इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए गंगाराम ने बनाई अनोखी मच्छरदानी
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इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए गंगाराम ने बनाई अनोखी मच्छरदानी
ट्रेवल मच्छरदानी का प्रजेंटेशन दिखाते गंगाराम की फोटो.

इस ट्रेवल मच्छरदानी का इस्तेमाल गांव में करने से मच्छरों पर काबू पाया जा सकता है. गंगाराम ने बताया कि कम लागत में मच्छरदानी और फ्रेम की कीमत सिर्फ 600-400 रुपये रखी है.

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  • Last Updated: April 3, 2018, 12:35 PM IST
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गोरखपुर जिले के गंगाराम ने इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए एक अनोखी मच्छरदानी तैयार की है, जो कबाड़ के समानों को इकट्टा करके की गई है. अनोखी बात यह है कि यह एक ट्रेवल मच्छरदानी है, जिसे यात्रा के दौरान लोग उपयोग में ला सकेंगे. जी हां, यह सौ फीसदी सच है. इस मच्छरदानी के उपयोग से घातक इंसेफेलाइटिस बीमारी को भी रोका जा सकेगा.

गौरतलब है पूर्वांचल में खासकर गोरखपुर जिले में प्रत्येक वर्ष सैकड़ों मासूम बच्चों की मौत इंसेफेलाइटिस से होती है, जिसकी असली वजह मच्छर है. गंगाराम की मानें तो उसकी ईजाद की गई मच्छरदानी के इस्तेमाल ऐसे मच्छरों पर काबू पाया जा सकता है.

बकौल गंगाराम,  कम लागत में तैयार मच्छरदानी और फ्रेम की कीमत सिर्फ 600 रुपए रखी गई है जबकि दूसरी मच्छरदानी कीमत 400 रुपए है. धीरे-धीरे घर के सामान से तैयार इस मच्छरदानी के डिमांड बढ़ने लगी है.



हजारों माताओं की कोख हुई सुनी



गोरखपुर के रामजानकी नगर के रहने वाले गंगाराम एक ग्रास रुट रेनोवेटर है. न्यूज18 से बातचीत में गंगाराम ने बताया कि बीते चार दशकों से इंसेफेलाइटिस बच्चों पर कहर बरपा रही है और इस जानलेवा बीमारी से बचाव के सभी उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं, जिससे हजारों माताओं की कोख सुनी हो गई तो इलाज में कईयों की जमीन-जायदाद भी बिक गई. गंगाराम ने बताया कि उन्होंने सोचा क्यों न ऐसी कोई सस्ती मच्छरदानी बनायी जाए. जिसे गांव के लोग कम खर्च में आसानी से खरीद सके.

गांव-गांव पहुंचाने का सपना
गंगाराम कहते है कि मच्छरों से फैलनी वाली इस महामारी को पर काबू पाने के लिए गंगाराम को ट्रेवल मच्छरदानी को बनाने का विचार आया. गंगाराम की मानें तो ट्रेन-बस में सफर के दौरान अगर सबसे ज्यादा कमी खलती है, तो वह थी मच्छरदानी, क्योकि अगर स्टेशन पर गाड़ी इंतजार करना हो तो मच्छरों का हमला शुरु हो जाता है, लिहाजा निश्चय करके उन्होंने एक ट्रेवेल मच्छरदानी बना डाली.

मच्छरदानी के अंदर आराम करते गंगाराम की फोटो.


सीएम योगी को दिखाना चाहते हैं प्रजेंटेशन
अनोखी किस्म की ट्रेवल मच्छरदानी बनाने वाले गंगाराम अब अनोखे मच्छरदानी को घर-घर तक पहुंचाना चाहते है. उन्होंने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ इंसेफेलाइटिस पीड़ित बच्चों के लिए कई सालों से काम कर रहे है. पूर्वांचल में इस महामारी से लड़ने के यह ट्रेवल मच्छरदानी काफी हद तक इस बीमारी को रोकने में मदद कर सकती है. इसलिए वह सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर उन्हें प्रजेंटेशन दिखाना चाहते है.

एंट्रोवायरल और स्क्रबटाईफस हो रही हैं मौतें
एंट्रोवायरल और स्क्रबटाईफस नामक दो ऐसी बीमारियां है जिसकी चपेट में आने से सबसे ज्यादा बच्चों की मौतें हो रही हैं. इस बीमारी को रोकने के लिए सबसे ज्यादा जरुरी है कि हर घर में शौचालयों का निर्माण हो और जल और मल के मिश्रण को तत्काल रोका जाए.

डॉ. आरएन सिंह के मुताबिक नवजात बच्चों के अंदर इंसेफेलाइटिस नहीं पाई जाती है. 0-1.5 साल के जो भी नवजात बच्चे होते हैं उनकी मौत जापानी इंसेफेलाइटिस से नहीं होती है. डाॅ. सिंह कहते हैं कि हम पोलियो मुक्त भारत बना सकते हैं तो इंसेफेलाइटिस मुक्त पूर्वांचल क्यों नहीं बना सकते?

मच्छरदानी का आविष्कार करते वाले गंगाराम की फोटो.


एनआइवी पुणे कर रही हैं शोध
मेडिकल कॉलेज परिसर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी्य (एनआइवी), पुणे की एक शाखा इस पर शोध कर रही है. यहां प्रयोगशाला जांच में वातावरण और गंदगी में पाए जाने वाले एंट्रोवायरस, स्क्रब टाइफस, रुबेला वायरस, हरपीज सिंप्लेक्स वायरस, वेरीसोला जोस्टर वायरस समेत कुल 137 प्रकार के कारकों की पहचान की गई है. एईएस कहलाने वाले वायरस शरीर में प्रवेश कर दिमाग की झिल्ली में सूजन करते हैं.

गंदगी के चलते फैलती है इंसेफेलाइटिस
बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के पूर्व प्रिसिंपल और वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केपी कुशवाहा ने बताया कि जलजनित इंसेफेलाइटिस से बचने के लिए जरूरी है कि पीने का पानी शुद्ध हो और पेयजल स्रोत का किसी भी तरह से शौचालयों, नाले या गंदे पानी से सम्पर्क न हो.

डा. कुशवाहा ने बताया कि कम गहराई वाले हैंडपम्प आस-पास बने शौचालय, नाले या गन्दे पानी से भरे गड्ढों से दूषित हो सकते हैं इसलिए लोग गहराई वाले (80 फीट से अधिक) वाले हैंडपम्प के ही पानी का प्रयोग करें. उन्होंने बताया कि सरकारी इंडिया मार्का हैण्डपम्प के पानी के प्रदूषित होने की आशंका कम रहती है.

क्या हैं बीमारी के लक्षण
इस बीमारी में रोगी को सिर दर्द की शिकायत होती है और प्रायः बदन तपता रहता है. इसके अलावा इसका कोई प्रत्यक्ष लक्षण नहीं होता. कुछ छोटे बच्चों में गर्दन में अकड़न, कंपकंपी, शरीर में ऐंठन जैसे लक्षण भी पाए जाते हैं.

 
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