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हॉस्पिटल खुलने के 15 साल बाद भी नहीं शुरू हुआ डायलेसिस विभाग

हॉस्पिटल खुलने के 15 साल बाद भी नहीं शुरू हुआ डायलेसिस विभाग

उत्तर प्रदेश सरकार भले ही स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर नजर आ रही है, लेकिन बस्ती जनपद का मिनी पीजीआई माना जाने वाला 500 बेड से सुसज्जित ओपेक चिकित्सालय कैली में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है.

2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने डायलेसिस विभाग का लोकार्पण किया था, लेकिन 2001 से अब तक कैली हॉस्पिटल का डायलेसिस विभाग चालू नहीं हो सका. डायलेसिस विभाग में लगी सारी मशीने जंग खा रही हैं. कैली हॉस्पिटल में डायलेसिस विभाग तो बना दिया गया, लेकिन आज तक न तो हॉस्पिटल में नेफ्रोलाजिस्ट डॉक्टर की तैनाती हुई और न ही मशीनों को चलाने वाले टेक्निशियन नियुक्त किए गए.

जिसकी वजह से अब तक डायलेसिस मशीनों का इस्तेमाल नहीं हो सका. डायलेसिस मशीन न चलने की वजह से बस्ती मण्डल के बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर जनपद के मरीजों को डायलेसिस के लिए लखनऊ जाना पड़ता है. जिसमें मरीजों को अच्छी खासी रकम खर्ज करनी पड़ती है. वहीं कैली हास्पिटल के निदेशक डॉक्टर अशोक कुमार का कहना है कि डॉक्टरों की कमी की वजह से मशीने नहीं चल पा रही हैं.

अगले वित्तीय वर्ष में नई मशीने और नेफ्रोलाजिस्ट डॉक्टर की तैनाती की उम्मीद है. डॉक्टर की तैनाती के बाद मशीने चलने लगेंगी और इसका लाभ मण्डल के तीनों जिलों के मरीजों को होगा. वहीं डीएम अनिल कुमार दमेले ने कहा की शासन से नेफ्रोलाजिस्ट डॉक्टर की तैनाती के लिए अनुरोध किया गया है, जिससे ये मशीने चल सकें.

Tags: Basti, Basti news

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