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ये है CM योगी आदित्यनाथ के सपनों का मॉडल कॉलेज, जहां प्रिसिंपल भी साफ करते हैं टॉयलेट

Ram Gopal Dwivedi | News18 Uttar Pradesh
Updated: January 22, 2020, 9:21 AM IST
ये है CM योगी आदित्यनाथ के सपनों का मॉडल कॉलेज, जहां प्रिसिंपल भी साफ करते हैं टॉयलेट
महाराणा प्रताप डिग्री कॉलेज. (फाइल फोटो)

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने गोरखपुर शहर से पिपराइच जाने वाले रोड पर जंगल धूसड़ इलाके में 'महाराणा प्रताप डिग्री कॉलेज' की नींव रखी थी.

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गोरखपुर. सांसद रहते हुए योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने एक ऐसे कॉलेज का सपना देखा था, जहां ऊंच-नीच का कोई भेदभाव न हो. शिक्षा में लोगों को गुणवत्ता मिले और वह कॉलेज वैचारिक लड़ाई को लड़ सके. यानि कि शिक्षण संस्थानों के बीच एक मॉडल के रूप में तैयार हो सके. वर्ष 2005 में योगी आदित्यनाथ ने इस कॉलेज की नींव रखी और इसकी कमान डॉक्टर प्रदीप राव को दी.

बड़े सपनों के साथ साल 2005 में योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर शहर से पिपराइच जाने वाले रोड पर जंगल धूसड़ इलाके में "महाराणा प्रताप डिग्री कॉलेज" की नींव रखी. पहला सपना यह था कि यहां पर कोई ऊंच-नीच का भेदभाव न हो इसलिए इस कॉलेज में स्वीपर पद ही नहीं रखा गया. अब टॉयलेट की साफ साफाई की जिम्मेदारी कॉलेज में काम करने वाले दूसरे लोगों पर आ गई. प्रिसिंपल प्रदीप राव ने इसकी कमान संभालते हुए हर शनिवार को दोपहर 12.10 मिनट से 1 बजकर 10 मिनट तक टीचर और स्टूडेंट के साथ मिलकर टॉयलेट साफ करने लगे. यह सफाई अभियान तब तक नहीं रुकता है, जबतक टॉयलेट चमकने नहीं लगता.

कॉलेज में स्वीपर का पद नहीं
कॉलेज के प्रिसिंपल डॉ प्रदीप राव कहते हैं कि कॉलेज की स्थापना से पहले ही महराज जी (योगी आदित्यनाथ) ने ये निर्देश दिया था कि यहां पर किसी स्वीपर को तैनात नहीं किया जाएगा. सब काम यहां मिलजुलकर करेंगे, क्योंकि समाज स्वीपर को हीन भवना देखता है और जब हम लोग खुद टॉयलेट की सफाई करेंगे तो समाज के अन्य लोग भी इससे सीख लेंगे.

Maharana Pratap Degree college gorakhpur
प्रिसिपल और टीचर्स के साथ छात्र खुद साफ़ करते हैं टॉयलेट


गोरखपुर के पंडित दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय से संबद्ध महाराणा प्रताप डिग्री कॉलेज का संचालन "महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद" करता है. शिक्षा परिषद से संबध जितने भी कॉलेज हैं, उनमें सबसे कम फोर्थ क्लास के कर्मचारी महाराणा प्रताप डिग्री कॉलेज में हैं. कॉलेज में एक भी सफाई कर्मचारी न होने के बाद भी इस कॉलेज ने स्वच्छता के क्षेत्र में मिसाल कायम की है

स्वच्छता रैंकिंग में शामिल है कॉलेजएमएचआरडी ने साल 2018 में देश के शिक्षण संस्थानों में स्वच्छता रैंकिंग के लिए सर्वे का काम शुरू कराया, जिसमें देशभर के छह हजार शिक्षण संस्थानों ने प्रतिभाग किया और उसमें से 300 संस्थानों को MHRD ने स्वच्छता के मापदंड पर खरा घोषित किया. इसमें महाराणा प्रताप डिग्री कॉलेज जंगल धूषण को 176वीं रैंक मिली थी, जिसके बाद कॉलेज के लोगों ने अपनी रैंकिंग सुधारने के प्रयास तेज कर दिया. साल 2019 में MHRD देश की कुल 69 संस्थानों की स्वच्छता रैकिंग को जारी किया. इस रैंकिंग में लम्बी छलांग लगाते हुए महाराणा प्रताप डिग्री कॉलेज ने 39वीं रैंक हासिल की. ‘महाराणा प्रताप स्नातकोत्तर कॉलेज’ स्वच्छता रैंकिंग में जगह बनाने वाला पूर्वी यूपी का इकलौता कॉलेज है.

गांव को भी गोद लिया है कॉलेज
कॉलेज अपने सामाजित जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए 21 गांवों को जागरूक करने का जिम्मा उठाया है. जहां पर समय समय पर जागरूकता अभियान से लेकर साफ सफाई अभियान तक चलाया जाता है. वहीं कॉलेज से सटे एक गांव मंझरिया को गोद ले लिया है. जिसके बाद से गांव की तकदीर और तस्वीर दोनों ही बदल गयी. इस गांव में प्रतिदिन कॉलेज के छात्र या अध्यापक जाकर वहां पर बच्चों को पढ़ाते हैं, गांव को कॉलेज के लोगों की मदद से ओडीएफ घोषित कर दिया गया.
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गरीब छात्रों के स्वाभिमान का भी रखा जाता है ख्याल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब कॉलेज की स्थापना कर रहे थे तभी उन्‍होंने गरीब छात्रों के स्वाभीमान का भी ख्याल रखा था. योगी आदित्यनाथ ने कॉलेज के प्रिसिंपल को यह निर्देश दिया है कि अगर कोई गरीब छात्र पढ़ने आता है और उसके पास फीस के पैसे नहीं हैं तो उस छात्र को चुपके से प्रिंसिपल अपने पास से पैसा दे देंगे और छात्र जाकर कैश काउंटर पर अपनी पूरी फीस जमा कर देगा, जिसके बाद प्रिसिंपल जाकर योगी आदित्यनाथ से वो पैसा ले लेंगे. यानि कि छात्र की मदद भी हो गयी और किसी को पता ही नहीं चला कि वो छात्र गरीब है. पैसा देने के पीछे का तर्क ये है कि अगर फीस माफ की जायेगी तो सबको पता चल जायेगा और अगर चुपके से गरीब छात्र को पैसा दिया जायेगा तो सिर्फ तीन लोगों तक ये बात रहेगी. जिससे गरीब छात्र के स्वाभिमान को कहीं कोई चोट नहीं पहुंचेगी.

लाइब्रेरी में मौजूद है सभी किताबें
योगी आदित्यनाथ ने लाइब्रेरी को लेकर जो सपना देखा था वो उसे इस कॉलेज में पूरा करते हैं. इस कॉलेज में पढ़ने वाले किसी भी छात्र को अगर किसी भी किताब की जरूरत होती है और वो किताब लाइब्रेरी में नहीं है तो उसे सिर्फ वहां से एक स्लिप लेनी होती है कि ये किताब यहां नहीं है और फिर वो छात्र जाकर उस किताब को खरीद लेगा और बिल कॉलेज के नाम से बनवा लेगा. इसका भुगतान कॉलेज कर देगा. छात्र किताब पढ़ने के बाद उसे वापस लाइब्रेरी में रख देगा यानि कि किताब के बिना छात्र के समय का बिलकुल भी नुकसान नहीं होगा.

शिक्षकों की भी लगती है क्लास
शिक्षा की गुणवत्ता को बरकार रखने के लिए यहां पर शिक्षकों की भी क्लास लगती है और उन्हे सबसे भाषा का ज्ञान कराया जाता है. हिन्दी और अंग्रेजी पढ़ाई जाती है, शिक्षकों की हर तीन महीने में एक वर्कशाप होती है. साथ ही साल के अंत में दस दिन का एक वर्कशाप आयोजित किया जाता है. इतना ही नहीं हर महीने शिक्षक और प्रिसिंपल बैठकर शिक्षा की गुणवत्ता पर चर्चा करते हैं. इतना ही नहीं प्रत्येक शिक्षक को पांच विद्यार्थियों को गोद लेना अनिवार्य है. जिससे कमजोर छात्र को भी आगे बढ़ाया जा सके.

Maharana Pratap Degree College gorakhpur
साफ-सफाई का रखा जाता है विशेष ध्यान


कॉलेज का सत्र 16 जुलाई से शुरू होकर 30 जनवरी तक खत्म हो जाता है. हर महीने का पाठ्यक्रम योजना बनाई जाती है जिसे ऑनलाइन किया जाता है. कॉलेज की वेबसाइट पर शिक्षक ब्लॉक होता है, जिससे छात्रों को फायदा हो सके. छात्रों का हर महीने टेस्ट लिया जाता है. साथ ही परीक्षा शुरू होने से पहले ही एक प्री इग्जामनेशन होता है. सप्ताह में एक दिन छात्रों को क्लास भी लेना होता है.

प्रत्येक छात्र की प्रोग्रेस रिपोर्ट बनती है
कॉलेज में पढ़ने वाले प्रत्येक छात्र की प्रोग्रेस रिपोर्ट बनती है जिसे अभिभावक अपने घर पर बैठकर ऑनलाइन देख सकता है. और ये करने वाला ये उत्तर प्रदेश का इकलौता डिग्री कॉलेज है. साल 2005 में स्थापित महाराणा प्रताप डिग्री कॉलेज में वर्ष 2012 से ऑनलाइन प्रवेश होने लगे थे. साल 2010 से यहां की लाइब्रेरी ऑनलाइन है. यहां पर कुछ 2548 छात्र पढ़ते हैं जिन्हे 65 शिक्षक पढ़ाते हैं.

एडमिशन के नियम भी सख्त
इस कॉलेज में एडमिशन प्रवेश समीति ही लेती है, जिसमें सबसे पहले छात्रों की एक कमेटी साक्षत्कार लेती है फिर वो वहां से शिक्षकों की कमेटी के पास भेजती है और फिर वहां से प्रिंसिपल के पास एडमिशन के लिए जाता है. अगर किसी भी एडमिशन को छात्रों की कमेटी रिजक्ट कर देती है तो प्रिसिंपल सीधे उसका एडमिशन नहीं कर सकते हैं, बल्कि उन्हे एक फिर से आग्रह करना होगा छात्रों की कमेटी से कि एक बार फिर विचार कर लें अगर फिर भी छात्रों की कमेटी उसे रिजेक्ट कर देती है तो उसका एडमिशन वहां नहीं होता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो सपना देखा था कि एक शिक्षण संस्थानों में एक मॉडल शिक्षण संस्थान बनाया जाए, तो उस सपने ये महाराणा प्रताप डिग्री कॉलेज जंगल धूषण पूरा करता हुआ दिख रहा है.

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First published: January 22, 2020, 8:49 AM IST
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