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गोरखपुर: पुलिस के रवैये से आहत जज ने CM योगी को लिखी चिट्टी, लगाया ये बड़ा आरोप
Gorakhpur News in Hindi

Ram Gopal Dwivedi | News18 Uttar Pradesh
Updated: February 4, 2020, 6:37 PM IST
गोरखपुर: पुलिस के रवैये से आहत जज ने CM योगी को लिखी चिट्टी, लगाया ये बड़ा आरोप
गोरखपुर के न्यायधीश ने सीएम योगी आदित्‍यनाथ से की पुलिस की शिकायत.

गोरखपुर पुलिस (Gorakhpur Police) की कार्यप्रणाली से आहत जज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) को चिट्ठी लिख है. विशेष न्यायधीश एससी/एसटी पवन कुमार तिवारी ने चिट्ठी में कई सीओ और एसओ पर मुकदमों की रिपोर्ट समय पर ना देने का आरोप लगाया है.

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गोरखपुर. मुकदमों को लेकर गोरखपुर पुलिस (Gorakhpur Police) की कार्यप्रणाली से आहत जज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) को चिट्ठी लिख दी है. विशेष न्यायधीश एससी/एसटी पवन कुमार तिवारी (Pawan Kumar Tiwari) ने मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी में कहा कि कई सीओ और एसओ न तो मुकदमों से संबंधित रिपोर्ट समय से भेजते हैं और न ही आदेशों का अनुपालन कर रहे हैं. ऐसे में विवादों के निस्तारण ही नहीं बल्कि पीड़ितों को न्याय मिलने में भी देरी हो रही है.

पुलिस के मनमाने रवैये से नाराज हुए जज
छह माह में कई बार कहने के बावजूद आख्या न भेजने पर एसओ गगहा को जज ने अदालत में तबल किया है. पुलिस के इस मनमाने रवैये के बारे में जज ने मुख्यमंत्री के साथ प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, एडीजी अभियोजन और एडीजी गोरखपुर को भी अवगत कराया है. साथ ही कार्रवाई संबंधित आवश्यक निर्देश भी जारी करने की अपेक्षा की है.

जज ने लिखी ये बात



जज ने लिखा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1989 के अंतर्गत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों पर अत्याचार का अपराध करने का निवार्रण करने के लिए तथा ऐसे अपराधों के विचारण के लिए यह अनन्य विशेष न्यायालय गठित है. अधिनियम में दो माह में वादों का निस्तारण किया जाना निर्देशित किया गया है. लेकिन सीओ और थानाध्यक्ष की तरफ से रिपोर्ट और आदेशों का पालन न होने से इसमें कठिनाई आ रही है. उन्होंने पुलिस को सहयोग देने के लिए निर्देश जारी करने की अपेक्षा की है. पत्र में एसओ गगहा के बारे में जज ने लिखा है कि 29 मई 2019 को सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत उनको मुकदमा दर्ज कर विवेचना कराने तथा कृत कार्रवाई की रिपोर्ट न्यायालय में प्रेषित करने का आदेश दिया गया था. 23 जुलाई से अब तक कई बार न्यायालय ने थाने से प्रगति आख्या मांगी, लेकिन थाने से कोई रिपोर्ट नहीं भेजी गयी. थानेदार के इस उपेक्षापूर्ण आचरण के चलते उन्हे 7 फरवरी को न्यायलय में उपस्थित होकर कारण स्पष्ट करने का आदेश दिया है. साथ ही उनसे पूछा कि क्यों न उनके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई करते हुए सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया जाए.



 

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First published: February 4, 2020, 6:36 PM IST
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