गोरखपुर सर्कल में चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 364 करोड़ बकाया...
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गोरखपुर सर्कल में चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 364 करोड़ बकाया...
चीनी मिलों पर किसानों का बकाया एक बड़ी समस्या है (फ़ाइल फोटो)

हालांकि किसानों को समय से भुगतान नहीं देने के पीछे लॉकडाउन (Lockdown) को एक बड़ा कारण बताया जा रहा है. इस साल अभी तक चीनी की बिक्री काफी कम रही है

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गोरखपुर. गन्ना किसानों (sugarcane Farmers) के बकाये का भुगतान न होने से गन्ना किसान बेहद परेशान हैं. नकदी फसल (cash crop) मानी जानी वाली गन्ना के मूल्य का भुगतान जब रुकता है तब किसानों के सामने कई संकट खड़े हो जाते हैं. गोरखपुर सर्कल की पांच चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 364 करोड़ रुपये का बकाया है. प्रदेश सरकार का कहना है कि गन्ने मूल्य का भुगतान 14 दिनों के अंदर कर दिया जाए.

इन मिलों पर है बकाया
महाराजगंज जिले की सिसवा चीनी मिल पर 30 करोड़ 51 लाख का बकाया है, बस्ती जिले की बभनान चीनी मिल पर 60 करोड़ 81 लाख का बकाया है, बस्ती जिले की रूधौली चीनी मिल का 120 करोड़ 54 लाख का बकाया है, बस्ती जिले की ही मुन्डेरवा चीनी मिल का 74 करोड़ 85 लाख रुपये बकाया है. गोरखपुर जिले की पिपराइच चीनी मिल का 78 करोड़ रुपये किसानों का बकाया है. इसमें मुंडेरवा और पिपराइच चीनी मिल सहकारी चीनी मिल है. गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं होने पर अधिकारियों का कहना है कि अगर 14 दिन के अन्दर चीनी मिलें बकाये का भुगतान नहीं कर रही हैं तो ऐसी दशा में उन पर ब्याज भी लगाया जा रहा है.

लॉकडाउन भी है वजह



हालांकि किसानों को समय से भुगतान नहीं देने के पीछे लॉकडाउन को एक बड़ा कारण बताया जा रहा है. इस साल अभी तक चीनी की बिक्री काफी कम रही है. लॉकडाउन के कारण मिठाई की दुकानें बंद रही साथ ही शादी की सीजन में अधिकतर शादियां रद्द हो जाने से भी चीनी की बिक्री पर असर पड़ा. मिलों के पास चीनी का बड़ी मात्रा में स्टाक है. साथ ही दूसरा कारण जो है वो इस समय चीनी की लागत एक किलो पर करीब 35 रुपये आ रही है जबकि चीनी की बिक्री 32 रुपये में हो रही है, चीनी की लागत और बिक्री में एक बड़ा गैप भी गन्ना मूल्य भुगतान में बाधक बना हुआ है. वहीं बभनान चीनी मिल पर गन्ना तौलने वाले एक किसान रामफेर का कहना है कि गन्ने की फसल में अब फायदा नहीं रहा है. गन्ना पैदा करने में लागत काफी बढ़ गयी है. गन्ना उपजाने में मौजूदा समय में लेबर चार्ज बढ़ गया है. फिर भी किसी तरह से अगर गन्ना पैदा किया जाता है तो उसका समय से भुगतान नहीं मिलता है इसलिए गन्ना किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.



रामफेर कहते हैं कि लॉकडाउन में सब कुछ ठप रहा पर किसान को तो समय से ही अपनी फसल को बोना होता है. अगर समय से फसल नहीं बोएंगे तो काटेंगे क्या और फसल बोने के लिए पैसे की जरूरत होती है. इसलिए गन्ना मूल्य का भुगतान समय से होना जरूरी है. हालांकि पिछले बकाये के लिए राज्य सरकार ने किसानों को बकाये के भुगतान के एवज में चीनी देने के निर्देश भी चीनी मिलों को दिए थे. फिलहाल परेशान किसान किसी तरह से अपने बकाये का भुगतान चाहते हैं जिससे उनके सामने भुखमरी की नौबत न आए.

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