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Exclusive Interview: बीआरडी में बच्चों की मौत की वजह ऑक्सीजन की कमी नहीं थी: सीएम योगी

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 19, 2019, 5:07 PM IST
Exclusive Interview: बीआरडी में बच्चों की मौत की वजह ऑक्सीजन की कमी नहीं थी: सीएम योगी
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 में बीआरडी में बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई थी.

साल 2017 में गोरखपुर (Gorakhpur) के बीआरडी मेडिकल कॉलेज (BRD Medical College) में बच्चो की मौत मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने अहम बयान दिया है. News18 Network Group के Editor-in Chief राहुल जोशी के साथ Exclusive Interview में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बच्चों की मौत इंसेफेलाइटिस से हुई, न कि ऑक्सीजन (Oxygen) की कमी से.

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गोरखपुर. साल 2017 में गोरखपुर (Gorakhpur) के बीआरडी मेडिकल कॉलेज (BRD Medical College) में बच्चो की मौत मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने अहम बयान दिया है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स को बिना किसी सच्चाई जाने पेश करने की निंदा की और साफ किया है कि 2017 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत इंसेफेलाइटिस से हुई, न कि ऑक्सीजन (Oxygen) की कमी से. साथ ही सीएम योगी ने कहा कि अगर वर्ष 2016 से तुलना की जाए तो 2017 में मृत्यु कम हुई थीं.

News18 Network Group के Editor-in Chief राहुल जोशी के साथ Exclusive Interview में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “2017 में ये दावा किया गया कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई और मीडिया ने लगातार तीन दिनों तक इसे दिखाया. जब हम बिना सच्चाई जांचे इस तरह की खबरें चलाते हैं तो लोगों के साथ अन्याय करते हैं.”

'मैं वो पहला शख्स था, जिसने दुनिया के सामने इंसेफेलाइटिस मुद्दे को उठाया: सीएम योगी'

सीएम ने कहा, “ गोरखपुर और पूवीं उत्तर प्रदेश में पिछले 20 से 40 सालों से इंसेफेलाइटिस से लोग मर रहे हैं. लेकिन 2016 की तुलना में 2017 में मौतों की संख्या कम रही.” उन्होंने कहा, “हमने इंसेफेलाइटिस के नियंत्रण और इलाज को लेकर कदम उठाए हैं. सिर्फ यही नहीं, मैं वो पहला शख्स था, जिसने दुनिया के सामने इस मुद्दे को उठाया. एक सांसद के तौर पर और योगी के तौर पर मैंने लड़ाई शुरू की. मैंने संसद से लेकर सड़क तक इसके खिलाफ अभियान चलाया.

'इटावा और फिरोजाबाद में कम हुई मातृ मृत्यु दर'

उत्तर प्रदेश के नीति आयोग के हेल्थ इंडेक्स में आखिरी पायदान पर होने पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “2016-2017 की नीति आयोग की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश काफी निचले पायदान पर था. लेकिन 2017-18 में मैं ये कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री के निर्देशन में नीति आयोग ने 115 उभरते जिलों का चयन किया. अगर आप ये लिस्ट देखें तो उत्तर प्रदेश की पिछले दो सालों में अच्छी रैंकिंग है. यही नहीं इटावा और फिरोजाबाद जिलों में मातृ मृत्यु दर कम होने के लिए उत्तर प्रदेश को पुरस्कृत किया गया.”

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सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपी की स्वास्थ्य सेवाओं में हो रहे बड़े बदलावों की जानकारी दी.

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यूपी से खत्म कर देंगे इंसेफेलाइटिस: सीएम योगी

इसके अलावा सीएम योगी ने दावा किया कि स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से यूपी में इंसेफेलाइटिस करीब-करीब शून्य स्तर पर आ गया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य से इस बीमारी को वह खत्म कर देंगे. सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान स्वच्छ भारत मिशन को प्रदेश में कई बीमारी से निपटने का श्रेय भी दिया.

उन्होंने कहा, “अगर आप स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करते हैं तो पिछले सरकार ने लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस नहीं लाई. इसके कारण प्रदेश के 23 करोड़ लोग दुर्घटना या आकस्मिक हृदयाघात के दौरान अच्छी सुविधा से वंचित रहे. मैंने मार्च के महीने में जिम्मेदारी संभाली और अप्रैल महीने में ही हमने केंद्र सरकार से संपर्क किया. हमें 150 लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मिल गई. हमने हर जिले में दो एंबुलेंस दीं. साल की शुरुआत में हमने 100 और एंबुलेंस की मांग की और वे हमें मिल गईं. अब हमारे पास पूरे प्रदेश में 250 लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस हैं.”

'हमने 15 मेडिकल कॉलेज बनाए, गोरखपुर और रायबरेली में एम्स'

सीएम ने कहा, “मुझे लगता है कि हमने आकस्मिक परिस्थतियों में करीब 1 लाख लोगों को मेडिकल सुविधा दी है. हम जिंदगी बचा रहे हैं. 1947 से 2016 तक प्रदेश में सिर्फ 12 मेडिकल कॉलेज थे. वहीं हमने 15 मेडिकल कॉलेज बनाए और यही नहीं इनमें से कई कॉलेजों में एडमीशन भी शुरू हो गया है. उत्तर प्रदेश के पास गोरखपुर और रायबरेली में दो एम्स हैं. हम जिला अस्पतालों को भी मजबूत कर रहे हैं. इस क्षेत्र में बहुत काम हो रहा है. जिन गांवों में डॉक्टर जाना नहीं चाहते थे, वहां हम नेशनल मोबाइल मेडिकल वैन भेज रहे हैं.”

बलरामपुर में लागू किया टेली मेडिसिन प्रोजेक्ट

सीएम योगी ने कहा, “हम प्रदेश में सभी को बेहतर मेडिकल सुविधा मुहैया कराने की कोशिश कर रहे हैं. जिन लोगों के पास आयुष्मान भारत के कार्ड हैं, उन्हें ये सुविधा मिल रही है. लेकिन 56 लाख लोग इससे वंचित हैं. हम उन्हें मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ रहे हैं. हम इसमें तकनीक का सहारा भी ले रहे हैं, ताकि काम जल्द हो. हमने ऐसी जगहों पर टेली मेडिसिन सुविधा दी है, जहां डॉक्टर कभी जाना नहीं चाहते. बलरामपुर जिले में हमने इसे लागू कर दिया है. यहां हमने केजीएमयू सैटेलाइट सेंटर खोला है. अब केजीएमयू के डॉक्टर यहां जा रहे हैं.”

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First published: September 19, 2019, 4:10 PM IST
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