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7 बार टूटा देवी मां को अंग्रेजों की बलि चढ़ाने वाले बंधू सिंह की फांसी का फंदा

गोरखपुर जिले के चौरीचौरा के पास माता तरकुलहां देवी का मंदिर है. शारदीय नवरात्र की नवमी के दिन यहां हर साल भक्तों की भारी भीड़ होती है. यहां मां को अंग्रेजों की बलि चढ़ाने वाले क्रांतिकारी शहीद बंधू सिंह की किंवदंती बहुत प्रचलित है.

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गोरखपुर जिले के चौरीचौरा के पास मां तरकुलहां देवी का मंदिर है. शारदीय नवरात्र की नवमीं के दिन यहां हर साल भक्तों की भारी भीड़ होती है. यहां मां को अंग्रेजों की बलि चढ़ाने वाले क्रांतिकारी शहीद बंधू सिंह की किंवदंती बहुत प्रचलित है. इस बार भी नवमी को भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने तरकुलहां देवी मंदिर पर पहुंचकर पूजा अर्चना की और मां से अपनी मुरादें मांगी. इसके बाद भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया.

यूं तो तरकुलहां देवी मंदिर पर रोजाना भक्तों की भीड़ लगी रहती है लेकिन नवरात्र में यहां भक्तों की भीड़ का अदभुत नजारा देखने को मिलता है. लोगों का ऐसा मानना है कि यहां पर जो लोग सच्चे मन से मन्नतें मांगते हैं उनकी मुरादें जरूर पूरी होती हैं.

गोरखपुर से तकरीबन 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चौरीचौरा इलाके में मां तरकुलहां देवी का प्राचीन मंदिर है. तरकुलहां देवी का इतिहास शहीद बंधू सिंह से जुड़ा है. बताया जाता है कि प्राचीन समय में इस इलाके में जंगल हुआ करता था. 1857 के महान क्रांतिकारी शहीद बंधू सिंह मां तरकुलहां देवी के भक्त थे और उन्होंने देश को अंग्रेजों से मुक्त कराने के लिए सशस्त्र संघर्ष छेड़ रखा था.



मां तरकुलहां देवी को चढ़ाते थे अंग्रेजों की बलि
बंधू सिंह अंग्रेजों को पकड़ लेते थे और मां तरकुलहां देवी को अंग्रेजों की बलि चढ़ाते थे. इससे अंग्रेजी हुकूमत ने शहीद बन्धू सिंह को पकड़कर उन्हें फांसी पर चढ़ाने की कोशिशें कीं, लेकिन जब-जब फांसी दी जाती तब-तब फांसी का फंदा टूट जाता. ऐसा सात बार हुआ और सातों बार बंधू सिंह की फांसी का फंदा टूट गया.

इस दृश्य को देखकर अंग्रेज हैरान हो गए जब आठवीं बार फांसी दी गई तो बंधू सिंह ने मां तरकुलहा से प्रार्थना की कि हे मां अब मुझे इस जीवन से मुक्त कर दे और माता ने उन्हें इस जीवन से मुक्त कर दिया और वे फांसी के फंदे पर चढ़ गए. जैसे ही गोरखपुर के अलीनगर में उनको फांसी दी गई, चौरीचौरा के तरकुलहां देवी मंदिर पर तरकुल की मुंडी कटकर गिर गई और खून की धारा बहने लगी. यह चमत्कार दूर-दूर तक फैल गया. लोग यहां पर बकरे की बलि चढ़ाते हैं. देश के कोने-कोने से लोग मां तरकुलहां देवी का दर्शन करने आते हैं.

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