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गोरखपुर: पहली बार योगी आदित्यनाथ के बिना निकली RSS की ऐतिहासिक नरसिंह शोभा यात्रा

गोरखपुर: पहली बार योगी आदित्यनाथ के बिना निकली RSS की ऐतिहासिक नरसिंह शोभा यात्रा

आरएसएस के ध्वज प्रणाम के साथ शोभा यात्रा शुरू हो गई. सीएम योगी पहली बार इस शोभा यात्रा में नहीं शामिल हुए.

आरएसएस के ध्वज प्रणाम के साथ शोभा यात्रा शुरू हो गई. सीएम योगी पहली बार इस शोभा यात्रा में नहीं शामिल हुए.

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के मुख्यमंत्री बन जाने के बाद भी वो घंटाघर आकर पूजा करते थे और वहीं से वापस हो लेते थे. पर इस बार कोरोना वायरस के कारण होली के किसी भी कार्यक्रम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दूरी बनाई हुई है.

गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर (Gorakhpur) में होली (Holi) की धूम हर तरफ दिखाई दे रही है. बच्चा हो बूढ़ा हो या जवान सभी पर होली का रंग चढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है. घंटाघर से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की 1939 से निकलने वाली भगवान नरसिंह की भव्य शोभायात्रा भी निकली, पर इस बार दशकों पुरानी परम्परा टूट गई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहली बार इस शोभायात्रा में नहीं शामिल हुए. इस शोभायात्रा में गोरक्षपीठाधीश्वर शामिल होते रहे हैं. योगी आदित्यनाथ जब से गोरखपुर मठ में आये तब से वो इस शोभा यात्रा में शामिल होकर भगवान नरसिंह की पूजा करते थे. आरएसएस के ध्वज की सलामी के बाद शोभायात्रा निकलती थी. खास बात ये कि जिस रथ पर भगवान नरसिंह विराजमान रहते हैं, उसी रथ पर गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ भी बैठते थे. 5 किलोमीटर तक होली खेलते थे. होली के रंग में रंगे नजर आते हैं, और उस रथ को होली खेलने वाले हुरियारे ही खींचते थे.

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बन जाने के बाद भी वो घंटाघर आकर पूजा करते थे और वहीं से वापस हो लेते थे. पर इस बार कोरोना वायरस के कारण होली के किसी भी कार्यक्रम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दूरी बनाई हुई है. इसी कारण वो घंटाघर तक नहीं आये और इस शोभा यात्रा में शामिल नहीं हुए. ये शोभायात्रा जिन रास्तों से जाता है, वहां बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी भी रहती है. रास्ते में कई मस्जिदें भी पड़ती हैं, पर यहां पर समाजिक सौहार्द देखने को मिलता है.

कई जगह मुस्लिम समुदाय करता है शोभायात्रा का स्वागत
शोभा यात्रा में शामिल लोग भले ही होली की मस्ती में डूबे रहते हैं, पर वो किसी की भी धार्मिक भावनाओं को चोट नहीं पहुंचाते हैं. कई जगहों पर मुस्लिम समुदाय के लोग भी इस शोभायात्रा का स्वागत करते हैं. पांच किलोमीटर तक निकलने वाली इस शोभायात्रा का स्वागत स्थानीय लोग करते हैं, वो अपने घरों से इसमें अबीर गुलाल फेंकते हैं, फूलों से इसका स्वागत करते हैं.

कीचड़ की होली बदलने को शुरू हुई थी शोभायात्रा
बता दें इस शोभायात्रा की शुरुआत नाना जी देशमुख ने की थी, आरएसएस के गठन के बाद वो इसके विस्तार के लिए गोरखपुर आये थे तो उन्होने देखा कि यहां पर कीचड़, कालेरंग और कपड़ा फाड़ होली होती है, जिसके बाद 1939 में उन्होने इसे बदलने को ठाना. इस शोभायात्रा की शुरूआत हुई. धीरे-धीरे 1946 तक इस स्वरूप में आई और लोग कीचड़ और कालेरंग की जगह गुलाबी और अबीर गुलाल से होली खेलने लगे.

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Tags: Gorakhpur city news, Holi 2020, Holi celebration, Uttarpradesh news, Yogi adityanath

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