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गोरखपुर:-आखिर बनारस के बाद यह घाट क्यों लोगों को खींच रहा है अपनी ओर

गोरखपुर:-आखिर बनारस के बाद यह घाट क्यों लोगों को खींच रहा है अपनी ओर

गोरखपुर

गोरखपुर के गुरु गोरखनाथ घाट की बदल गई तस्वीर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के राप्ती तट पर स्थित राजघाट जहां कभी दाह संस्कार के लिए ही जाना जाता था लेकिन अब राप्ती तट पर बसे इस राजघाट का पूरी तरह से तस्वीर बदल गई है.अब यह घाट गुरु गोरक्षनाथ घाट रामघाट के नाम से जाना जाता है.राजस्थान के पत्थरों से इस घाट का सुंदरीकरण हुआ है जो अब आकर्षण का केंद्र बन गया है.

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    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के राप्ती तट पर स्थित राजघाट जहां कभी दाह संस्कार के लिए ही जाना जाता था लेकिन अब राप्ती तट पर बसे इस राजघाट का पूरी तरह से तस्वीर बदल गई है.अब यह घाट गुरु गोरक्षनाथ घाट रामघाट के नाम से जाना जाता है.राजस्थान के पत्थरों से इस घाट का सुंदरीकरण हुआ है घाट के अगल-बगल बनाए गए गुंबद लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए है.अब सैलानी भी यहां भारी संख्या में घूमने के लिए आते हैं.साथ ही हर मंगलवार को वाराणसी के घाटों की तर्ज पर गुरु गोरक्षनाथ घाट पर भी भव्य गंगा आरती का आयोजन किया जाता है. जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं इसके अलावा एक लाख दिए जलाने का भी रिकॉर्ड इस घाट पर बन चुका है.

    भगवान शिव की 50 मीटर की ऊंची प्रतिमा यहां स्थापित होने वाली है.अभी कुछ वर्षों पहले श्मशान घाट होने की वजह से यहां महिलाएं नहीं आती थी.लेकिन सुन्दरीकरण होने के बाद अब बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे यहां घूमने के लिए आते हैं.छठ और अन्य त्योहारों पर यहां मेले जैसा दृश्य दिखाई देता है.बनारस की तरह इस घाट को पूरी तरीके से विकसित किया गया है.लगभग 28 करोड़ की लागत से गुरु गोरखनाथ घाट,जबकि 15.60 करोड़ की लागत से श्रीराम घाट का निर्माण कराया गया है.अब लोग यहां घूम सकते हैं. पर्यटन के लिहाज से भी दोनों घाट रमणीक हैं.

    इसके बनने से गोरखपुर एवं आसपास के लोगों को पर्व-त्योहार पर स्नान के लिए साफ-सुथरा घाट मिल गया है.अब उन्हें किसी घाट की तलाश में दूसरी जगह नहीं जाना पड़ता है.राप्ती नदी के राजघाट पर बने श्मशान स्थल का नाम बाबा मुक्तेश्वरनाथ घाट के नाम अब जाना जाने लगा है.यह घाट बाबा मुक्तेश्वर धाम राजघाट के समीप है. कहा जाता है कि राप्ती नदी कभी बाबा मुक्तेश्वर धाम से सटकर प्रवाहित होती थी.साक्षात महादेव बाबा मुक्तेश्वर मुक्ति के अधीश्वर होने के नाते इस श्मशान घाट के भी अधीश्वर हैं.नई सुविधाओं से युक्त यह घाट अब उनके नाम से जाना जाएगा.इसकी मरम्मत व सुंदरीकरण पर भी पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. हर्बर्ट बांध से यहां तक पहुंचने के लिए सड़क को ऊंची कर टू लेन बनाया जा रहा है तट की सुंदरता से बाहर से आने वाले वाले अब इसकी सुंदरता का बखान करते नही थकते है.

    Tags: Gorakhpur news

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