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गोरखपुर के आर्मी स्कूल में सिविलियंस छात्रों की भर्ती पर रोक, 70 बच्चों को स्कूल बदलने का नोटिस
Gorakhpur News in Hindi

News18 Uttar Pradesh
Updated: February 28, 2020, 9:32 AM IST
गोरखपुर के आर्मी स्कूल में सिविलियंस छात्रों की भर्ती पर रोक, 70 बच्चों को स्कूल बदलने का नोटिस
गोरखपुर के आर्मी पब्लिक स्कूल में सिविलियंस के बच्चों के प्रवेश पर रोक लग गई है.

गोरखपुर (Gorakhpur) के आर्मी स्कूल में नए सत्र से सिविलियन्स के बच्चों का प्रवेश नहीं होगा. स्कूल में पहले से पढ़ रहे 70 सिविलियंस छात्रों को भी नोटिस भेजा गया है. उनसे कहा गया है कि शैक्षिक सत्र 2020-21 से दूसरे विद्यालय में दाखिला ले लें.

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गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर (Gorakhpur) के आर्मी स्कूल (Army School) में पढ़ने वाले सिविलियन्स (Civilians) के बच्चों को आर्मी स्कूल वेलफेयर सोसाइटी (Army School Welfare Society) ने झटका दिया है. आर्मी स्कूल में नए सत्र से सिविलियन्स के बच्चों का प्रवेश नहीं होगा. स्कूल में पहले से पढ़ रहे 70 सिविलियंस छात्रों को भी नोटिस भेजा गया है. उनसे कहा गया है कि शैक्षिक सत्र 2020-21 से दूसरे विद्यालय में दाखिला ले लें.

देशभर में मौजूद करीब 130 आर्मी पब्लिक स्कूल आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी के नियमावली के आधार पर संचालित किए जाते हैं. सोसाइटी की गाइडलाइन के अनुसार अब तक स्कूल में 90:10 अनुपात में आर्मी और सिविलियंस के बच्चों को एडमिशन दिया जाता है. विशेष परिस्थिति में अनुपात बढ़ाने और घटाने का भी प्रावधान रहा है. लेकिन आर्मी स्टाफ के बच्चों के प्रवेश के लिए आने वाले आवेदन पत्रों की संख्या में बढ़ोतरी और सीबीएसई बोर्ड की ओर से हर कक्षा में 40 से अधिक बच्चों के प्रवेश पर रोक लगाने की वजह से आर्मी वेलफेयर सोसाइटी ने ये कदम उठाए हैं. आर्मी पब्लिक स्कूल में इस बार कक्षा एक से लेकर कक्षा 12 तक (कक्षा-11 छोड़कर) कुल 2100 विद्यार्थियों के एडमिशन लिए जाने हैं. आर्मी पब्लिक स्कूल के आदेश से अभिभावकों में आक्रोश है.

कक्षा 2 की छात्रा को भी स्कूल बदलने का नोटिस
गोरखपुर के प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय रोड के झारखंडी कालोनी के रहने वाले अंजनी कुमार सिंह की बिटिया आराध्या सिंह कक्षा 2 की छात्रा है. क्लास 1 में उसने फर्स्ट स्थान प्राप्त किया था. अंजनी बताते हैं कि उनकी बेटी ने स्कूल की ओर से आयोजित ओलम्पियाड में भी दो पदक जीते हैं. उन्होंने बताया कि आर्मी वेलफेयर सोसाइटी के इस फरमान के कारण उनकी बच्ची का सपना टूटने लगा है. वे बताते हैं कि इस बार भी वो सभी परीक्षा में प्रथम स्थान पर चल रही है. बचपन से ही उसका आर्मी में जाने का सपना है.



आर्मी में नौकरी करने वालों के बच्चों का नहीं ले पा रहे एडमिशन: प्रिंसिपल
इधर, प्रिंसिपल विशाल त्रिपाठी का कहना है कि आर्मी वेलफेयर सोसाइटी की ओर से सर्कुलर जारी होने के कारण ऐसा निर्णय लिया गया है. उन्होंने बताया कि पूरे देश में इसे लागू किया गया है. उनके यहां 2200 बच्चे पढ़ते हैं. उनका उद्देश्य किसी भी सिविलियन के बच्चों के साथ ज्यादती करना नहीं है. लेकिन, हम आर्मी में नौकरी करने वाले लोगों के बच्चों का ही एडमिशन नहीं ले पा रहे हैं. ऐसे में ये निर्णय लेना पड़ा है. सीटें खाली रहने पर सिविलियन्स के बच्चों का प्रवेश भी लिया जाएगा. उन्होंने बताया कि अक्टूबर में ही इन बच्चों और उनके परिजनों को दूसरे स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए नोटिस दे दिया गया है.

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First published: February 28, 2020, 9:07 AM IST
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स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 09 (08:00 AM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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