जानिए चुनाव के दौरान CM योगी किस 'टोटके' का करते हैं इस्तेमाल?

Lok Sabha Election 2019 - गोरखपुर सीट खासतौर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है. योगी यहां से 5 बार सांसद चुने जा चुके हैं, लेकिन वर्ष 2018 में हुए उपचुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था.

NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: May 19, 2019, 4:03 PM IST
जानिए चुनाव के दौरान CM योगी किस 'टोटके' का करते हैं इस्तेमाल?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: May 19, 2019, 4:03 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019 के सातवें और अंतिम चरण के लिए रविवार को यूपी की 13 सीटों पर मतदान हुई. चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक 'खास टोटके' का इस्तेमाल किया. हर बार की तरह गोरखपुर शहर में होने वाली उनकी आखिरी चुनावी सभा टाउन हॉल स्थित गांधी प्रतिमा के पास होती है, जिसे योगी आदित्यनाथ संबोधित करते हैं. इसी कड़ी में सातवें चरण के प्रचार के अंतिम दिन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और सीएम योगी की सभा टाउन हॉल से शुरू हुई थी.

सीएम योगी द्वारा प्रचार के आखिरी दिन टाउन हॉल पर सभा करने के पीछे को एक टोटके से जोड़ा जाता रहा है. इसी कड़ी में मतदान के दिन सबसे पहले योगी आदित्यनाथ वोट करने पहुंचते हैं, जिसके पीछे की वजह भी पार्टी प्रत्याशी की जीत का 'टोटका' माना जाता है.



कब शुरू हुआ सिलसिला
यह सिलसिला साल 2002 से शुरू हुआ था, जब योगी ने भाजपा के प्रत्याशी और तीन बार के विधायक और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ल के खिलाफ हिंदू महासभा के बैनर से अपना उम्मीदवार लड़ाया और जिताया भी था. तब से हर चुनाव में योगी आखिरी सभा इसी गांधी प्रतिमा के पास करते हैं.

टाउन हॉल पर चुनावी सभा


गोरक्षनाथ पीठ का रहा है दबदबा
गोरखपुर सीट बीजेपी के लिए खासकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है. सीएम योगी यहां से 5 बार सांसद चुने जा चुके हैं. वर्ष 1952 में पहली बार गोरखपुर लोकसभा सीट के लिए चुनाव हुआ और कांग्रेस ने जीत दर्ज की. इसके बाद गोरक्षनाथ पीठ के महंत दिग्विजयनाथ 1967 में निर्दलीय चुनाव जीता. उसके बाद 1970 में योगी आदित्यनाथ के गुरु अवैद्यनाथ ने निर्दलीय जीत दर्ज की.
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निषाद कराएंगे बीजेपी की नैया पार?
पूर्वी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर निषाद वोटर्स का खासा असर माना जाता है, लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर में इस जाति के वोटों को लेकर कौतुहल सबसे अधिक है. साल 2018 में हुए उपचुनाव में भाजपा ने यह सीट गंवा दी थी और सपा-बसपा तथा निषाद पार्टी के संयुक्त प्रत्याशी प्रवीण निषाद विजयी हुए थे. वर्ष 2019 के चुनाव में अब सारा दामोदार निषाद वोटर्स पर आकर टिका है. इस सीट पर भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता रवि किशन, सपा-बसपा गठबंधन के रामभुआल निषाद और कांग्रेस के मधुसूदन तिवारी चुनावी दंगल में हैं.

टाउन हॉल पर उमड़ी भीड़


5 विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कब्ज़ा
गोरखपुर में 19 लाख मतदाताओं में से आधे से कुछ अधिक पिछड़ी जातियों के हैं. दलितों की भी गोरखपुर और फूलपुर दोनों में काफी संख्या है. वर्तमान समय में गोरखपुर में पड़ने वाली सभी 5 विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्ज़ा है. इसके अलावा योगी आदित्यनाथ की इस क्षेत्र में काफी पकड़ है. गोरखपुर के जातीय गणित को यदि देखा जाए तो यहां 19.5 लाख वोटरों में से 3.5 लाख वोटर निषाद समुदाय के हैं. इस संसदीय क्षेत्र में निषाद जाति के सबसे अधिक मतदाता हैं. वहीं, यादव और दलित मतदाता दो-दो लाख हैं. ब्राह्मण वोटर करीब डेढ़ लाख हैं.

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