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संत रविदास जयंती 2020: गोरखपुर में CM योगी और वाराणसी में आज मत्था टेकेंगी प्रियंका गांधी
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Updated: February 9, 2020, 9:34 AM IST
संत रविदास जयंती 2020: गोरखपुर में CM योगी और वाराणसी में आज मत्था टेकेंगी प्रियंका गांधी
गोरखपुर में CM योगी और वाराणसी में प्रियंका गांधी टेकेंगी मत्था (file photo)

प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) जनवरी में ही वाराणसी का दौरा किया था. इस दौरान वह संत रविदास मंदिर, श्री मठ और काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर पूजन और आशीर्वाद लिया था.

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  • Last Updated: February 9, 2020, 9:34 AM IST
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गोरखपुर. संत शिरोमणि रविदासजी की 643वीं जयंती के मौके पर रविवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) गोरखपुर में दोपहर बाद 2 बजे रविदास मंदिर जाकर पूजा अर्चना करेंगे. वहीं, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) उनकी जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर (वाराणसी) में मत्था टेक कर आर्शीवाद लेंगी. बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी की बहुत दिनों से इच्छा थी कि वह संत शिरोमणि गुरु रविदास की जन्मस्थली सीर गांव में उनके जयंती पर श्रद्धालुओं के साथ दर्शन करके मत्था टेकें.

बता दें अभी जनवरी महीने में ही प्रियंका गांधी ने वाराणसी का दौरा किया था. इस दौरान सीएए प्रदर्शनकारियों से मुलाकात के अलावा प्रियंका ने अपने 5 घंटे के वाराणसी दौरे में तीन प्रमुख मंदिरों संत रविदास मंदिर, श्री मठ और काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर पूजन और आशीर्वाद लिया था. इसकी शुरुआत उन्होंने भैंसासुर घाट पर स्थित संत रविदास मंदिर से की. वाराणसी पहुंचने के तत्काल बाद प्रियंका राजघाट/भैंसासुर घाट पर बने संत रविदास मंदिर पहुंचीं. उन्होंने वहां सबसे पहले तो उप प्रधानमंत्री और दलितों के बड़े नेता रहे जगजीवन राम की मूर्ति पर माल्यार्पण किया. इसके बाद दूसरी मंजिल पर संत रविदास की स्थापित मूर्ति की पूजा अर्चना की.

संत रविदास का जन्म
वैसे तो संत रविदास के जन्म की प्रामाणिक तिथि को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं, लेकिन अधिकतर विद्वान सन् 1398 में माघ शुक्ल पूर्णिमा को उनकी जन्मतिथि मानते हैं. कुछ विद्वान सन् 1388 को उनका जन्‍म वर्ष मानते हैं. हालांकि, हर साल माघ पूर्णिमा को संत रविदास की जयंती मनाई जाती है.



माघ मास की पूर्णिमा को जब रविदासजी ने जन्म लिया वह रविवार का दिन था, जिसके कारण इनका नाम रविदास रखा गया. रविदास चर्मकार कुल में पैदा हुए थे. इस कारण आजीविका के लिए भी इन्होंने अपने पैतृक कार्य में ही मन लगाया. कहा जाता है कि वह जूते इतनी इतनी लगन और मेहनत से बनाते मानो स्वयं ईश्वर के लिए बना रहे हों.

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First published: February 9, 2020, 9:00 AM IST
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