Lockdown: मकान मालिक ने घर से निकाला तो हैदराबाद से पैदल ही गोरखपुर आ गया शख्स

चन्द्रमणि विश्वकर्मा का कहना है कि 20 अप्रैल को कोरोना का केस बढ़ने पर मकान मालिक ने कमरा खाली करा दिया था.
चन्द्रमणि विश्वकर्मा का कहना है कि 20 अप्रैल को कोरोना का केस बढ़ने पर मकान मालिक ने कमरा खाली करा दिया था.

पीड़ित मजदूर बड़हलगंज (Badhalganj) के टांडा गांव का रहने वाला है. उसका नाम चन्द्रमणि विश्वकर्मा है.

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गोरखपुर. कोरोना वायरस (Corona virus) की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन (Lockdown) है. इसके चलते देश के अधिकांश कल-कारखाने बंद हैं. ऐसे में मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है. उनके खाने के लाले पड़ गए हैं. यही वजह है कि पूरे देश से प्रवासी मजदूर जैसे-तैसे अपने-अपने गृह राज्य लौट रहे हैं. इसी बीच गोरखपुर (Gorakhpur) में एक श्रमिक मजदूर को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. कहा जा रहा है कि पीड़ित मजदूर हैदराबाद में कारपेंटर का काम करता था. वह जिस फर्म में काम करता था उसका मालिकन ने उसे लॉकडाउन की वजह से सैलरी नहीं दी. वहीं, मकान मालिक ने भी उसे कमरे से निकाल दिया. वह पांच दिन तक इधर-उधर धक्के खाता रहा. इसके बाद उसने घर जाने का निश्चय किया और पैदल ही गोरखपुर के लिए निकल पड़ा.

हिन्दुस्तान के मुताबिक, पीड़ित मजदूर बड़हलगंज (Badhalganj) के टांडा गांव का रहने वाला है. उसका नाम चन्द्रमणि विश्वकर्मा है. उसने बताया कि सूनी सड़क पर वह नौ दिन तक लगातार पैदल भागता रहा. रास्ते में बहुत सी जगहों पर पुलिस ने भी रोकने के लिए दौड़ाया. आखिरकार 1100 किलोमीटर की यात्रा करने के बाद वह जबलपुर पहुंच गया. इस दौरान उसने पुलिस से बचने के लिए कई जगहों पर रास्ता भी चेंज किया. जबलपुर पहुंचने के बाद उसे सांस में सांस आई.

ट्रक वाला ने डेढ़ हजार रुपये में प्रयागराज तक छोड़ने के लिए राजी हो गया
जबलपुर में उसने एक ट्रक वाला से प्रयागराज के लिए बात किया. ट्रक वाला ने डेढ़ हजार रुपये में प्रयागराज तक छोड़ने के लिए राजी हो गया. उसने प्रयागराज से पहले ही ट्रक से उतार दिया. यहां से वह पैदल ही बस स्टेशन पहुंचा. फिर, बस अड्डे से रोडवेज की बस ने गोरखपुर पहुंचाया.यहां पहुंचने पर उसे एक दिन बड़हलगंज के एक स्कूल में क्वारंटीन रहना पड़ा. इसके बाद उसे होम क्वारंटीन में भेज दिया गया.
मकान मालिक ने कमरा खाली करा दिया था


चन्द्रमणि विश्वकर्मा का कहना है कि 20 अप्रैल को कोरोना का केस बढ़ने पर मकान मालिक ने कमरा खाली करा दिया था. इस दौरान कमरे की तलाश में उसे दो रातें खुले में गुजारनी पड़ीं. उसकी परेशानी की जानकारी हैदराबाद में ही रहने वाले सहजनवा के दूसरे युवक को हुई तो उसने उन्हें अपने पास बुला लिया. करीब 25 किलोमीटर पैदल चलकर दोनों उसके कमरे पर पहुंचे. इसकी जानकारी जब उसके मकान मालिक को हुई तो उसने भी कमरा खाली करवा लिया. ऐसे में वह 25 अप्रैल को पैदल ही घर के लिए निकल पड़ा और जैसे-तैसे कष्ट सहते हुए गोरखपुर पहुंच गया.

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