Lockdown के मोर्चे पर सीएम योगी, गोरखनाथ मंदिर के इतिहास में पहली बार नहीं हुआ कन्या पूजन
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Lockdown के मोर्चे पर सीएम योगी, गोरखनाथ मंदिर के इतिहास में पहली बार नहीं हुआ कन्या पूजन
गोरखनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी बाबा कमलनाथ खुद कन्याओं के घर गये और वहीं पर उनका पूजन किया गया.

चैत्र और शारदीय नवरात्रि में खुद गोरक्षपीठाधीश्वर और सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) कन्याओं का पूजन करते रहे हैं. 101 कन्याओं के साथ बटुकों का भी पूजन गोरक्षनाथ मंदिर में होता रहा है. मंदिर परम्परा के अनुसार फिर गरीबों को भी भोजन कराया जाता है. पर इस बार मानव सेवा का ध्यान रखते हुए कन्या पूजन नहीं आयोजित किया गया.

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गोरखपुर. गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Mandir) के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब यहां कन्या पूजन (Kanya Poojan) का कार्यक्रम नहीं हुआ हो. मां दुर्गा इस मंदिर की कुल देवी हैं, इसलिए इनका यहां पर विशेष स्थान है. एक तो नवरात्रि, दूसरी तरफ कुल देवी, पर इस बार परम्परा पर कोरोना (COVID-19) ने ब्रेक लगा दिया. मंदिर के मुख्य पुजारी योगी कमलनाथ ने गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की अनुपस्थिति में नवरात्रि का पूजन-पाठ किया. सीएम योगी के निर्देश पर मंदिर में कन्या पूजन का कार्यक्रम को भी निरस्त कर दिया गया. इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरक्षनाथ मंदिर नहीं आये.

वैसे समाज को संदेश देने के लिए भी इस बार कन्या पूजन का कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया. मंदिर प्रबंधन के सचिव द्वारिका तिवारी ने बताया कि इस कन्या पूजन के लिए गोरक्षनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी बाबा कमलनाथ मंदिर के पुरोहित के साथ खुद कन्याओं के घर गए और वहीं पर उनका पूजन किया गया. बाबा कमलनाथ ने कन्याओं को टीका लगाया. इसके पहले गोरक्षनाथ मंदिर में पुरोहित ने हवन का अनुष्ठान पूर्ण कराया.

आपको बता दें कि चैत्र और शारदीय नवरात्रि में खुद गोरक्षपीठाधीश्वर और सीएम योगी आदित्यनाथ कन्याओं का पूजन करते रहे हैं. 101 कन्याओं के साथ बटुकों का भी पूजन गोरक्षनाथ मंदिर में होता रहा है. मंदिर परम्परा के अनुसार फिर गरीबों को भी भोजन कराया जाता है. पर इस बार मानव सेवा का ध्यान रखते हुए कन्या पूजन नहीं आयोजित किया गया.



मंदिर का है आपदा के दौरान समाज के लिए खड़े रहने का इतिहास



वैसे गोरखनाथ मंदिर का इतिहास रहा है कि जब-जब देश में कोई आपदा आई है, इसके महंत हमेशा आगे रहे हैं. चाहे वो महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज हों या फिर महंत अवैद्यनाथ जी महराज या फिर मौजूदा महंथ योगी आदित्यनाथ. जिनके कंधे पर इस वक्त यूपी के 23 करोड़ जनता का भार है. एक-एक जान कीमती है और उसे बचाने के लिए उन्होने पूरी ताकत झोंक दी है. नौ दिन नवरात्रि में कठिन वत्र के बीच लगातार काम कर कोरोना की महामारी से निपटने के इंतजाम के साथ साथ गरीबों को खाना, पैसा दिलाने में जुटे रहे.

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