COVID-19 Effect: गोरखपुर में बास्केटबॉल का राष्ट्रीय खिलाड़ी लगा रहा है सब्जी की दुकान
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COVID-19 Effect: गोरखपुर में बास्केटबॉल का राष्ट्रीय खिलाड़ी लगा रहा है सब्जी की दुकान
लॉकडाउन में नौकरी छूटी तो सब्जी बेचने लगे सुरेंद्र गुप्ता

Lockdown Effect: पिता की चाय की दुकान के सामने ही सुरेन्द्र गुप्ता (Surendra Gupta) ने उधार लेकर सब्जी की दुकान लगा ली, जिससे वो अपने परिवार की कुछ आर्थिक मदद कर सकें.

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गोरखपुर. कोविड-19 (COVID-19) के इस संकट काल में कई लोगों की जिंदगियां बदल गयी हैं. लोग नये सिरे से अपना सफर जारी रख रहे हैं. इसी दौर में गोरखपुर के रहने वाले एक बास्केटबॉल के राष्ट्रीय खिलाड़ी (National Player) सब्जी का ठेला लगाकर अपना जीविका चला रहा है. कोरोना के इस संकट काल में जब सब लोग अपने काम धंधा बंद होने से परेशान थे, तब एक राष्ट्रीय खिलाड़ी ने अपने परिवार की मदद के लिए नया काम शुरू कर दिया. पिता की चाय की दुकान के सामने ही सुरेन्द्र गुप्ता ने उधार लेकर सब्जी की दुकान लगा ली. जिससे वो अपने परिवार की कुछ मदद कर सकें.

सुरेन्द्र गुप्ता का कहना है कि जब लॉकडाउन लगा तो सब कुछ बंद हो गया. हास्टल के साथ-साथ खेल का मैदान भी बंद हो गया. प्रैक्टिस भी नहीं हो पा रही थी. घर की आर्थिक स्थिती भी अच्छी नहीं है इसलिए सब्जी की दुकान लगा ली. सुबह शाम अब प्रैक्टिस भी कर ले रहा हूं और घर वालों की कुछ मदद भी हो जा रही है. सुरेन्द्र कहते हैं कि भले ही मैं आज सब्जी बेंच रहा हूं पर पिता जी ने चाय बेचकर जो सपना देखा है उसे कभी टूटने नहीं दूंगा.

पिता लगाते हैं चाय की दुकान
सुरेन्द्र गुप्ता के पिता रामवृक्ष गुप्ता देवरिया बाईपास पर चाय की दुकान चलाते हैं. चाय बेचकर ही उन्‍होंने अपने बेटे को पढ़ाया और उसे खिलाड़ी बनाया. चाय की दुकान पर लोग आते थे, उसी में किसी ने उसे खिलाड़ी बनने की बात कही. साल 2013 में गोरखपुर स्टेडियम में उसे प्रवेश मिला. अंडर 17 में यूपी की टीम चयन हुआ उसके बाद 2016 में और फिर 2017-18 में भुवनेश्वर में खेलने का मौका मिला. बेटे की उपलब्धि पर बात करते करते पिता की आंखें चमक उठती हैं.
लॉकडाउन में छूट गई कोच की नौकरी


सुरेन्द्र खेलने के साथ ही एक स्कूल में बच्चों को बास्केटबॉल की ट्रेनिंग भी देते थे, लेकिन कोरोना काल में जब कॉलेज से वेतन मिलना बंद हो गया तो वो आर्थिक रूप से कमजोर होते चले गये. जब कहीं से कोई उम्मीद नहीं दिखी तो उन्‍होंने सब्जी की दुकान लगा ली. हालांकि, सुबह और रात के वक्त अभ्यास करना नहीं भूले हैं, जिससे जब भी खेल प्रतियोगिताएं शुरू हो तो पूरे दमखम के साथ मैदान में उतर सकें. खिलाड़ी न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत होता है. कोई भी काम छोटा नहीं होता है. वक्त पड़ने पर खिलाड़ी कुछ भी कर सकता है. ये बात साबित किया है सुरेन्द्र गुप्ता ने.
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