसका उदघाटन किया था.

पहचान गोपनीय रखी गई- सीएमओ डॉ आशुतोष दुबे
गोरखपुर सीएमओ डॉ आशुतोष दुबे ने बताया आश्रय पालना में पहली लावारिस बच्ची पाई गई है. बच्ची को कौन छोड़ कर गया इसकी पहचान गोपनीय रखी गई है. अब बच्ची का इलाज जिला अस्पताल में ही गठित टीम द्वारा किया जा रहा है. जल्द ही इस पालना की शुरुआत गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में भी कर दिया जाएगा. 6 महीने पहले इसकी शुरुआत गोरखपुर में की गई थी की जो माताएं लोक लज्जा के भय से या किसी कारण वश अपने गर्भ से उत्पन्न हुए मासूम को नदी नाले के किनारे या झाड़ियों में फेक देती थी वह मासूम पशु पक्षियों के आहार बन जाते थे.

अब ऐसा कत्तई करने की जरूरत नही है अगर कोई दिक्कत हो अपने नवजात शिशु को लेकर तो आश्रय पालना में नवजात को छोड़ दे. आपकी पहचान भी उजागर नही होंगी और नवजात को एक अच्छा भविष्य भी मिल जायेगा उस मां के जज्बे को सलाम है. जिसने अपने नवजात को यहां रखने की हिम्मत जुटाई और इसका भविष्य संवारा मेडिकल टीम नवजात की संपूर्ण जांच के उपरांत प्रशासन के सहयोग से गोद लेने के इच्छुक परिजनों को गोद लेने की प्रक्रिया से भी जोड़ने का काम करेगी.

Tags: District Hospital, Gorakhpur city news, Gorakhpur news, Ravi Kishan, UP news

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