लाइव टीवी

पूर्वांचल के सबसे बड़े शिक्षाविद् हैं सीएम योगी आदित्यनाथ, जानिए क्यों

News18 Uttar Pradesh
Updated: December 10, 2019, 12:32 PM IST
पूर्वांचल के सबसे बड़े शिक्षाविद् हैं सीएम योगी आदित्यनाथ, जानिए क्यों
पूर्वांचल के सबसे बड़े शिक्षाविद् हैं सीएम योगी आदित्यनाथ (file photo)

वनटांगिया गांव में मौजूद प्राइमरी स्कूल, 2008 से यहां पर शिक्षा परिषद अपने खर्चे पर स्कूल चला रहा है. जब वहां पर ये स्कूल खुला था तब वनटांगिया लोगों को स्कूल तो दूर मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिलती थी.

  • Share this:
गोरखपुर. गोरखपुर (Gorakhpur) के गोरक्षनाथ पीठ की जब बात होती थी तो उग्र हिन्दुत्व का चेहरा ही सामने आता था. लेकिन ये पीठ जनजागरण के हर वो काम को करती रही है. जिससे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को लाभ मिल सके. उन्ही कामों में से एक है शिक्षाविद् के रूप में महंतों का काम करना. 1932 में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ ने महाराणा शिक्षा परिषद की स्थपना की, उसे ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ ने आगे बढ़ाया और मौजूदा पीठाधीश्वर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने उस सपने को परवान दिया. बता दें कि योगी आदित्यनाथ आज पूर्वांचल के सबसे बड़े शैक्षणिक संगठन को चला रहे हैं, जिसमें 50 हजार से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं.

1932 में हुई थी महाराणा शिक्षा परिषद की स्थापना

1932 में दोनों महापुरुषों के सपनों को मुख्यमंत्री योगी आदित्नाथ परवान चढ़ा रहे है. एक स्कूल से शुरू हुआ महाराणा शिक्षा परिषद आज 48 शिक्षण संस्थाओं का संचालन कर रहा है. इस संस्था द्वारा संचालित विद्यालयों में आज 50 हजार से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. 10 हजार के करीब शिक्षक और कर्मचारी इस संस्था के अन्दर काम कर रहे हैं और ये संस्था हर साल करीब एक लाख लोगों तक नि:शुल्क मेडिकल कैंप की सुविधा पहुंच रही है.

महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद


सीएम योगी का मिलता है मार्ग दर्शन

इस संस्था को चलाने के लिए गोरखपुर के 100 प्रतिष्ठित लोग जुड़े हुए हैं. महाराणा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष के रूप में जौनपुर विवि के पूर्व कुलपति प्रो यूपी सिंह बतौर अध्यक्ष इसका कामकाज देख रहे हैं. इस संस्था से जुड़ी हुई सारी शिक्षण संस्थान स्वायत्त हैं. वो नये प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं. उन्हे समय समय पर गोरक्षपीठ से मार्ग दर्शन मिलता रहता है. गोरक्षपीठ द्वारा संचालित महाराणा शिक्षा परिषद की खासियत ये है कि वो उन इलाकों पर अधिक फोकस करते हैं, जहां पर गरीबी अधिक है. जहां शिक्षा की ज्योति नहीं पहुंची है इसका एक ज्वलंत उदाहरण है.

वनटांगिया गांव के बच्चों तक पहुंची शिक्षावनटांगिया गांव में मौजूद प्राइमरी स्कूल, 2008 से यहां पर शिक्षा परिषद अपने खर्चे पर स्कूल चला रहा है. जब वहां पर ये स्कूल खुला था तब वनटांगिया लोगों को स्कूल तो दूर मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिलती थी. आज महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद प्राइमरी से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट तक की शिक्षा देता ही है. साथ लोगों को टेक्निकल शिक्षा भी दे रहा है. एसपी पॉलीटेक्निक के साथ- साथ नर्सिंग कॉलेज भी शिक्षा परिषद चला रहा है. गोरखनाथ चिकित्सालय चला रहा है तो मेडिकल कॉलेज का भी निर्माण तेजी से चल रहा है. वहीं हर साल 100 गरीब बच्चों को निशुल्क संस्कृत की शिक्षा दी जाती है.

कहाँ तक फैली है शाखाएं

उनके रहने खाने और पढ़ने की पूरी व्यवस्था गोरक्षपीठ ही करती है. योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से उनके पास समय का अभाव जरूर है पर वो समय समय पर शिक्षा परिषद की बैठक लिया करते हैं. शिक्षा परिषद को दिशा निर्देश दिया करते हैं. शिक्षा परिषद की एक टीम है जो लगातार सभी स्कूलों और कॉलेजों पर नजर रखती है और ये सब मिलकर आज पूर्वांचल में शिक्षा का अलख जगा रहे हैं. गोरखपुर, महाराजगंज, बलरामपुर, वाराणसी तक कॉलेज फैला हुआ है. यानी महंत दिग्विजयनाथ ने जो सपना देखा था वो सपना आज पूरा हो रहा है.

ये भी पढ़ें:

BHU में दलित संस्कृत प्रोफेसर ने किया डॉ फिरोज का समर्थन तो छात्रों से हुई झड़प

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए गोरखपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: December 10, 2019, 12:32 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर