Home /News /uttar-pradesh /

Analysis: जानिए 'गोरखपुर' सीट बीजेपी के लिए कैसे बन गई सबसे उलझाऊ...

Analysis: जानिए 'गोरखपुर' सीट बीजेपी के लिए कैसे बन गई सबसे उलझाऊ...

सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

हेमंत तिवारी ने कहा कि अभिनेता रवि किशन शुक्ला को गोरखपुर सीट से प्रत्याशी बनाना काफी चौंकाने वाला है, क्योकि उनका गोरखपुर से दूर-दूर तक कोई कनेक्शन नहीं है.

गोरखपुर में अब तक 18 बार लोकसभा चुनाव हुए हैं, जिसमें से आठ बार गोरक्षपीठ का कब्जा रहा है. योगी आदित्यनाथ तो लगातार पांच बार से चुनाव जीत चुके हैं. बीजेपी ने उलझन, असमंजस और अनिर्णय की स्थिति से उबरते हुए अभिनेता रवि किशन शुक्ला को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया. बता दें कि दशकों तक भाजपा का अभेद्य किला समझी जाने वाली यह सीट पिछले डेढ़ साल में बीजेपी के लिए सबसे उलझाऊ सीट में तब्दील हो गई है. यहां प्रत्याशी का चयन करने में पार्टी को रणनीतिक समीकरणों के दर्जनों सवाल हल करने पड़े.

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विशलेषक हेमंत तिवारी कहते हैं कि गोरखपुर की भाजपा इकाई में खींचतान ज्यादा है. जिसका नतीजा है कि उप चुनाव के दौरान बीजेपी प्रत्याशी उपेंद्र दत्त शुक्ला के हार का कारण बनी. तिवारी बताते हैं कि चूंकि उपेंद्र दत्त शुक्ला बहुत कम वोटों के अंतर से चुनाव हारे थे, ऐसे में इस सीट पर प्रबल दावेदारी उनकी ही बनती हैं. दरअसल, उपचुनाव की हार न केवल पार्टी के लिए बल्कि खुद सीएम योगी के लिए भी झटका देने वाली थी. सूत्र बताते हैं कि योगी के लिए उपेंद्र शुक्ला पसंदीदा प्रत्याशी नही हैं. इस पसंद-नापसंद की जड़ें इलाके की पुरानी राजनीति में धंसी हुई हैं.

बीजेपी प्रत्याशी रवि किशन शुक्ला


हेमंत तिवारी ने कहा कि अभिनेता रवि किशन शुक्ला को गोरखपुर सीट से प्रत्याशी बनाना काफी चौंकाने वाला है, क्योकि उनका गोरखपुर से दूर-दूर तक कोई कनेक्शन नहीं है. तिवारी ने बताया कि जैसे ही सीएम योगी ने प्रवीण निषाद और उनके पिता संजय निषाद को बीजेपी में शामिल किया, जिससे बीजेपी को निषाद वोटों का फायदा मिल सके. वहीं अखिलेश यादव ने गोरखपुर से पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद का कार्ड खेलकर समीकरण बदल दिया. तिवारी के मुताबिक रामभुआल निषाद को अपर कास्ट से लेकर ब्राह्मण तक में मजबूत पकड़ मानी जाती है. इससे पहले योगी ने पूर्व विधायक राजमति निषाद और उनके बेटे अमरेंद्र निषाद को सपा के खेमे से तोड़कर भाजपा में लाने जैसा मास्टरस्ट्रोक भी पेश किया.

पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद


राजनीतिक विशलेषक हेमंत तिवारी ने दावा किया कि पूर्वांचल की आधा दर्जन सीटों पर सपा-बसपा गठबंधन के आगे बीजेपी का समीकरण बदल सकता है. उन्होंने कहा कि बीजेपी प्रत्याशी रवि किशन शुक्ला कुछ जादुई करिश्मा इस सीट पर कर पाएंगे ऐसा मुझे कम लगता है. चूंकि गोरखपुर लोकसभा सीट पर साढ़े तीन लाख की संख्या वाली निषाद आबादी निर्णायक हैसियत रखती है. फिलहाल निषाद बनाम ब्राह्मण की सियासी जंग में जीत का सेहरा किसपर बंधता है इसकी तस्वीर 23 मई को साफ होगी.

उपेंद्र दत्त शुक्ला


निषाद वोटरों की अहम भूमिका
गोरखपुर के जातीय गणित को यदि देखा जाए तो यहां 19.5 लाख वोटरों में से 3.5 लाख वोटर निषाद समुदाय के हैं. इस संसदीय क्षेत्र में निषाद जाति के सबसे अधिक मतदाता हैं. वहीं यादव और दलित मतदाता दो-दो लाख हैं. ब्राह्मण वोटर करीब डेढ़ लाख हैं. यदि चुनाव में निषाद, यादव, मुसलमान और दलित एकजुट हो जाते हैं तो चुनाव परिणाम चौंका भी सकते हैं.

ये भी पढ़ें: CM योगी ने पूर्वा एक्सप्रेस हादसे पर लिया संज्ञान, प्रशासन को दिए निर्देश

ये भी पढ़ें: PHOTOS: काली रात को याद कर सिहर उठे पूर्वा एक्सप्रेस के यात्री, बोले- मौत से हुआ था सामना

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स

 

 

 

Tags: Akhilesh yadav, Amit shah, BJP, Gorakhpur news, Lok Sabha Election 2019, Pm narendra modi, Ravi Kishan, RSS, Uttar pradesh news, Uttar Pradesh Politics, VHP, Yogi adityanath

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर