चर्चा का केंद्र बना स्वास्थ्य विभाग का ये अधिकारी, कैंसर पीड़ित को भी नहीं बख्शा

बल्ड कैंसर से पीड़ित लैब टेक्नीशियन महेंद्र मल्ल ने बताया कि मैंने कई बार अपने बकाया भुगतान को लेकर प्रमुख अधीक्षक (SIC) डॉक्टर राज कुमार गुप्ता से मिला, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की.

NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: July 13, 2019, 9:51 AM IST
चर्चा का केंद्र बना स्वास्थ्य विभाग का ये अधिकारी, कैंसर पीड़ित को भी नहीं बख्शा
चर्चा का केंद्र बना 'स्वास्थ्य विभाग' का ये अधिकारी
NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: July 13, 2019, 9:51 AM IST
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए अधिकारियों को निर्देश देते रहते हैं. लेकिन उनके ही गृह जनपद गोरखपुर में तैनात स्वास्थ्य विभाग का एक अधिकारी सरकार के छवि को धूमिल करने में लगा हुआ है. इसपर पहले भी कई आरोप लग चुके हैं.

गोरखपुर में तैनात वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन महेंद्र मल्ल बल्ड कैंसर जैसे गंभीर बीमारी से जिंदगी और मौत से जूझ रहे है. उनकी पत्नी भी दिव्यांग (विकलांग) हैं. उनके इलाज पर हजारों रुपये का खर्च आ रहा है. गोरखपुर जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक (SIC) डॉक्टर राजकुमार गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने महेंद्र मल्ल का 'चिकित्सा प्रतिपूर्ति' (मेडिकल अलाउंस) भुगतान रोक लिया.



विकलांग पत्नी ने लगाई गुहार

जब पीड़ित की पत्नी पुष्पा मल्ल ने इसकी गुहार शासन स्तर के अधिकारियों से लगाई, तो 4 महीने बाद महेंद्र मल्ल का चिकित्सा प्रतिपूर्ति भुगतान किया गया. वहीं पीड़ित कर्मचारी को एरियर की बकाया धनराशि 60 हजार के भुगतान के लिए चक्कर लगाना पड़ रहा है. बल्ड कैंसर से पीड़ित महेंद्र मल्ल के इसकी शिकायत करने पर निदेशक स्वास्थ्य गोरखपुर ने अपनी जांच में 'चिकित्सा प्रतिपूर्ति' भुगतान के मामले में डॉ. राजकुमार गुप्ता को दोषी पाया. फिलहाल अभी जांच जारी है. मल्ल ने बताया कि अभी भी उनके इलाज में हुए खर्च और एरियर भुगतान डॉक्टर राजकुमार गुप्ता ने रोक रखा है.

कर्मचारियों में खौफ

बल्ड कैंसर से पीड़ित महेंद्र मल्ल ने बताया कि मैंने कई बार अपने बकाया भुगतान को लेकर प्रमुख अधीक्षक (SIC) डॉक्टर राजकुमार गुप्ता से मिला, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की. मल्ल बताते हैं कि अपर निदेशक स्वास्थ्य गोरखपुर ने अपनी जांच में चिकित्सा प्रतिपूर्ति भुगतान के मामले में डॉक्टर गुप्ता पर लापरवाही का दोषी पाया गया था. फिलहाल अभी जांच जारी है. जिला अस्पताल गोरखपुर में तैनात लैब टेक्नीशियन ने बताया कि यहां पर ऐसे कई कर्मचारी है जो डॉक्टर राजकुमार गुप्ता के उत्पीड़न से तंग आ चुके है. लेकिन नौकरी के आगे कोई भी कर्मचारी इस अधिकारी के खिलाफ आवाज नहीं उठाता.

सारे आरोप निराधार: SIC
Loading...

मल्ल ने बताया कि गोरखपुर के प्रमुख अधीक्षक (SIC) डॉ. राजकुमार गुप्ता का पूरा सरकारी कार्य वहां तैनात फार्मासिस्ट हेमंत कुमार गुप्ता देखते हैं. इस मामले में न्यूज़18 ने डॉक्टर गुप्ता से बातचीत तो उन्होंने कहा कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है. प्रमुख अधीक्षक कहते हैं कि कुछ बकाया भुगतान अभी बाकी है. मैंने जल्द से जल्द भुगतान करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने सारे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि मऊ में मेरी तैनाती 6 महीने की थी. इस दौरान मेरा प्रमोशन अपर निदेशक के रूप में लखनऊ हो गया था जिसके कारण मेरा तबादला हुआ था.

पहले भी लग चुके है आरोप

बताया जाता है कि वर्ष 2016 में मऊ जिले में डॉक्टर राजकुमार गुप्ता मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात थे. उस वक्त महज 2 महीने के कार्यकाल के दौरान एलटी भर्ती में धांधली के कारण सरकार ने कार्रवाई करते हुए उन्हें उनके पद से हटा दिया. दरअसल 'चर्तुथ श्रेणी' और 'एलटी भर्ती परीक्षा' का सरकार द्वारा भर्ती का नोटिफिकेशन निकाला गया था. डाॅ गुप्ता पर आरोप हैं कि उन्होंने परीक्षा के दौरान अंकों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की थी. मामला सामने आने के बाद जांच आज फाइलों में दबकर धूल फांक रही है.

ये भी पढ़ें:

यूपी में 26 IAS अधिकारियों के तबादले, हटाए गए अमेठी के डीएम राम मनोहर मिश्रा

साक्षी मिश्रा का पति 9 दिसंबर को दूसरी लड़की से करने वाला था शादी
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...