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पूर्व की सरकारें आतंकियों की पैरवी करती थीं, आज कोई ऐसी हिम्मत नहीं कर सकता: सीएम

महंत दिग्विजयनाथ की 52वीं और महंत अवेद्यनाथ की 7वीं पुण्यतिथि के मौके पर गोरखनाथ मंदिर में आयोजित 7 दिनों के श्रद्धांजलि समारोह के समापन पर मुख्यमंत्री भी शामिल हुए.

महंत दिग्विजयनाथ की 52वीं और महंत अवेद्यनाथ की 7वीं पुण्यतिथि के मौके पर गोरखनाथ मंदिर में आयोजित 7 दिनों के श्रद्धांजलि समारोह के समापन पर मुख्यमंत्री भी शामिल हुए.

7 Days Tribute Ceremony : मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रह्मलीन महंतद्वय ने संपूर्ण धर्म व समाज के सामने मूल्यों व आदर्शों की स्थापना की. 50 वर्ष पूर्व जिसने भी गोरखपुर और गोरक्षपीठ को देखा होगा उसे यह पता है कि आज यहां जो कुछ भी है, वह उन्हीं गुरुजनों की प्रेरणा व आशीर्वाद से है.

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गोरखपुर. ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 52वीं और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 7वीं पुण्यतिथि के मौके पर गोरखनाथ मंदिर में आयोजित 7 दिनों के श्रद्धांजलि समारोह का समापन आज शुक्रवार को हुआ. समापन सत्र में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिली सफलता से सभी वाकिफ हैं. उनके मार्गदर्शन में गृह मंत्री ने दृढ़ता से कश्मीर से धारा 370 समाप्त कर दी. पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश में प्रताड़ित हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों को कानून बनाकर नागरिकता दी. देश के बाहर संकट में फंसे भारतीयों का इस सरकार ने हाथ फैलाकर स्वागत किया. पहले की सरकारें ऐसा करने की हिम्मत नहीं जुटा पातीं. राष्ट्रीय हितों, देश के मानबिन्दुओं की पुनर्स्थापना को लेकर गोरक्षपीठ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कोई संदेह नहीं कर सकता है. आज जनता ने यशस्वी नेतृत्व दिया है तो पूरी दुनिया मे देश का डंका बज रहा है. पहले की सरकारों में आतंकवादियों के मुकदमे वापस होते थे, लेकिन आज आतंकियों के महिमामंडन की हिम्मत कोई नहीं कर सकता.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में बन रहे मंदिर, अयोध्याधाम के विकास व यहां आयोजित होने वाले दीपोत्सव का भावनात्मक उल्लेख करते हुए कहा कि अब अयोध्या सप्तपुरियों में पहली पुरी बन गई है. वहां के दीपोत्सव में एक-एक संत की भावना परिलक्षित होती है. जो संत अब भौतिक शरीर में नहीं हैं, वे भी सूक्ष्म शरीर से इसे देखकर प्रसन्न होते हैं. देश ही नहीं दुनिया भी इसकी भव्यता और दिव्यता की कायल है.

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सीएम योगी ने संतों के बीच कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर को लेकर गोरक्षपीठ के समर्पण को सब जानते हैं. जब मैं अयोध्या में होता हूं तो लगता ही नहीं कि गोरखपुर में नहीं हूं. 1947 में देश आजाद हुआ और 1949 में जन्मभूमि पर श्रीरामलला का प्रकटीकरण हो जाता है. उस दौरान वहां के मूर्धन्य संतों को गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ का संरक्षण प्राप्त था. परमहंस जी ने महंत दिग्विजयनाथ की ही प्रेरणा से श्रीरामलला के मुकदमे को आगे बढ़ाया. महंत दिग्विजयनाथ के अभियान को ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ विस्तारित करते रहे. गोरक्षपीठ व संतों के नेतृत्व में अयोध्या के लिए क्या-क्या संघर्ष करना पड़ा. संघर्ष करने वालों में से किसी ने भी यह नहीं सोचा कि उनको क्या मिलेगा. वास्तव में जब चारों ओर से एक आवाज निकलती है तो संकल्प साकार होता है.

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सीएम योगी ने प्रयागराज के भव्य व दिव्य कुंभ के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि जितनी यूपी की आबादी है, उससे अधिक श्रद्धालु कुंभ में आए. अमूल्य धरोहर के रूप में प्रयागराज कुंभ को यूनेस्को से मान्यता मिली. सीएम ने कहा कि आज यूपी के बारे में लोगों की धारणा बदली है, जबकि पहले कुछ शहरों में यूपी के नाम पर लोगों को कमरा नहीं मिलता था. उन्होंने कहा कि यूपीवासी प्रभु श्रीराम, श्रीकृष्ण, काशी विश्वनाथ, गुरु गोरखनाथ, महात्मा बुद्ध, संतकबीर के प्रतिनिधि हैं और इस पर गर्व की अनुभूति करनी चाहिए.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि 60 के दशक में ही गोरक्षपीठ ने आयुर्वेद को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ा दिया था. मूलतः यह पीठ योग पीठ है. वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान पूरी दुनिया ने आयुष और योग की ताकत को पहचाना. देश को पीएम मोदी को धन्यवाद देना चाहिए जिन्होंने आयुष और योग को वैश्विक मंच पर स्थापित किया. उनके ही प्रयास से 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाने लगा है.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रह्मलीन महंतद्वय ने संपूर्ण धर्म व समाज के सामने मूल्यों व आदर्शों की स्थापना की. 50 वर्ष पूर्व जिसने भी गोरखपुर और गोरक्षपीठ को देखा होगा उसे यह पता है कि आज यहां जो कुछ भी है, वह उन्हीं गुरुजनों की प्रेरणा व आशीर्वाद से है. महंत दिग्विजयनाथ ने जो नींव रखी, महंत अवेद्यनाथ ने उसे भवन का रूप दिया. 21 जुलाई 1984 को गठित श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के आजीवन अध्यक्ष रहे. गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 7वीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि जिस श्राद्ध पक्ष में हम अपने पितरों को श्रद्धांजलि देकर उनके विराट व्यक्तित्व से प्रेरणा लेते हैं. महंतद्वय ने उसी पक्ष में अपना भौतिक शरीर छोड़ा. उनका व्यक्तित्व व कृतित्व आज भी हमारे लिए प्रेरणास्रोत है.

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