BRD में ऑक्सीजन की कमी को लेकर सीएम योगी के दावों पर डॉ कफील ने उठाये सवाल

डॉ कफील ने आगे कहा कि 10 अगस्त से 12 अगस्त के बीच 27 नवजात शिशुओं की मौत हुई थी, तो सीएम कैसे कह सकते हैं कि उनकी मौत इंसेफलाइटिस से हुई.

News18Hindi
Updated: August 27, 2018, 12:47 PM IST
BRD में ऑक्सीजन की कमी को लेकर सीएम योगी के दावों पर डॉ कफील ने उठाये सवाल
डॉक्टर कफील की फोटो
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Updated: August 27, 2018, 12:47 PM IST
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत मामले में आरोपी डॉक्टर कफील अहमद ने सीएम योगी आदित्यनाथ के दावों पर सवाल उठाये है. डॉक्टर कफील ने न्यूज18 से बातचीत में कहा कि सीएम योगी के बयान दिया कि बच्चों की मौत के पीछे कॉलेज की आंतरिक राजनीति थी. डॉ कफील ने कहा,' मौतें, ऑक्सीजन की कमी के कारण नहीं हुई, जबकि यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दिए हलफनामे में इसे स्वीकारा है. बच्चों की मौत के मामले में डॉ कफील ने सीएम योगी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ लेने के लिए कर रहे हैं.

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डॉ कफील ने आगे कहा कि 10 अगस्त से 12 अगस्त के बीच 27 नवजात शिशुओं की मौत हुई थी, तो सीएम कैसे कह सकते हैं कि उनकी मौत इंसेफलाइटिस से हुई. इसमें कोई आंतरिक राजनीति नहीं है, लेकिन यह सब यूपी सीएम द्वारा राजनीतिक लाभ लेने और अपनी सरकार को बचाने के लिए किया जा रहा है. अगर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कुछ गलत नहीं हुआ तब पिछले कुछ महीनों से मेडिकल बुलेटिन को क्यों नहीं सार्वजनिक किया जाता है.

हलफनामे की फोटो


इससे पहले न्यूज18 से बातचीत में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था पर जवाब देते हुए प्रिंसिपल डाॅ. गणेश कुमार ने बताया था कि इनॉक्स कंपनी द्वारा सप्लाई सुचारु रूप से प्रदान की जा रही है. फिलहाल स्थिति सामान्य है. डाॅ.  कुमार बताते हैं कि 300-350 का वर्तमान में हमारे पास लिक्विड ऑक्सीजन का बैकअप है. वहीं बच्चों की मौत के आंकड़े के सवाल पर प्रिंसिपल ने बताया कि पहले की तरह ही शासन को रोजाना डाटा भेजा जाता है, लेकिन मीडिया को जारी नहीं किया जाता है.

हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामा


दरअसल गोरखपुर मेडिकल कॉलेज पिछले साल 10/11 अगस्त को कथित रूप से ऑक्सीजन की कमी की वजह से कम से कम 33 मरीज बच्चों की मौत के बाद सुर्खियों में आया था. इस मामले में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के संचालक समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था. इस घटना के बाद सरकार की कड़ी आलोचना हुई थी.

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