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गोरखपुर: जब सतर्क गांववालों ने रोक दिया कोरोना संक्रमण का रथ

गोरखपुर: जब सतर्क गांववालों ने रोक दिया कोरोना संक्रमण का रथ

बाद में एहतियातन प्रशासन ने पुरे गांव का सैनीटाइजेशन करवाया

बाद में एहतियातन प्रशासन ने पुरे गांव का सैनीटाइजेशन करवाया

रविवार की दोपहर लोग बुजुर्ग को लेकर अपने गांव पहुंचे. लेकिन गांव वालों ने बिना जांच के घुसने नहीं दिया.

गोरखपुर. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गोरखपुर (Gorakhpur) में पहले कोरोना पॉजिटिव (Corona Positive) मरीज मिलने के मामले में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल (Safdarjung Hospital) की लापरवाही सामने आ रही है. गोरखपुर के जिस मरीज में कोरोना की पुष्टि हुई वो रविवार को ही दिल्ली से गोरखपुर आया था. गांव ऊरवां के हाटा निवासी कोरोना पीड़ित बुजुर्ग को 19 अप्रैल को माइनर हार्ट अटैक आया, जिसके बाद उसे फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल और फिर उसे दिल्ली के सफदजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां पर इसका इलाज 25 अप्रैल तक चला. 25 अप्रैल को बुजुर्ग को वहां से डिस्चार्ज कर दिया गया. जिसके बाद 21 हजार रुपये में एक एम्बुलेंस बुक कर वहां से गोरखपुर रवाना हो गए. रविवार की दोपहर लोग बुजुर्ग को लेकर अपने गांव पहुंचे. लेकिन गांव वालों ने बिना जांच के घुसने नहीं दिया.

दरअसल, जब गांव वालों को इसकी सूचना मिली तब उन्होंने बुजुर्ग व उसके साथ आए लोगों को गांव के अंदर नहीं आने दिये और गांव के बाहर ही रोककर स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी. कुछ देर में ही इस व्यक्ति की सांस भी फूलने लगी. जिसके बाद इसे उरवां सीएचसी और वहां से जिला अस्पताल और फिर बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया. जहां पर कोरोना की जांच हुई और बाद में रिपोर्ट पॉजिटिव आई. संक्रमित के साथ आये दो अन्य लोग लग अलग गांव के थे उनको भी गांव वालों ने गांव के अंदर नहीं आने दिया था. रात में गांव के बाहर स्कूल में ही रोक दिया था. देर रात जब ये पुष्टि हो गई कि जिस व्यक्ति के साथ ये दोनो एम्बुलेंस से आये थे उसको कोरोना है. उसके बाद प्रशासन की टीम ने इन दोनों के साथ साथ पीड़ित के बेटे को टीबी अस्पताल में लाकर क्वारंटाइन कर दिया. इसी के साथ सोमवार को पूरे गांव को सील कर उसका सेनेटाइजेशन किया गया. सुबह के वक्त डीएम ने गांव का दौरा कर वहां की व्यवस्था को देखा तो शाम के वक्त इसका जायजा लेने कमिश्नर भी पहुंचे. गांव के तीन किलोमीटर के दायरे को सीज कर दिया गया है. साथ ही इसके साथ दिल्ली से आये दोनों व्यक्तियों के गांव को भी सील कर दिया गया है.

सफदरजंग अस्पताल की लापरवाही

19 अप्रैल से सफदरजंग में इस व्यक्ति का हार्ट/शुगर/ बीपी का इलाज चल रहा था. 25 अप्रैल तक ये व्यक्ति वहां पर भर्ती रहा. अगर समय रहते वहां पर इसकी कोरोना की जांच हो जाती तो इस व्यक्ति का वहीं पर इलाज हो सकता था. पर वहां पर जांच नहीं होने के कारण अब कम से कम तीन और लोग संदिग्ध की श्रेणी में आ गये हैं

ग्रामीणों की जागरूकता आई काम

ग्रामीणों की जागरूकता का नतीजा ये रहा कि पीड़ित व्यक्ति के साथ आने वाले दो लोग और पीड़ित के बेटे के सिवा और कोई भी व्यक्ति संदिग्ध नहीं हुआ. अगर ग्रामीणों ने सभी को गांव के बाहर नहीं रोका होता तो आज कम से कम तीनों के परिवार वाले तो कोरोना के संदिग्ध हो ही जाते. गांव में मरीज आने पर जिस तरह से गांव वालों ने सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दी उससे उनके गांव में कोरोना बम फूटने से बच गया.

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Tags: Coronavirus, Coronavirus in India, Gorakhpur news

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