बॉर्डर पर टेंशन! नेपाल से विवाद खत्म करने में गोरखनाथ मंदिर भी निभा सकता है बड़ा रोल : विशेषज्ञ
Gorakhpur News in Hindi

बॉर्डर पर टेंशन! नेपाल से विवाद खत्म करने में गोरखनाथ मंदिर भी निभा सकता है बड़ा रोल : विशेषज्ञ
गोरखनाथ मंदिर

गोरखपुर (Gorakhpur) में जानकारों का मानना है कि भारत और नेपाल के बीच चल रही तनातनी को कम करने में गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Temple) बड़ी भूमिका निभा सकता है. कारण ये है कि गोरक्षपीठ (Gorakshpeeth) की नेपाल में जड़ें काफी गहरी हैं. पीठ की वहां आमजन तक पहुंच है.

  • Share this:
लखनऊ. नेपाल (Nepal) और भारत (India) के बीच जमीनी विवाद धीरे-धीरे नया रूप लेता दिख रहा है. बिहार (Bihar) में सीतामढ़ी के सोनबरसा बॉर्डर (Sonabarsa border of Sitamarhi) पर जानकीनगर गांव के पास भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल पुलिस की ओर से अंधाधुंध फायरिंग की गई. इस घटना में 4 भारतीयों को गोली लगी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई. फायरिंग की इस घटना के बाद से सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है. उधर गोरखपुर (Gorakhpur) में जानकारों का मानना है कि भारत और नेपाल के बीच चल रही तनातनी को कम करने में गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Temple) बड़ी भूमिका निभा सकता है. इसका कारण ये है कि गोरक्षपीठ (Gorakshpeeth) की नेपाल में जड़ें काफी गहरी हैं. पीठ की आम जन तक पहुंच है.

नेपाल राजवंश से सदियों से संबंध
कहा जाता है कि गोरखनाथ मंदिर और नेपाल का संबंध सदियों से हैं. मान्यता है कि नेपाल राजवंश का उद्भव भगवान गोरखनाथ के आशीर्वाद से हुआ था. जिसके बाद शाह परिवार पर भगवान गोरखनाथ का हमेशा आशीर्वाद रहा है. यही कारण है कि नेपाल राजवंश ने गुरु गोरखनाथ की चरण पादुका को अपने मुकुट पर बना रखा था, नेपाल के सिक्कों पर गुरु गोरखनाथ का नाम लिखा है. गुरु गोरक्षनाथ के गुरु मक्षयेन्द्रनाथ के नाम पर आज भी नेपाल में उत्सव मनाया जाता है.

मकर संक्रांति से लेकर तमाम सांस्कृतिक आयोजनों में दिखता है संबंध
गोरखनाथ मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी कहते हैं कि भगवान गोरखनाथ के नाम पर दुनिया भर में अपना नाम रोशन करने वाली गोरखा रेजिमेंट भी गठित हुई. जिसमें अधिकतर नेपाली सैनिक ही होते हैं. राजपरिवार अब भी गुरु गोरखनाथ को अपना राजगुरु मानता है. मकर संक्राति के दिन भगवान गोरखनाथ को पहली खिचड़ी गोरक्षपीठाधीश्वर चढ़ाते हैं तो दूसरी खिचड़ी आज भी नेपाल नरेश की तरफ से चढ़ाई जाती है. गोरखनाथ मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी बताते हैं कि कई बार नेपाल नरेश खुद खिचड़ी चढ़ाने यहां पर आए हैं नहीं तो उनका कोई न कोई प्रतिनिधि यहां पर खिचड़ी चढ़ाने आता है. उसको यहां से नेपाल की सुख शांति के लिए महारोट का प्रसाद दिया जाता है. महारोट एक स्पेशल प्रसाद होता है जिसे गोरक्षनाथ मंदिर में मौजूद योगी ही बनाते हैं. मकरसंक्राति में बड़ी संख्या में नेपाली श्रद्धालु गोरखपुर आकर गोरखनाथ भगवान को खिचड़ी अर्पित करते हैं, नेपाल में बड़ी संख्या में लोग गोरखनाथ भगवान की पूजा करते हैं और उनकी गोरखनाथ में विशेष आस्था है.



गोरक्षपीठ के महंतों का नेपाल में हमेशा से रहा है सम्मान
उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ के मौजूदा गोरक्षपीठाधिश्वर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं, जिनकी बातों को नेपाल की जनता बहुत सम्मान देती है. वहां के राजनीतिक दलों के लोगों का भी मंदिर के प्रति आकर्षण रहा है. राजपरिवार के साथ नेताओं का भी मंदिर से संबंध रहा. महंत दिग्विजयनाथ, महंत अवैद्यनाथ अक्सर नेपाल आया जाया करते थे. जहां पर उनकी पूजा भी होती थी.

नाथ संप्रदाय के हैं तमाम मंदिर
वहीं नाथ पंथ के रिसर्चर डॉक्टर प्रदीप राव कहते हैं कि मौजूदा गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ भी नाथ पंथ के प्रमुख होने की हैसियत से अक्सर नेपाल जाया करते थे और वहां की जनता उन्हे भगवान गोरक्षनाथ के प्रतिनिधि के रूप में लेते हुए उनकी पूजा करती है. नेपाल की आम जनता में इनकी महत्ता है. नेपाल में जगह-जगह भगवान गोरखनाथ के मंदिर हैं. पशुपतिनाथ मंदिर में भी गोरखनाथ भगवान का मंदिर है, मुक्तिनाथ धाम नाथ संप्रदाय का ही है. इसलिए नेपाल में बड़ी संख्या में लोग नाथपंथ से जुड़े हुए हैं. डॉ. प्रदीप राव कहते हैं कि जिस तरह से नेपाल में जमीन को राजनीतिक विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है, उस विवाद को हल करने में गोरक्षपीठ बड़ी भूमिका निभा सकती है क्योंकि वहां के आम लोग इस पीठ से जुड़े हैं.

ये भी पढ़ें:-

UP में 50 जगह बम धमाके की धमकी के बाद बढ़ाई गई सीएम आवास की सुरक्षा

शव को कूड़े वालीगाड़ी में ले जाने पर अल्पसंख्यक आयोग गंभीर, जवाब तलब
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading