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भारत-नेपाल सीमा पर छाया संकट का बादल, ये रही बड़ी वजह

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 25, 2019, 9:02 AM IST
भारत-नेपाल सीमा पर छाया संकट का बादल, ये रही बड़ी वजह
भारत-नेपाल सीमा पर रहने वाले यात्रियों पर छाया संकट का बादल (file photo)

परिवाहन विभाग गोरखपुर परिक्षेत्र के रीजनल मैनेजर (RM) वाईडी सिंह ने न्यूज18 से बातचीत में बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र के ड्राइवर नेपाल में गाड़ी चलाने चले जाते थे, यहां पर पैसा कम होने के कारण वो परिवहन विभाग की गाड़ियां चलाना पंसद नहीं करते थे.

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गोरखपुर. उत्तर प्रदेश से सटे हुए भारत-नेपाल सीमा (India-Nepal Border) पर परिवाहन विभाग (Transport Department) ड्राइवरों (Drivers) की बड़ी किल्लत से जूझ रहा है. दरअसल सीमावर्ती क्षेत्र के डिपो में ड्राइवर खोजे नहीं मिल रहे हैं. पैसा कम होने के कारण ड्राइवर नेपाल भाग जा रहे हैं या फिर प्राइवेट गाड़ियों को चला रहे हैं. इसलिए रोडवेज के गोरखपुर परिक्षेत्र के तीन डिपो (महराजगंज, सोनौली और सिद्धार्थनगर) में ड्राइवरों की कमी को देखते हुए संविदा पर तैनात ड्राइवरों का पैसा बढ़ा दिया है.

परिवहन विभाग की गाड़ियां चलाना नहीं करते पंसद

परिवाहन विभाग गोरखपुर परिक्षेत्र के रीजनल मैनेजर (RM) वाईडी सिंह ने न्यूज18 से बातचीत में बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र के ड्राइवर नेपाल में गाड़ी चलाने चले जाते थे, यहां पर पैसा कम होने के कारण वो परिवहन विभाग की गाड़ियां चलाना पंसद नहीं करते थे. दरअसल ड्राइवरों की किल्लत से जूझ रहे परिवहन विभाग के सामने सीमावर्ती जिलों में एक और समस्या खड़ी हो गयी है. सीमावर्ती क्षेत्र के डिपो में ड्राइवर खोजे नहीं मिल रहे हैं. इसलिए गोरखपुर परिक्षेत्र ने अपने तीन डिपो में संविदा चालकों का मेहनताना बढ़ा दिया है.

संविदा चालकों के लिए लगाया भर्ती कैंप
संविदा चालकों के लिए लगाया भर्ती कैंप


संविदा पर तैनात ड्राइवरों का बढ़ाया पैसा

बता दें कि अब महराजगंज, सोनौली और सिद्धार्थनगर डिपो के संविदा पर तैनात ड्राइवरों को अब 1.50 पैसा प्रति किलोमीटर की जगह 2.6 पैसा प्रतिकिलोमीटर मिलेगा. गोरखपुर परिक्षेत्र के आरएम वाईडी सिंह के मुताबिक सीमावर्ती क्षेत्र के ड्राइवर नेपाल में गाड़ी चलाने चले जाते थे, यहां पर पैसा कम होने के कारण वो परिवहन विभाग की गाड़ियां चलाना पंसद नहीं करते थे. इसलिए जिस तरह से एनसीआर के ड्राइवरों को अधिक पैसा दिया जाता है. उसी तर्ज पर सीमावर्ती क्षेत्र के ड्राइवरों को अच्छी सुविधा दी जा रही है.

नेपाल में गाड़ी चलाना ज्यादा पसंद
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नेपाल में पर्यटन स्थल होने के कारण वहां पर बड़ी संख्या में पर्यटक जाते हैं. जिनको लेकर ड्राइवर जाते हैं जिससे उन्हे अधिक पैसा मिल जाता था. जबकि परिवहन विभाग उन्हे सुविधाएं अधिक देता है पर वो पैसे के लिए नेपाल भाग जाते हैं. वहीं सोनौली डिपो के एआरएम का कहना है कि जब से पैसा बढ़ाया गया है. तब से लोग ड्राइवर की नौकरी के लिए आ रहे हैं, नहीं तो चक्का जाम की स्थिती पैदा हो गयी थी.

बसों के संचालन में आई परेशानी

सिंह ने बताया कि बसों को संचालित करने में परेशानी का सामना करना पड़ता था, बसें ड्राइवरों के अभाव में खड़ी हैं, जबकि संविदा पर तैनात बस चालकों का कहना है कि इस महंगाई के दौर में उन्हे परिवहन विभाग से कम पैसा मिलता था, जिसके कारण लोग नौकरी छोड़ रहे थे या फिर नौकरी में नहीं आते थे.
नेपाल बार्डर पर जब प्राइवेट गाड़ियां चला रहे ड्राइवरों की मानें तो उन्हे नेपाल जाने में एक दिन में 700 रुपये मिल जाते हैं, तो फिर वो किलोमीटर के हिसाब से गाड़ी क्यों चलायें.

यूपी रोडवेज में योग्य ड्राइवरों की बढ़ी डिमांड

नेपाल में जिस तरह से सुविधाएं बढ़ रही है, चीन लगातार निवेश कर रोड की स्थिती को बेहतर कर रहा है उसका भी एक कारण ड्राइवरों की किल्लत से हैं, रोड बेहतर होने के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक छोटी गाडि़यों से नेपाल घूमने जाते हैं. जिसके कारण ड्राइवरों की कमी हमेशा बनी रहती है, और ड्राइवरों को बेहतर पैसा भी मिल जाता है, इसीलिए सीमावर्ती क्षेत्रों में योग्य ड्राइवरों की हमेशा डिमांड रहती है.

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First published: November 25, 2019, 9:02 AM IST
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